राजनीति

ठाकरे खुद बिहार से, संजय निरुपम का उद्धव-राज पर हमला, AIMIM के उभार को शिंदे के नेता ने बयाया खतरनाक

मुंबई: मुंबई में बिहार भवन बनाने का स्वागत करते हुए शिंदे सेना के प्रवक्ता और पूर्व संसद संजय निरुपम ने कहा कि मरीजों के रहने और उपचार करने के लिए भवन बनाया जा रहा है तो उससे क्या नुकसान है। अच्छे काम का विरोध करने के कारण ही तो बीएमसी की सत्ता से उन्हें मुंबईकर ने बेदखल कर दिया। और विरोध कौन कर रहा है, अरे वह ठाकरे परिवार है जो कि खुद ही बिहार से आया है। बुधवार को पत्रकारों से बात करते हुए शिंदे सेना के नेता ने ठाकरे परिवार की जमकर खबर ली। उन्होंने ठाकरे भाइयों को याद दिलाया कि प्रबोधनकार ठाकरे ने अपनी आत्मकथा में लिखा है कि उनका मूल मगध क्षेत्र से था, जो आज के बिहार में आता है। जो खुद बिहार से है वो खुद बिहार का विरोध करते हैं ऐसे में बिहार का विरोध करना दुर्भाग्यपूर्ण है।

महानगरपालिका चुनाव पर अपनी बात रखते हुए संजय निरुपम ने कहा कि इस चुनाव में उद्धव सेना का राजनीतिक अस्तित्व लगभग समाप्त हो चुका है। जनता ने अपने मतों के माध्यम से स्पष्ट कर दिया है कि असली शिवसेना कौन-सी है। उन्होंने कहा कि उद्धव सेना का एक भी महापौर नहीं बना सका, जबकि एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के तीन महापौर बनने की पूरी संभावना है। यह परिणाम उद्धव सेना के लिए बेहद शर्मनाक हैं। निरुपम ने याद दिलाया कि महानगरपालिका के चुनाव में उद्धव सेना पांचवें नंबर पर चली गई है। चुनावों में शिवसेना के 399 नगरसेवक चुने गए हैं, जबकि उद्धव सेना के केवल 155 नगरसेवक ही जीत पाए हैं। मुंबई महानगरपालिका चुनाव में भी जनता ने उद्धव सेना को विपक्ष में बैठने का फैसला सुनाया है।

मजहब के आधार पर मतदान पर चिंता

संजय निरुपम ने कहा कि इस चुनाव में पहली बार खुलकर धर्म के आधार पर मतदान देखने को मिला। कई इलाकों में हिंदू और मुस्लिम वोट स्पष्ट रूप से अलग-अलग नजर आए। जहां मुस्लिम मतदाता अधिक थे, वहां शिवसेना के उम्मीदवार जीतते-जीतते हार गए। लगभग 15 वार्ड ऐसे हैं, जिनमें वार्ड क्रमांक 32, 121, 79, 61, 201 और 204 शामिल हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि मुस्लिम वोट एक रणनीति के तहत अलग-अलग दलों में बांटे गए। जहां कांग्रेस मजबूत थी वहां कांग्रेस को, जहां उद्धव सेना मजबूत थी वहां उद्धव सेना को और जहां एमआईएम मजबूत थी वहां एमआईएम को वोट दिए गए। उन्होंने इसे लोकतंत्र के लिए खतरे की घंटी बताया।

AIMIM का बढ़ाया प्रभाव सुरक्षा के लिए खतरा

निरुपम ने कहा कि महाराष्ट्र में एमआईएम का बढ़ता प्रभाव राज्य की सुरक्षा के लिए चिंता का विषय है। मुम्ब्रा में एमआईएम उम्मीदवार की जीत के बाद दिए गए बयान समाज में तनाव पैदा करने वाले हैं। उन्होंने कहा कि इतिहास गवाह है कि हजार साल के शासन में भी कोई देश को हरा नहीं कर सका खिलजी , तुगलक और मुग़ल की कोशिश नाकाम रही तो अब मुम्ब्रा की गलियों से कुछ आवाजे क्या इसे हरा कर पाएगी। नागपुर दंगे के आरोपी फहीम की पत्नी का एमआईएम से जीतकर आना और मालेगांव जैसे इलाकों में विवादित तत्वों को संरक्षण मिलना गंभीर विषय है। उन्होंने मांग की कि ऐसे क्षेत्रों में चुने गए प्रतिनिधियों और उन्हें वोट देने वालों की गतिविधियों पर विशेष नजर रखी जानी चाहिए।

हिंदू मतदाताओं को सतर्क रहने की अपील

संजय निरुपम ने कहा कि ठाकरे भाइयों ने हिंदू वोट को बांटा, जिसका फायदा मुस्लिम वोट बैंक की राजनीति ने उठाया। अब हिंदू मतदाताओं को सतर्क रहने की जरूरत है। मालेगांव, परभणी, मुंब्रा, संभाजीनगर, भिवंडी और मानखुर्द जैसे इलाकों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों में कानून-व्यवस्था को लेकर विशेष सतर्कता जरूरी है, ताकि भविष्य में कोई खतरा पैदा न हो क्यूं की यह जो इलाका है वो दंगाइयों और ब्लास्ट के आरोपियों को संरक्षण देने वाला इलाका बन गया है यहां से चुनकर आए उम्मीदवारों और इन्हे चुनकर लाने वालो पर कड़ी नजर रखी जाए।

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