नोबेल पुरस्कार नहीं मिला तो बौखलाए ट्रंप, आईसीसी पर लगाया प्रतिबंध; मार्क रुबियो भी भड़के

एपी, वाशिंगटन। अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय (आईसीसी) की पूर्व न्यायाधीश भारतीय मूल की नवनीतम नवी पिल्लै को नोबेल शांति पुरस्कार की घोषणा के कुछ ही देर बाद शुक्रवार को अमेरिका की ट्रंप सरकार ने आईसीसी पर प्रतिबंधों की घोषणा कर दी।
इन प्रतिबंधों से इस ट्रिब्यूनल का कामकाज बाधित होने की आशंका है लेकिन न्यायालय ने कहा है कि वह अपने रास्ते से विचलित नहीं होगा और हर संभव तरीके अपना कार्य जारी रखेगा। जबकि अमेरिका मानता है कि आईसीसी अमेरिकी और इजरायली लोगों के खिलाफ युद्ध अपराधों के भेदभावपूर्ण आरोपों की सुनवाई करता है।
विदित हो कि आइसीसी ने युद्ध अपराधों के लिए इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की गिरफ्तारी के लिए अंतरराष्ट्रीय वारंट जारी कर रखा है।
प्रतिबंधों की घोषणा करते हुए अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने कहा, हम इस धूर्त न्यायालय के लिए होने वाले धन के लेन-देन को रोकेंगे, इसके संसाधनों को खत्म करेंगे और अमेरिका के खिलाफ इसकी काम करने की क्षमता को खत्म करेंगे।
रूबियो ने वीडियो मैसेज में कहा, अमेरिका और अमेरिकी लोग इस फर्जी न्यायालय के अधिकार क्षेत्र में नहीं हैं और न ही इस फर्जी न्यायालय को महत्व देते हैं। प्रतिबंधों के तहत आईसीसी के संपत्तियों और संसाधनों को जब्त करने की कार्रवाई की जाएगी।
साथ ही अमेरिकी कंपनियों को आईसीसी के साथ काम और हर तरह का कारोबार खत्म करने के लिए छह महीने का समय दिया गया है।
रूबियों ने कहा, इस कोर्ट को लेकर रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक पार्टी के नेताओं के विचार एक जैसे हैं और वे सभी आइसीसी को अमेरिका विरोधी मानते हैं। दोनों ही दल आईसीसी के खिलाफ कार्रवाई पर सहमत हैं।
इसलिए राष्ट्रपति ट्रंप ने आईसीसी रूपी इस खतरे को खत्म करने के लिए कदम उठाया है। अमेरिका के प्रतिबंध की घोषणा के बाद आईसीसी के डिप्टी प्रोसीक्यूटर नजहत शमीम खान ने कहा है कि यह निर्णय निंदनीय है।
लेकिन इस प्रतिबंध से कोर्ट का काम नहीं रुकेगा। यह अंतरराष्ट्रीय कानून को नीचा दिखाने की कोशिश है जिसे स्वतंत्र कामकाज से सफल नहीं होने दिया जाएगा। आइसीसी हर स्थिति में जांच और मामलों के अभियोजन का कार्य जारी रखेगा।
बौखलाए ट्रंप का फैसला, शरीफ ने कराई फजीहत
अमेरिका ने आइसीसी पर प्रतिबंध की घोषणा नार्वे की नोबेल कमेटी द्वारा नोबेल शांति पुरस्कार घोषित करने के कुछ ही देर बाद की। इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप पिछले दो वर्षों में कई बार खुद को नोबेल शांति पुरस्कार दिए जाने की मांग कर चुके थे।
वह विश्व के आठ युद्धों को समाप्त करवाने का श्रेय लेते हुए खुद के लिए नोबेल शांति पुरस्कार मांग रहे थे। लेकिन बार-बार ट्रंप के दबाव बनाने का नोबेल कमेटी पर कोई असर नहीं हुआ और शुक्रवार को भारतीय मूल की पूर्व आइसीसी न्यायाधीश पिल्लै को नोबेल शांति पुरस्कार देने की घोषणा हो गई।
इस घोषणा से कुछ ही समय पहले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने अजीबोगरीब हरकत की। उन्होंने एक बार फिर पाकिस्तान की ओर से शांति पुरस्कार के लिए ट्रंप के नाम की आधिकारिक सिफारिश कर दी जिसका बाद में उनके ही देश में ही मखौल बना।




