मध्यप्रदेश

ट्रेलर के नीचे 50 फीट तक घिसटते रहे दो दोस्त, 3 जेसीबी और 4 घंटे की मशक्कत के बाद निकले शव

नीमच: शहर के कैंट थाना क्षेत्र में आने वाले भरभड़िया फंटे पर गुरुवार देर रात एक ऐसा भयानक हादसा हुआ, जिसे देख प्रत्यक्षदर्शियों की रूह कांप गई। सीमेंट बनाने का कच्चा माल यानी क्लिंकर लेकर जा रहे एक तेज रफ्तार ट्रेलर ने बाइक सवार दो दोस्तों को अपनी चपेट में ले लिया। टक्कर इतनी भीषण थी कि दोनों युवक ट्रेलर के अगले हिस्से में फंस गए और करीब 50 फीट तक सड़क पर घिसटते चले गए। इसके बाद बेकाबू ट्रेलर लोहे की रेलिंग और बिजली के खंभों को तोड़ता हुआ पास के खेत में जा घुसा। हादसे में दोनों युवकों के शरीर के चीथड़े उड़ गए।

क्रेन से नहीं हिला भारी ट्रेलर

हादसे के बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने जब शवों को निकालने की कोशिश की, तो भारी वजन रुकावट बन गया। ट्रेलर सीमेंट के माल से पूरी तरह लदा था, जिसके कारण वह बहुत भारी हो गया था। रेस्क्यू के लिए बुलाई गई क्रेन ट्रेलर को हिला तक नहीं पाई। इसके बाद प्रशासन ने तीन बुलडोजर यानी जेसीबी मशीनों को मौके पर बुलवाया। पहले सड़क पर ट्रेलर का माल खाली कराया गया, फिर केबिन और भारी पहियों के नीचे दबे शवों को निकालने का काम शुरू हुआ। करीब चार घंटे चले इस रेस्क्यू के बाद रात 11.30 बजे पहला शव और रात 12.30 बजे दूसरा शव बाहर निकाला जा सका।

11 हजार केवी की लाइन टूटी

हादसे के दौरान जब ट्रेलर रेलिंग तोड़कर खेत में घुसा, तो वहां लगे बिजली के खंभे भी उखड़ गए। 11 हजार केवी की हाईटेंशन लाइन के तार टूटने से वहां जोरदार स्पार्किंग हुई और आग की लपटें दिखाई देने लगीं। धमाकों की आवाज और करंट के डर से इलाके में अफरा-तफरी मच गई। पुलिस अधिकारियों ने तुरंत बिजली विभाग को सूचना देकर लाइन कटवाई, तब जाकर बचाव कार्य शुरू हो सका।

अस्पताल में परिजनों का हंगामा

शुक्रवार सुबह जब मृतकों के शव जिला अस्पताल लाए गए, तो वहां तनाव की स्थिति बन गई। मृतक गोविंद और भूपेंद्र के परिजनों ने शव लेने से इनकार कर दिया और अस्पताल परिसर में ही जमीन पर धरने पर बैठ गए। परिजनों का कहना था कि दोनों ही अपने घर के इकलौते कमाने वाले सदस्य थे। गोविंद के दो छोटे बच्चे हैं और अब परिवार के सामने भूखों मरने की नौबत आ गई है। उन्होंने सरकार से आर्थिक मदद की मांग करते हुए जमकर नारेबाजी की। मौके पर पहुंचे तहसीलदार और थाना प्रभारी ने जब सरकारी नियमों के तहत सहायता दिलाने का भरोसा दिया, तब जाकर परिजन शांत हुए और दोपहर में पोस्टमार्टम की प्रक्रिया शुरू हो पाई।

बुझ गए दो घरों के चिराग

मृतक गोविंद रैगर के भाई पारसमल ने बताया कि गोविंद और भूपेंद्र रोज मजदूरी के लिए नीमच आते थे और काम खत्म कर रात में घर लौटते थे। गोविंद की शादी 2015 में हुई थी, उसके 4 और 8 साल के दो बेटे हैं। वहीं भूपेंद्र उर्फ सोनू राजपूत छत की सेंटिंग का काम करता था। वह अपने माता-पिता और भाई का सहारा था। इस एक हादसे ने दो हंसते-खेलते परिवारों को उजाड़ कर रख दिया है। पुलिस ने ट्रेलर जब्त कर जांच शुरू कर दी है।

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