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दुनिया का इकलौता देश, जिसने लिया था अमेरिका से पंगा, आंख तरेरने का हुआ था खौफनाक अंजाम!

अमेरिका ने एक बार फिर वेनेजुएला के जरिये दुनिया को अपनी ताकत दिखाई है. अमेरिका सुपर पावर बनने के लिए किसी भी हद तक जा सकता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि दुनिया में एक ऐसा देश है, जिसने एक समय में अमेरिका से टक्कर लेने की कोशिश की थी.

आधी रात अचानक अमेरिका ने वेनेजुएला पर अटैक कर देश को अपने कंट्रोल में ले लिया. ऐसा कई बारे होता है जब पावरफुल देश अपने से कम ताकतवर देशों को कब्जे में लेते हैं. लेकिन इतिहास के पन्नों में कई ऐसे पल भी दर्ज हैं जहां छोटे देशों ने बड़ी ताकतों को चुनौती दी.

इन किस्सों में जापान की कहानी सबसे अलग और सबसे दर्दनाक है. यह दुनिया का वो इकलौता देश है जिसने अमेरिका जैसी उभरती महाशक्ति से सीधे पंगा लिया और उसके अंजाम ने पूरी दुनिया डरा दिया. जहां कोई भी देश अमेरिका से सीधे बात करने से डरता था, वहीं जापान ने ऐसा कुछ किया, जिसका अंजाम उसे चार साल बाद चुकाना पड़ा. क्या है ये पूरा मामला?

जापान ने किया था अमेरिका पर अटैक
7 दिसंबर 1941 का वो काला दिन जब पर्ल हार्बर पर जापानी विमानों ने अचानक हमला बोल दिया था. अमेरिकी नौसेना के बेड़े पर बमबारी की गई, जहाज डूबे, हवाई जहाज तबाह हुए. इसमें 2,403 अमेरिकी मारे गए और 1,178 घायल हुए. जापान का मकसद था प्रशांत महासागर में अपना वर्चस्व कायम करना और अमेरिका को युद्ध से दूर रखना. लेकिन यह हमला अमेरिका के लिए ‘आक्रामकता का दिन’ बन गया. राष्ट्रपति फ्रैंकलिन डी. रूजवेल्ट ने इसे ‘इन्फेमी का दिन’ कहा और अमेरिका द्वितीय विश्व युद्ध में कूद पड़ा. जापान ने सोचा था कि यह आश्चर्यजनक हमला अमेरिका को हिलाकर रख देगा, लेकिन इसका उल्टा हुआ. अमेरिका की पूरी ताकत जुट गई. चार साल तक खूनी युद्ध चला. प्रशांत महासागर में द्वीप-द्वीप पर लड़ाई हुई, जहां अमेरिकी सेना ने जापान को पीछे धकेल दिया. जापान की सेना कमजोर पड़ती गई, लेकिन वो हार नहीं मान रहे थे. तब अमेरिका ने वो करने का फैसला किया, जिसका अंजाम पूरी दुनिया को भुगतना पड़ा.

कर दिया परमाणु हमला
जब जापान ने अमेरिका के सामने हार मानने से मना कर दिया तब अंत में 6 अगस्त 1945 को अमेरिका ने पहला एटम बम ‘लिटिल बॉय’ हिरोशिमा पर गिरा दिया. एक पल में पूरा शहर तबाह हो गया. मशरूम क्लाउड आसमान में उठा और 70,000 से ज्यादा लोग तुरंत मारे गए. तीन दिन बाद 9 अगस्त को दूसरा बम ‘फैट मैन’ नागासाकी पर गिराया गया. यहां भी तबाही मची, हजारों जिंदगियां खत्म हो गई. कुल मिलाकर 1.5 से 2 लाख लोग इन बमों से मारे गए और आने वाली पीढ़ियां विकिरण से प्रभावित रही. यह दुनिया में पहली और अब तक आखिरी बार किसी देश पर परमाणु हथियार इस्तेमाल किया गया. पूरी दुनिया स्तब्ध रह गई. सोवियत संघ ने भी जापान पर हमला बोल दिया. जापान के पास कोई चारा नहीं बचा. 15 अगस्त 1945 को सम्राट हिरोहितो ने रेडियो पर घोषणा करते हुए बताया कि जापान ने बिना शर्त सरेंडर कर दिया है. 2 सितंबर 1945 को यूएसएस मिसौरी पर सरेंडर साइन किया गया. इस घटना ने दुनिया को सिखाया कि अमेरिका जैसी ताकत से टकराना कितना महंगा पड़ सकता है. तब से आजतक किसी अन्य देश ने ऐसा करने की गलती नहीं की है.

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