नागपुर में आरएसएस का विजयादशमी उत्सव, सरसंघचालक मोहन भागवत बोले- नशा राष्ट्रीय समस्या बन गया है

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के विजयदशमी कार्यक्रम नागपुर में जारी है। हर साल विजयादशमी पर होने वाला संघ का वार्षिक उत्सव संगठन के लिए बेहद खास होता है।
तकनीक सिर्फ साधन, विवेकपूर्ण उपयोग सबसे महत्वपूर्ण
सरसंघचालक मोहन भागवत ने कहा हम भारत के विश्वगुरु बनने की बात तो करते हैं, लेकिन इसका वास्तविक दायित्व आने वाली नई पीढ़ी के कंधों पर है। हमें भावी पीढ़ी को इस बड़ी ज़िम्मेदारी को संभालने के लिए तैयार करना होगा। तकनीक के अनेक लाभ हैं और इसके प्रवाह को रोका नहीं जा सकता, लेकिन हमें यह समझना होगा कि ज्ञान और तकनीक केवल साधन हैं। मायने यह रखता है कि हम उनका उपयोग किस दिशा और कितने विवेक के साथ कर रहे हैं।
19 Oct 20269:00:22 PM
ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर नियंत्रण और अनुशासन समय की मांग
सरसंघचालक मोहन भागवत ने कहा, विभिन्न माध्यमों से प्राप्त जानकारी बिना उचित-अनुचित का विवेक किये नई पीढ़ी ग्रहण करती है। उसके दुष्परिणामों का अनुभव होने के बाद विभिन्न देशों ने कुछ अनुशासन और निर्बन्ध लागू किये हैं।
हमारे अपने देश में भी इस प्रकार की आवश्यकता, विशेषत: ओटीटी प्लेटफॉर्म्स को लेकर, समाज में अनुभव की जा रही है। शासन प्रशासन को इसका विचार करना चाहिये।
नशा एक गंभीर राष्ट्रीय समस्या
सरसंघचालक मोहन भागवत ने नशीली दवाओं की लत पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि विवेक के अभाव में विश्वभर में युवा पीढ़ी नशे का शिकार हो रही है। उन्होंने इसे एक गंभीर राष्ट्रीय समस्या बताया और कहा कि इसके समाधान के लिए शासन, प्रशासन और समाज को समय रहते एकजुट होकर कदम उठाने होंगे।
समाज की वर्तमान अभिभावक पीढ़ी का यह दायित्व है कि वह नई पीढ़ी में सही विवेक और नैतिक संस्कारों का बीजारोपण करे।
भारत के पास समस्याओं का जवाब
सरसंघचालक मोहन भागवत ने कहा कि आज पूरी दुनिया विकास और पर्यावरण को एक साथ साधने तथा विविधताओं के साथ सामंजस्य बिठाने की चुनौती से जूझ रही है। बढ़ते भू-राजनीतिक और पर्यावरणीय तनावों के बीच विश्व को यह विश्वास है कि इन सभी वैश्विक समस्याओं का समाधान भारत की सनातन दृष्टि और सांस्कृतिक मूल्यों के पास है। दुनिया को पता है कि भारत के पास इनके जवाब है।
19 Oct 20268:50:06 PM
विविधता का सम्मान और शाश्वत सत्य ही सनातन परंपरा
सरसंघचालक मोहन भागवत ने कहा भारत की सनातन परंपरा सिखाती है कि विविधता स्वाभाविक और परिवर्तनशील है, लेकिन संपूर्ण अस्तित्व की एकता का सत्य शाश्वत है। भारतीय विचारधारा सभी पंथों, भाषाओं और परंपराओं को सम्मान व सुरक्षा देती है।
संपूर्ण विश्व को अपना परिवार मानकर संयम और त्यागपूर्ण जीवन जीना ही वास्तविक सुख और प्रगति का मार्ग है।
19 Oct 20268:48:15 PM
राष्ट्रनिष्ठा और कर्तव्यबोध ही देश की वास्तविक ताकत
समारोह को संबोधित करते हुए सरसंघचालक मोहन भागवत ने कहा कि भाषा, जाति और पंथ के प्रति स्वाभाविक लगाव हो सकता है, लेकिन राष्ट्रनिष्ठा और कर्तव्यबोध इन सभी से सर्वोच्च होने चाहिए। जब-जब समाज में राष्ट्रीयता और अनुशासन का बोध मजबूत रहा, तब-तब भारत विश्व में आदर्श बना।
देश को प्रगति और परम वैभव के शिखर पर ले जाने के लिए हर नागरिक में अपने कर्तव्यों के प्रति सजगता और राष्ट्र के प्रति निष्ठा का होना अत्यंत आवश्यक है।
19 Oct 20268:47:32 PM
संविधान की प्रस्तावना का हम भारत के लोग हमारा भावनात्मक बंधन
संविधान की प्रस्तावना का उल्लेख करते हुए सरसंघचालक मोहन भागवत ने कहा हम भारत के लोग केवल शब्द नहीं, बल्कि हमारा भावनात्मक बंधन है, जिसने इतनी विविधताओं से भरे देश को प्राचीन काल से एक राष्ट्र के रूप में जोड़े रखा है।
100 वर्षों से स्व और स्वदेशी का बोध जगा रहा है संघ
सरसंघचालक मोहन भागवत ने कहा कि संघ का कार्य 100 वर्षों से भारत के स्व को जगाने और संगठित बल संपन्न समाज के निर्माण का रहा है। पंच परिवर्तन का मूल आधार भी स्वबोध, स्वदेशी आचरण और सांस्कृतिक अस्मिता है।




