बहु चर्चित जाह्नवी हत्याकांड, 6 साल बाद मुंबई की कोर्ट का फैसला, जोगधर को उम्रकैद, दिया बरी

मुंबई : चर्चित जाह्नवी कुकरेजा मर्डर केस में शनिवार को अहम फैसला आया। मुंबई की कोर्ट ने पीड़िता की हत्या के मामले में उसके दोस्त जोगधंकर को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई। हालांकि, मामले में एक अन्य आरोपी दिया पाडलकर को कोर्ट ने बरी कर दिया। यह मामला 19 साल की जाह्नवी कुकरेजा की हत्या से जुड़ा था। 1 जनवरी 2021 को मुंबई के खार इलाके में जाह्नवी कुकरेजा अपने दोस्तों के साथ एक बिल्डिंग की छत पर नए साल की पार्टी में गई थी। इसी दौरान किसी बात को लेकर दोस्तों में बहस हो गई, जिसने बाद में हिंसा का रूप ले लिया।
आरोप था कि जोगधंकर और दिया पाडलकर ने मिलकर जाह्नवी पर हमला कर उसकी हत्या कर दी। इसके बाद उसके शव को घसीटते हुए नीचे लाया। कोर्ट में प्रॉसिक्यूशन ने कहा कि यह सब जोगधंकर और पाडलकर के रिश्तों को लेकर हुआ था।
छह साल बाद फैसला
एडिशनल सेशंस जज सत्यनारायण नवंदर ने मामले में सुनवाई पूरी करते हुए शनिवार को जोगधंकर को हत्या का दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा दी। दिया पाडलकर के खिलाफ सबूत न होने के कारण उसे बरी कर दिया गया। इस फैसले के बाद मृतक की मां निधि कुकरेजा ने अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि उन्हें न्यायपालिका पर भरोसा है और वे पिछले छह साल से लगातार कोर्ट में आ रही हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे दिया पाडलकर की बरी के फैसले को चुनौती देंगी। निधि कुकरेजा ने कहा कि कोर्ट ने स्वीकार किया कि दिया पाडलकर अपराध स्थल पर मौजूद थी। इसे लेकर हम अगली कार्रवाई करेंगे।
दिया को मिला संदेह का लाभ
पीड़िता और उनके परिवार के एडवोकेट त्रिवंकुमार कर्णानी ने बताया कि कोर्ट ने खुले तौर पर यह रिकॉर्ड किया कि आरोपी नंबर 2, दिया पाडलकर अपराध स्थल पर थी और आरोपी नंबर 1, जोगधंकर के साथ मौजूद थी, जिसे आजीवन कारावास की सजा मिली, लेकिन दिया को शक के लाभ के तहत बरी किया गया। कोर्ट ने दिया के होंठ पर चोट और अस्पताल में दिए गए झूठे बयान को भी रिकॉर्ड किया।
एडवोकेट त्रिवंकुमार कर्णानी ने आगे कहा कि वे जल्द ही फैसले की सर्टिफाइड कॉपी प्राप्त करेंगे और उसके आधार पर दिया पाडलकर की बरी के पीछे की वजहों का विश्लेषण करेंगे। इसके बाद वे जरूरी कानूनी कार्रवाई करते हुए इस फैसले को चुनौती देंगे। विशेष सरकारी वकील प्रदीप ने कहा कि मामले में जिस एक आरोपी को बरी किया गया है, उसकी रिहाई को हाई कोर्ट में चुनौती दी जाएगी। अदालत में जाह्नवी के परिजन मौजूद थे। अभियोजन पक्ष के अनुसार, आरोपियों ने पार्टी के बाद कुकरेजा पर हमला किया था। कुकरेजा के शरीर पर चोट के 48 निशान मिले थे। बर्बरता से उसे पीटने के बाद उसे बिल्डिंग की पांचवी मंजिल से घसीटते हुए नीचे लाया गया था। इस दौरान उसकी मौत हुई थी।
मुंबई पुलिस ने किया था यह दावा
पुलिस ने दावा किया था कि झगड़े की वजह पडालकर और जोगधनकर के बीच अंतरंग रिश्ता था। जज ने फैसले सुनाते समय स्पष्ट किया कि मामले में जोगधनकर की सक्रिय भूमिका नजर आ रही है। उसके शर्ट में मिले खून के निशान कुकरेजा के रक्त से मिलते हैं। रक्त की डीएनए प्रोफाइलिंग आरोपी की घटनास्थल में मौजूदगी की पुष्टि करती है। मामले के फॉरेंसिक सबूत जोगधनकर की प्रकरण में संलिप्तता को साबित करते हैं। सीसीटीवी फुटेज में घटनास्थल से आरोपी को बाहर जाते हुए नजर आ रहा है।
जज ने कहा कि अभियोजन पक्ष ने 49 गवाहों के बयान से केस जुड़ी परिस्थितियों की कड़ियों की चेन को साबित किया है। जोगधनकर के आरोपों को अभियोजन पक्ष ने संदेह से परे जाकर साबित किया है। जज ने कहा कि यदि कुकरेजा ने अगर आत्महत्या की होती,तो उसके शरीर पर चोट के निशान नहीं होते। पडालकर के खिलाफ प्रमाणिक सबूत नहीं है, जिसके आधार पर उसे दोषी ठहराया जा सके। हालांकि इस मामले में उसकी भूमिका को सिरे से खारिज नहीं किया जा सकता है।
आरोपी के वकील ने क्या कहा?
आरोपी के वकील ने कहा कि पुलिस के सबूत विश्वसनीय नहीं है, जिसके आधार पर आरोपी को सजा सुनाई जा सके। कुकरेजा को क्षणिक आवेश में हुए झगड़े के चलते चोट आई है। घटना का कोई प्रत्यक्षदर्शी गवाह नहीं है। यह पूरा मामला परिस्थितिजन्य सबूतों पर आधारित है, जो भरोसे लायक नहीं है।




