डाक नहीं आई

भारतीय लोकतंत्र में डाक व्यवस्था का उसी तरह महत्वपूर्ण स्थान है जिस प्रकार रेलवे का। डाक रुक जाए तो समाज की धडक़न रुक जाती है, रेलगाड़ी ठहर जाए तो कहर बरप जाता है। अन्य कई और सुविधाओं की तरह ये दोनों व्यवस्थाएं वस्तुत: जन कल्याण के अंतर्गत आती हैं और इसीलिए इनमें कुछ छूट भी दी जाती रही है। रेलवे में जैसे सीनियर सिटिजंस को टिकिट में 30 प्रतिशत की छूट थी। डाक में भी ज्ञान के प्रसार के लिए अनेक प्रकार की छूट रहती थी, जैसे रजिस्टर्ड बुक पोस्ट, साधारण बुक पोस्ट की, जो अब बंद कर दी गई है। शायद डाक विभाग को भी व्यावसायिक बनाने का प्रयत्न किया जा रहा है। कुछ क्षेत्र ऐसे होते हैं जिन्हें छूट मिलनी ही चाहिए, लेकिन लगता है कि डाक विभाग भी कारपोरेट सेक्टर की भांति घड़ाधड़ धन कमाने की होड़ में लग गया लगता है, जबकि केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया से तो उम्मीद थी कि महाराज जी उदारचेता होंगे और डाक विभााग को जन कल्याण से संपुष्ट रखेंगे, लेकिन खरबूजे को खरबूजा देख कर रंग पकड़ता है। और डाक विभाग ने अपना रंग दिखाना शुरू कर दिया है। एक रात मेरे गांव राजपुर का पोस्ट आफिस गायब हो गया। आश्चर्य हुआ कि विकास के सपने दिखाने वाली सरकार के अमृत काल में बिना आहट किए एक सुविधा उडऩछू हो गई और डाक घर के कस्टमर मुंह ताकते रह गए। दस वर्ष के लंबे संघर्ष के बाद राजपुर का ब्रांच पोस्ट आफिस उप डाकघर के रूप में अपग्रेड हुआ था जिसका उद्घाटन पूर्व केन्द्रीय मंत्री शांता कुमार जी ने 25 मार्च 2018 को किया था। राजपुर और इसके इर्द-गिर्द की आबादी ने इसका स्वागत किया था और हजारों खाते खुलवाए थे, परंतु गत सात साल में कभी भी पोस्ट आफिस के सीनियर अधिकारियों ने पोस्ट आफिस के लाभार्थियों से कोई मीटिंग नहीं की।
वास्तव में जो भी प्रभारी यहां नियुक्ति पर आए, उनमें से एक आध अपवाद को छोड़ कर कोई भी कृतसंकल्प नहीं दिखा। राजपुर में अधिकांश आबादी सीनियर एवं सुपर सीनियर, वृद्ध महिलाओं और पुरुषों की है। आप सुविधा छीन रहे हैं बिना किसी वार्निंग के, बिना किसी नोटिस के। ग्रामवासियों में आक्रोश वाजिब है और यही कारण है कि उन्होंने निर्णय लिया है कि वे बायकाट करेंगे और अपने अकाउंट राजपुर से ही संचालित करवाएंगे। कांगड़ा-चंबा के लोकसभा सांसद डा. राजीव भारद्वाज, श्री शांता कुमार तथा अन्य संबद्ध लोगों को रोष पत्र सौंप दिया गया है। वास्तव में विभाग का एकतरफा निर्णय कि राजपुर वासी कृषि विश्वविद्यालय पोस्ट आफिस से जोड़ दिए गए हैं, जनता को अमान्य एवं अव्यवहार्य और तुगलकी फरमान है। राजपुर में ही ये अकाउंट खोले गए थे और राजपुर पोस्ट आफिस के लिए ही थे। विभाग की धींगामुश्ती अटपटी लगती है। एकतरफा डिक्टेटराना कार्यवाही अनुचित एवं अन्यायपूर्ण तो है ही औैर विकसित भारत की राह पर चलते भारत के लिए एक जनता विरोधी कुत्सित पग भी है कि रात के अंधेरे में ही कम्प्यूटर आदि उतार कर ले गए, यानी पोस्ट आफिस चोरी हो गया। इस पोस्ट आफिस को बहाल किया जाना चाहिए।-डा. सुशील कुमार फुल्ल




