पाकिस्तान युद्ध के संकेत!

जम्मू-कश्मीर में राजौरी, पुंछ और सांबा के इलाकों में, सीमापार से, 8-10 ड्रोन उड़ते देखे गए। सेना तुरंत हरकत में आई और एंटी ड्रोन सिस्टम सक्रिय किया गया, उतनी ही देर में वे गायब हो गए। सीमा पर भारत की सेना ‘हाई अलर्ट’ की स्थिति में है। हमारे थलसेना प्रमुख जनरल उपेन्द्र द्विवेदी ने पाकिस्तान को आगाह किया है कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ अब भी जारी है। पाकिस्तान इसके मायने बखूबी जानता है। जनरल द्विवेदी ने यह भी खुलासा किया कि नियंत्रण-रेखा पर 6 और अंतरराष्ट्रीय सीमा पर 2 आतंकी अड्डे सक्रिय देखे गए हैं। उनमें आतंकी गतिविधियां भी देखी गई हैं। यदि पाकिस्तान ने कोई हरकत की, तो इस बार उसका नामोनिशान मिटा दिया जाएगा। यह कोई राजनीतिक बयान नहीं है, बल्कि सेना प्रमुख ने चेतावनी दी है। जनरल ने यह भी बताया कि बीती मई में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान पाकिस्तान के 100 से अधिक फौजी भी मारे गए थे। हमारी सेना ने पाकिस्तान के 9 लड़ाकू विमान गिराए, 11 एयरबेस तबाह किए और 2 अवॉक्स सिस्टम बर्बाद किए थे। पाकिस्तान का कुल 2.85 अरब डॉलर का नुकसान हुआ था। पाकिस्तान कर्जदार देश है। क्या एक और युद्ध बर्दाश्त कर सकेगा? हमलों में 100 से ज्यादा आतंकी ढेर किए गए और 9 आतंकी अड्डों को ‘मिट्टी-मलबा’ कर दिया था। पाकिस्तान को यह विध्वंस आज भी याद होगा। परमाणु हमले की बातें पाकिस्तान के नेता ही करते हैं, जो पूरी तरह ‘ब्लफ’ है। सिर्फ सेना प्रमुख जनरल द्विवेदी ने ही चेतावनी का बयान नहीं दिया है, बल्कि सेना की पश्चिमी कमान के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल मनोज कुमार कटियार ने भी बीते दिनों युद्ध की आशंका जताई थी। उन्हें पाकिस्तानी फौज की अंदरूनी हलचलों के कुछ ‘लीड’ मिले होंगे, जिनके आधार पर उन्होंने आशंका जताई थी कि पाकिस्तान की तरफ से युद्ध जैसा दुस्साहस किया जा सकता है। बहरहाल हमारी सेनाएं मुस्तैद और सक्रिय हैं, बेशक युद्ध की कैसी भी संभावनाएं बनें। 2025 में कुल 31 आतंकी ढेर किए गए, जिनमें अधिकतर पाकिस्तानी थे। कश्मीर में आज भी ‘जयचंद’ सक्रिय हैं, लिहाजा उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने ऐसे कुल 85 सरकारी कर्मचारियों को नौकरी से बर्खास्त किया है, जिनके आतंकियों के साथ तार जुड़े थे और यह साबित भी हुआ है। देश का दुर्भाग्य और बुनियादी विडंबना रही है कि कुछ तत्त्व ऐसे सामने आते रहे हैं, जिन्हें पाकिस्तान नाम की खुजली होती रही है।
अब पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं राजनयिक रहे मणिशंकर अय्यर ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को समाप्त करने और पाकिस्तान के साथ संवाद करने की मांग की है। मणिशंकर पुराने पाकिस्तानवादी रहे हैं। वह तो सलमान खुर्शीद के साथ पाकिस्तान मदद मांगने चले गए थे कि प्रधानमंत्री मोदी को हटाना है। वाह…! आज वह पूरी तरह अप्रासंगिक हैं और पाकिस्तान की पैरोकारी कर रहे हैं। इस जमात में डॉ. फारूक अब्दुल्ला जैसे नेता भी शामिल हैं। कुछ समाजवादी नेता सवाल करते रहे हैं कि आखिर ‘ऑपरेशन सिंदूर’ रोक क्यों दिया गया? सेना को उसका मकसद हासिल करने से क्यों रोका गया? बड़ी संकीर्ण सोच और दृष्टि के नेता हैं। वे नहीं जानते कि हरेक युद्ध की आर्थिक और मानवीय कीमत होती है, जो बेहद महंगी पड़ती है देश को। युद्ध को लंबा नहीं खींचा जा सकता। युद्ध के लक्ष्य सेना और राजनीतिक नेतृत्व ही जानते हैं और उन्हें ही तय करने देना चाहिए। अपनी क्षुद्र राजनीति को जेब में ही रखें। सवाल है कि आखिर पाकिस्तान में बातचीत किससे की जाए और उससे भारत को हासिल क्या होगा? क्या पाकिस्तान की जन्मजात फितरत बदल सकती है? पाकिस्तान से जैश-ए-मुहम्मद के सरगना मसूद अजहर के बयान आते रहे हैं कि उसने 1000 से अधिक आत्मघाती बॉम्बर्स तैयार कर रखे हैं। लश्कर के आतंकी दावा करते रहे हैं कि वे सेना के मुख्यालय में आते-जाते रहते हैं। ऐसे आतंकिस्तान के साथ बातचीत की जाए?




