दुनिया का सबसे नमकीन तालाब, पानी में घुला है इतना नमक, -58 डिग्री सेल्सियस तापमान में भी नहीं जमता!

अंटार्कटिका के मैकमुर्डोज़ ड्राय वैली में मौजूद एक तालाब, डॉन जुआन दुनिया का सबसे नमकीन पानी का स्रोत है. इसका पानी डेड सी से भी ज्यादा नमकीन है. यही कारण है कि जब तापमान -58 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचता है, तब भी ये तालाब नहीं जमता
आप ये तो जानते होंगे कि समुद्र में नमक होता है. नमक मिलने की वजह से उनका घनत्व, नदी या तालाब की तुलना में ज्यादा होता है. पर क्या आप जानते हैं कि दुनिया में एक ऐसा भी तालाब है जिसके पानी का घनत्व इतना ज्यादा है कि -58 डिग्री तक तापमान पहुंचने के बाद भी पानी नहीं जमता. यही नहीं, इसका घनत्व डेड सी से ज्यादा है. ये अनोखा तालाब अंटार्कटिका में मौजूद है. आइए, आपको इसके बारे में ज्यादा जानकारी देते हैं.
अंटार्कटिका के मैकमुर्डोज़ ड्राय वैली (McMurdos Dry Valley) में मौजूद एक तालाब, डॉन जुआन (Don Juan Pond) दुनिया का सबसे नमकीन पानी का स्रोत है. इसका पानी डेड सी से भी ज्यादा नमकीन है. यही कारण है कि जब तापमान -58 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचता है, तब भी ये तालाब नहीं जमता. ये तालाब करीब 4 इंच गहरा है. ये असल में तालाब कम और बड़ा गड्ढा ज्यादा लगता है. पर इस तालाब ने वैज्ञानिकों को सालों से हैरान किया है. कारण है इसकी अनोखी संरचना. साल 1961 में वैज्ञानिकों ने इस तालाब की खोज की थी.
बेहद ठंडे तापमान में भी नहीं जमता पानी
तब वो ये देखकर हैरान हुए थे कि जिस जगह पर मौसम का तापमान -58 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है, उस जगह पर पानी का ये छोटा सा स्रोत नहीं जम रहा था. उसी वक्त उस तालाब की जांच की गई और पाया गया कि उस तालाब के पानी में 40 फीसदी नमक मिला है. तुलना के लिए बता दें कि डेड सी में नमक की मौजूदगी 34 पर्सेंट है. वहीं दुनिया के तमाम महासागरों का पानी 3.5 पर्सेंट तक नमकीन है और ग्रेट सॉल्ट लेक में 5 से 26 फीसदी तक नमक है. हैरानी की बात ये है कि ये तालाब धरती की सबसे सूखी जगहों में से एक, मैकमुर्डोज़ ड्राय वैली में है. यहां पर शायद ही कभी बारिश होती होगी. ये बिल्कुल सूखी जगह है, जहां पर 321 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलती हैं. हैरानी ये भी है कि अंटार्कटिका में होने के बावजूद यहां पर बर्फ नहीं पड़ती.
कैसे भरता है तालाब में नमकीन पानी?
इस जगह के आसपास के तालाब ठंड में जम जाते हैं और उनके ऊपर मोटी बर्फ जम जाती है. पर डॉन जुआन पॉन्ड शायद ही कभी जमता होगा. इसका कारण है कि इसमें बहुत ज्यादा मात्रा में केल्शियम क्लोराइड सॉल्ट है जो पानी के फ्रीज़िंग पॉइंट को नीचे कर देता है और बर्फ नहीं जमने देता. सालों तक वैज्ञानिकों को यही लगता रहा कि ये तालाब ग्राउंडवॉटर से भरा है, जो नीचे आ रहा है. पर 10 साल पहले ब्राउन यूनिवर्सिटी के रिसर्चर्स ने खोजा कि ये नमकीन पानी अधिकतर हवा से आता है. उन्होंने कैमरे लगाकर ये दिखाया कि मिट्टी में जो नमक मौजूद है, वो हवा से नमी को सोखता है. इस प्रोसेस को तरलीकरण (deliquescence) कहते हैं. ये नमकीन पानी फिर धीरे-धीरे तालाब में जाने लगता है और पिघली हुई बर्फ के साथ मिल जाता है. सबसे रोचक बात ये भी है कि वैज्ञानिकों को इतनी दुर्गम स्थिति में भी जीव-जंतुओं के सबूत मिले हैं. इस वजह से उनका मानना है कि अगर यहां पर जीवन होने की संभावना है तो फिर मार्स ग्रह पर भी होगी, जहां की परिस्थितियां यहां के जैसी ही हैं.




