राजनीति

नेपाल में Gen Z विद्रोह से पैदा हुआ नया खतरा…थरूर ने किया आईएसआई से सावधान! बताया भारत का क्या हो अगला प्लान?

नई दिल्ली: नेपाल में हाल में जिस तरह से Gen Z के विद्रोह से तख्तापलट हुआ है, उससे भारत के सामने भी चुनौतियां खड़ी हुई हैं। नेपाल में जो भी हालात बने हैं, उसपर भारत आंखें मूंदे नहीं रह सकता। लेकिन, भारत के लिए ज्यादा सक्रियता दिखाना भी मुमकिन नहीं है। क्योंकि, बीते एक-डेढ़ दशकों में दोनों देशों के रिश्ते नई तरह से परिभाषित हुए हैं। कांग्रेस सांसद शशि थरूर का भी मानना है कि यह एक ऐसी स्थिति है, जिसमें भारत को बिना नेपाल के आंतरिक मामलों में दखल दिए रणनीतिक तरीके से संतुलन बिठाना होगा। उन्होंने नेपाल में शांति और स्थिरता में मदद के लिए नई सरकार को वित्तीय और संस्थागत सहायता देने की सलाह दी है, तो साथ ही भारत के लिए पैदा हुए नए खतरों से भी सचेत रहने को कहा है।

भारत-विरोधी गतिविधियों को लेकर किया आगाह

केरल के तिरुवनंतपुरम से कांग्रेस सांसद और पूर्व वैश्विक राजनयिक शशि थरूर ने एनडीटीवी में नेपाल में हुए मौजूदा प्रदर्शनों और उससे जुड़े खतरों को लेकर एक लंबा-चौड़ा लेख लिखा है। इसमें उन्होंने लिखा है कि नेपाल में अस्थिरता भारत में कई तरह के सीधे और परोक्ष खतरा पैदा कर सकता है। उन्होंने भारत-नेपाल के बीच खुली सीमा का जिक्र करते हुए लिखा है कि वहां राजनीतिक अराजकता और कानून व्यवस्था बिगड़ने से सीमा पार से होने वाली तस्करी, मानव तस्करी के साथ भारत-विरोधी गतिविधियों के बढ़ने की आशंका है।

दुश्मनों से पैदा होने वाले खतरे पर किया सावधान

सबसे बड़े खतरे के बारे में ध्यान खींचते हुए थरूर ने कहा है कि नेपाल में मौजूदा परिस्थितियों में जो एक सुरक्षा खालीपन बनने का डर पैदा हुआ है, उसका फायदा भारत के दुश्मन उठा सकते हैं, जिसमें पाकिस्तान की आईएसआई तो सबसे आगे है। इससे भारत में नई तरह की समस्या पैदा हो सकती है। उन्होंने नेपाल में चीन के बढ़ते प्रभाव को लेकर भी चिंता जाहिर की है। उनका कहना है कि राजनीतिक तौर पर अस्थिर नेपाल में भारत का प्रभाव कम हुआ है, लेकिन चीन बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) के माध्यम से रेल-रोड के बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट से जुड़कर अपनी गतिविधियां बढ़ा रहा है। उन्होंने नेपाल की घटनाओं को लेकर सोशल मीडिया पर चल रही साजिशों की थ्योरी के प्रति भी सचेत रहने की बात कही है।

थरूर ने बताया भारत को क्या करना चाहिए?

शशि थरूर ने अपने ही लेख में सवाल किया है कि भारत को क्या करना चाहिए? इसके जवाब में वे लिखते हैं कि नई दिल्ली के पास सीमित, लेकिन महत्वपूर्ण विकल्प हैं। उनका कहना है,’दखल न देने की नीति, जो एक संप्रभु पड़ोसी के आंतरिक मामलों के प्रति सम्मान जाहिर करने के लिए जरूरी है, हमारे हितों की रक्षा के लिए एक सक्रिय, लेकिन सूक्ष्म रणनीति के साथ संतुलित किया जाना चाहिए।’ उन्होंने आगे लिखा है कि ‘बेशक, हमें सीधे हस्तक्षेप से निश्चित रूप से परहेज करना होगा।’उन्होंने सलाह दी है कि वहां की राजनीति में घुसने के बजाए, भारत उसके विकास में मदद का हाथ बढ़ा सकता है और सांस्कृतिक संबंधों को और मजबूत कर सकता है। इसके साथ ही उन्होंने नेपाल की नई पीढ़ी के साथ संवाद बढ़ाने पर भी जोर दिया है।

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