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नेपाल के बाद चीन में आई आफत, लैंडस्लाइड में 16 की मौत, 546 हुए लापता

चीन के शिजांग क्षेत्र में सीमा के पास स्थित एक बंदरगाह पर भूस्खलन हुआ. इस हादसे में अब तक 16 लोगों की मौत हो गई है, जबकि 546 लोग लापता बताए जा रहे हैं. राहत और बचाव दल लापता लोगों की तलाश में जुटे हैं.

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नेपाल त्रासदी के बाद 6 हाइड्रो प्रोजेक्ट्स में फंसे 500 से अधिक लोग, सेना का रेस्क्यू ऑपरेशन जारी

काठमांडू। नेपाल में आई भीषण बाढ़ के चलते रसुवा जिले की कम से कम छह हाइड्रो प्रोजेक्ट्स में 500 से अधिक लोग फंस गए हैं। नेपाल सेना और नेपाल सशस्त्र पुलिस बल (NAPF) के लगभग 11,000 जवान खराब मौसम, टूटी हुई सड़कों, भारी कीचड़ और मलबे की चुनौतियों से जूझते हुए अब तक का सबसे कठिन राहत एवं बचाव अभियान चला रहे हैं।

बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्य नेपाली सेना और NAPF द्वारा संयुक्त रूप से चलाया जा रहा है, जिसमें सेना के 7,000 और एनएपीएफ के 4,000 जवान तैनात हैं।

500 लोगों के फंसे होने की आशंका

एनएपीएफ के प्रवक्ता और डीआईजी नेत्र बहादुर कार्की ने टीओआई से बातचीत के दौरान बताया कि बचाव टीमों का मुख्य ध्यान ऊपरी त्रिशूली, ऊपरी त्रिशूली-1, रसुवा, त्रिशूली 3A, चिलिमे खोला और लांगटांग जलविद्युत परियोजनाओं पर है, जहां कम से कम 500 लोगों के फंसे होने की आशंका है।

उन्होंने कहा कि संयुक्त टीमें ड्रोन जैसे संसाधनों का इस्तेमाल कर रही हैं, लेकिन बारिश, खराब मौसम और कटे हुए रास्तों के कारण राहत कार्य में बाधा आ रही है। हालांकि, सुबह बारिश के कारण रुके काम को दोपहर में दोबारा शुरू कर दिया गया है और रसुवा के धुंचे तक चार पहिया वाहनों के लिए सड़क खोल दी गई है।

बड़े-बड़े पत्थर और भारी कीचड़ से रेस्क्यू में आ रही दिक्कत

कार्की ने बताया कि चुनौतियों को और बढ़ाते हुए, पनबिजली संयंत्रों के पास बड़े-बड़े पत्थर और भारी कीचड़ है, जिससे फंसे हुए लोगों तक पहुंचने के लिए निकास मार्ग साफ करना मुश्किल हो रहा है। वर्तमान बचाव अभियान बल द्वारा अब तक चलाए गए सबसे चुनौतीपूर्ण अभियानों में से एक है, त्रासदी के पहले दिन से ही हमारे 13 जवान लापता हैं।

6 साल की बच्ची को सुरक्षित निकाला

एनएपीएफ प्रवक्ता कार्की के अनुसार, रसुवा के तिमुरे में मलबे के नीचे लगभग 60 घंटे तक दबी 6 साल की बच्ची ‘मनीषा’ को शुक्रवार शाम सुरक्षाकर्मियों ने रोने की आवाज सुनकर सुरक्षित बाहर निकाल लिया, हालांकि उसके माता-पिता के बारे में अभी तक पता नहीं चला है।

दूसरी ओर, नेपाली सेना के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल राजाराम बसनेट ने बताया कि त्रिशूली 3ए जलविद्युत सुरंग में जमा कीचड़ और पत्थरों को हटाकर निकास मार्ग खोजने के लिए ड्रिलिंग मशीनों का उपयोग किया जा रहा है।

नेपाल में बुधवार को आई विनाशकारी बाढ़ के बाद हालात लगातार गंभीर बने हुए हैं. मध्य नेपाल में अचानक आई बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर 675 हो गई है, जबकि 2,400 से अधिक लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं. वहीं, नेपाल के मौसम विभाग ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में फिर से बारिश और गरज के साथ आंधी आने की चेतावनी दी है. साथ ही बाढ़ का अलर्ट जारी किया गया है. इससे बचाव अभियान के साथ-साथ प्रभावित इलाकों में रह रहे लोगों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ गई है. शनिवार को भी प्रभावित आठों जिलों में शवों की तलाश और बचाव अभियान जारी रहा. 

आठ जिलों में युद्धस्तर पर तलाश और बचाव अभियान

बाढ़ प्रभावित सभी आठ जिलों से अब तक 675 शव बरामद किए जा चुके हैं. बचाव दल युद्धस्तर पर अभियान चला रहे हैं. राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण के नेतृत्व में टीमें लगातार लोगों को सुरक्षित निकालने और लापता लोगों की तलाश में जुटी हैं.

बता दें कि नेपाल-तिब्बत सीमा के पास ग्लेशियर टूटने के बाद बर्फ और चट्टानों का मलबा नीचे की ओर आया. इसके साथ भारी मात्रा में पानी, कीचड़ और मलबा बहता हुआ मध्य नेपाल के कई इलाकों में पहुंचा. इस तेज बहाव ने शहरों और गांवों को तबाह कर दिया. महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा और कई जलविद्युत परियोजनाएं भी बह गईं.

करीब 2,500 लोगों को सुरक्षित निकाला गया

बचाव अभियान के दौरान अब तक करीब 2,500 लोगों को सुरक्षित निकाला गया है, जिनमें 163 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं. प्रभावित इलाकों में रुक-रुककर बारिश होने के कारण राहत और बचाव कार्यों में चुनौती बनी हुई है.

नेपाल में 108 भारतीय नागरिकों का रेस्क्यू

भारत के विदेश मंत्रालय ने 29 अगस्त 2026 की रात 10:30 बजे तक नेपाल में प्रभावित भारतीय नागरिकों की स्थिति की जानकारी साझा की है. मंत्रालय के मुताबिक, 108 भारतीय नागरिकों को नेपाल में सुरक्षित बचाया गया है, जबकि 50 भारतीय नागरिकों से दोबारा संपर्क स्थापित हो चुका है.

275 भारतीय नागरिक अभी भी लापता 

चीन से 598 भारतीय नागरिक सुरक्षित नेपाल पहुंच चुके हैं. यह जानकारी स्थानीय प्रशासन के हवाले से दी गई है. वहीं, करीब 900 भारतीय नागरिक अभी चीन से रवाना नहीं हुए हैं. विदेश मंत्रालय ने बताया कि ये सभी सुरक्षित हैं और बीजिंग स्थित भारतीय दूतावास स्थानीय प्रशासन के साथ सीधे या उनके माध्यम से इनसे संपर्क में है.

मंत्रालय के अनुसार, 275 भारतीय नागरिक अभी लापता हैं, जबकि 128 भारतीय मूल के लोग भी लापता बताए गए हैं.

भारत ने राहत सामग्री की चौथी खेप भेजी

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बताया कि भारत से 11 टन राहत सामग्री लेकर चौथी उड़ान नेपाल के लिए रवाना हो गई है. इसके अलावा 230 फीट लंबे सिंगल लेन मॉड्यूलर स्टील ब्रिज के निर्माण के लिए 16 ट्रक उपकरण नेपाल पहुंच चुके हैं.

उन्होंने बताया कि सात और बेली ब्रिज लगाने के लिए जरूरी उपकरण भी जल्द भेजे जाएंगे. इन पुलों की स्थापना के लिए तकनीकी टीमें भी जल्द नेपाल पहुंचेंगी.

भारत अब तक 68.5 टन राहत सामग्री काठमांडू पहुंचा चुका है. इसमें जरूरी दवाएं, पोर्टेबल जनरेटर, खाद्य पैकेट, पानी शुद्ध करने वाली गोलियां और तकनीकी उपकरण शामिल हैं.

नेपाल से नागपुर लौटे भारतीय पर्यटक

इस बीच नेपाल में बाढ़ के दौरान फंसे भारतीय पर्यटकों का एक समूह महाराष्ट्र के नागपुर लौट आया. एक पर्यटक ने बताया कि बाढ़ की घटना उनके ठिकाने से करीब 50 किलोमीटर दूर हुई थी. वे काठमांडू में फंस गए थे.

पर्यटक ने बताया कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की मदद से उन्हें वहां से सुरक्षित निकाला गया और वापस नागपुर पहुंचाया गया.

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