महाराष्ट्र

बिना अनुमति निकाला विजय जुलूस, ठाकरे गुट के पार्षद सहित 40 पर FIR

मुंबई , मध्य मुंबई के माहिम में पुलिस की अनुमति के बिना विजय जुलूस निकालने के मामले में शिवसेना (UBT) के नवनिर्वाचित पार्षद मिलिंद वैद्य और उनके सहयोगियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है. यह घटना 24 जनवरी की शाम की बताई जा रही है, जब क्षेत्र में निषेधाज्ञा प्रभावी थी और पुलिस ने पहले ही अनुमति देने से इनकार कर दिया था.

क्या है पूरा मामला?

माहिम पुलिस के अनुसार, शिवसेना (UBT) के नवनिर्वाचित पार्षद मिलिंद वैद्य ने 15 जनवरी को हुए बृहन्मुंबई महानगरपालिका चुनाव में वार्ड नंबर 182 से जीत दर्ज की थी. जीत के बाद विजय जुलूस निकालने की योजना बनाई गई थी, लेकिन 26 जनवरी की मध्यरात्रि तक निषेधाज्ञा लागू होने के कारण पुलिस ने इसकी अनुमति नहीं दी.

पुलिस अधिकारी ने बताया कि 18 जनवरी को पहली बार विजय जुलूस की अनुमति मांगी गई थी, जिसे कानून व्यवस्था और निषेधाज्ञा का हवाला देते हुए खारिज कर दिया गया. इसके बाद 22 और 24 जनवरी को दोबारा आवेदन किया गया, लेकिन माहिम पुलिस ने दोनों ही बार अनुमति देने से साफ इनकार कर दिया.

बिना अनुमति कैसे निकाला गया जुलूस?

पुलिस के मुताबिक, अनुमति न मिलने के बावजूद 24 जनवरी को शाम करीब 5:30 बजे से रात आठ बजे के बीच माहिम इलाके में विजय जुलूस निकाला गया. इस दौरान समर्थकों की भारी भीड़ सड़कों पर उतरी और जुलूस में पटाखे फोड़े गए. साथ ही लाउडस्पीकर का इस्तेमाल भी किया गया, जिससे सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका बनी.

पुलिस का कहना है कि यह जुलूस पूरी तरह अनधिकृत था. निषेधाज्ञा के दौरान किसी भी तरह के जुलूस या रैली की इजाजत नहीं थी. जुलूस के कारण यातायात और कानून व्यवस्था को लेकर जोखिम पैदा हुआ.

किन लोगों पर दर्ज हुआ मामला?

अनधिकृत रैली का संज्ञान लेते हुए माहिम पुलिस ने शिवसेना (UBT) के पार्षद मिलिंद वैद्य सहित उनके सहयोगियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है. पुलिस के अनुसार, इस मामले में विनय अकरे, अविरात शिंदे, संतोष सर्वे, दीपक सावंत और 40 से अधिक अन्य लोगों को आरोपी बनाया गया है.

सभी आरोपियों पर बिना अनुमति रैली निकालने का आरोप है. पटाखों और लाउडस्पीकर के इस्तेमाल को भी नियमों का उल्लंघन माना गया है. पुलिस आगे की जांच कर रही है और कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी.

माहिम पुलिस ने साफ किया है कि निषेधाज्ञा और सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़े नियमों का उल्लंघन किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. प्रशासन का कहना है कि चुनाव जीतने के बाद उत्सव मनाने के लिए भी कानून के दायरे में रहना जरूरी है, और बिना अनुमति इस तरह के आयोजनों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी.

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