त्रासदी की चुनौतियां

भारत को 2030 के राष्ट्रमंडल खेलों की मेजबानी मिली है। यह भारत की आर्थिक उन्नति, आधारभूत ढांचे, खेल की व्यवस्थाओं की बड़ी सफलता की शुरुआत है। यदि गुजरात के अहमदाबाद में 2030 के राष्ट्रमंडल खेल कामयाबी से सम्पन्न हो गए, तो 2036 के ओलिंपिक की मेजबानी का भारत का दावा काफी मजबूत होगा। ओलिंपिक जैसे विराट आयोजन से हमारी अर्थव्यवस्था एक ऊंची छलांग लगा सकती है। बहरहाल राष्ट्रमंडल खेलों की शुरुआत से पहले हरियाणा में बास्केटबॉल के दो होनहार, राष्ट्रीय खिलाडिय़ों की त्रासदी सवाल भी पैदा करती है और चुनौती भी है। हम किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं कर सकते। बास्केटबॉल का उल्लेख होता है, तो महान खिलाड़ी शाक्विले ओ’ नील की याद ताजा हो जाती है। एनबीए के कई बार चैम्पियन रहे नील का वजन, खिलाड़ी होने के बावजूद, 140 किग्रा से अधिक था। उन्होंने 19 साल के अपने करियर में 2626 बार गेंद हवा में उछाल कर बास्केट में जोर से पटकी। एक किस्म के गोल किए, लेकिन न तो कभी बास्केट का फ्रेम टूटा और न ही पोल गिरा। एनबीए खिलाडिय़ों का औसत वजन 98 किग्रा होता है। उन्होंने हर सीजन में करीब 11,000 बार गेंद बास्केट में डाली है और गोल किए हैं, लेकिन कभी त्रासद दुर्घटना नहीं हुई। तो हरियाणा में अमन कुमार और हार्दिक राठी बास्केटबॉल के फ्रेम के नीचे दबकर कैसे मर गए? वे भी राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी थे और राष्ट्रमंडल खेलों में पदक जीत सकते थे। वे किसी दिन नील के स्तर तक भी पहुंच सकते थे! उसे सिर्फ ‘घटना’ करार देकर अथवा खिलाडिय़ों के परिजनों को मुआवजा देकर शांत नहीं किया जा सकता। उनकी मौत मानवीय एजेंसी के क्षेत्र के पार मानी जा रही है।
अर्थात हालात मानवीय नियंत्रण के पार थे। क्या फ्रेम इसलिए गिरे, क्योंकि उसके स्टील पोल्स अत्यधिक जंग खा चुके थे, जीर्ण-शीर्ण अवस्था में थे? यह संभव हो सकता है, लेकिन यह फ्रेम और पोल्स के गिरने तक सीमित है। आखिर अमन और हार्दिक की मौत कैसे हुई? यही व्यवस्था का सवाल है, जो राष्ट्रमंडल खेलों के आयोजन के दौरान बार-बार उठेगा, क्योंकि यह भारत की जिम्मेदारी और जवाबदेही होगी। हरियाणा के उस क्षेत्र में खेल-व्यवस्था क्या अंधी-बहरी थी, जो फ्रेम, पोल्स की जर्जर अवस्था देख नहीं सकी? उसे बार-बार आगाह किया गया, लेकिन व्यवस्था नजरअंदाज करती रही, लिहाजा खेल अधिकारियों का निलंबन ही पर्याप्त नहीं है। यदि हरियाणा सरकार खेल के प्रति गंभीर और संवेदनशील है, तो उस इलाके के सभी जिम्मेदार अफसरों को बर्खास्त किया जाए और जांच भी उच्चस्तरीय की जाए। हाल ही में भारत की दृष्टिबाधित महिला क्रिकेट खिलाडिय़ों ने पहली बार विश्व कप जीता है। प्रधानमंत्री मोदी ने उन्हें अपने आवास पर बुला कर न केवल प्रोत्साहित किया, बल्कि अपने हाथों से मिठाई भी खिलाई। उन खिलाडिय़ों को जो नकद पुरस्कार मिलेंगे, वे अलग हैं। दृष्टिबाधित खिलाड़ी और क्रिकेट जैसे खेल का विश्व कप…सचमुच असंभव, अकल्पनीय लगता है, लेकिन खिलाडिय़ों का हर स्तर पर पालन-पोषण करना पड़ता है, तब वे देश के लिए पदक और ट्रॉफी जीत सकते हैं। बेशक रोहतक में जिस तरह हार्दिक पर फ्रेम गिरा था, उसके वीडियो ने देश को खौफजदा कर दिया होगा! बास्केटबॉल को अहमदाबाद राष्ट्रमंडल खेलों में शामिल करने पर गंभीर विचार जारी है, लेकिन अब हमारी पदक दावेदारी कमजोर होगी।




