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बिहार में SIR को लेकर SC की कड़ी टिप्पणी, कहा- गड़बड़ी हुई होगी तो पूरी प्रक्रिया कर देंगे रद्द

Bihar SIR: बिहार की मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है. इसमें आधार कार्ड को पहचान पत्र मानकर वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने की प्रक्रिया को चुनौती दी गई है. याचिकाकर्ताओं का दावा है कि इससे लोगों का नाम कट सकता है.

Bihar SIR: बिहार में वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर उच्चतम न्यायालय में सुनवाई चल रही है. सोमवार को हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि निर्वाचन आयोग (ECI) द्वारा अपनाई गई कार्यप्रणाली में कोई गड़बड़ी पाई जाती है तो वह बिहार में मतदाता सूची के SIR की पूरी प्रक्रिया को रद्द कर देगा. इस प्रक्रिया में वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने के लिए आधार कार्ड को पहचान पत्र के रूप में स्वीकार किया जा रहा है. इसी फैसले को चुनौती दी गई है. चुनौती देने वालों का कहना है कि इससे लाखों लोगों का नाम वोटर लिस्ट से कट सकता है और वे अपने मतदान के अधिकार से वंचित हो जाएंगे.

अपने बनाये नियमों की अनदेखी कर रहा चुनाव आयोग

सोमवार को हुई सुनवाई में याचिकाकर्ताओं की ओर से वकीलों ने दलील दी कि चुनाव आयोग केवल कोर्ट के आदेश का पालन कर रहा है, लेकिन अपने ही बनाए नियमों और कानूनों की अनदेखी कर रहा है. वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि यदि 1 अक्टूबर को प्रकाशित होने वाली मतदाता सूची को बाद में कोर्ट खारिज कर देता है, तो चुनाव के समय गंभीर समस्या खड़ी हो जाएगी. उन्होंने यह भी कहा कि न्यूनतम पारदर्शिता बनाए रखना बेहद जरूरी है.

इसी दौरान वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायणन ने यह मुद्दा उठाया कि चुनाव आयोग इस प्रक्रिया को केवल बिहार ही नहीं, बल्कि दूसरे राज्यों में भी लागू कर रहा है. इसलिए यदि सुप्रीम कोर्ट इस प्रक्रिया को असंवैधानिक मानता है तो इसे पूरे देश में रोका जाना चाहिए.

वकील वृंदा ग्रोवर ने कहा कि कानून के अनुसार नामांकन की आखिरी तारीख तक वोटर लिस्ट में नाम जोड़े जा सकते हैं, लेकिन इस प्रक्रिया से मतदाताओं को गैरकानूनी तरीके से उनके अधिकार से वंचित किया जा रहा है. इसी तरह वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने भी मामले की जल्द सुनवाई की मांग करते हुए कहा कि चुनाव आयोग इस प्रक्रिया को पूरे देश में लागू करने की घोषणा कर चुका है.

मामला केवल बिहार तक नहीं रहेगा

सुनवाई के दौरान जस्टिस सूर्यकांत ने चुनाव आयोग के वकील से पूछा कि मौजूदा स्थिति क्या है और क्या यह देखना बेहतर नहीं होगा कि वास्तव में कितने लोग वोटर लिस्ट से बाहर रह गए है. साथ ही उन्होंने यह भी साफ कर दिया कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का जो भी फैसला होगा, वह केवल बिहार तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि पूरे देश में लागू होगा.

कोर्ट ने सभी पक्षों को निर्देश दिया है कि वे अपने-अपने तर्कों का संक्षिप्त लिखित नोट तैयार कर पेश करें. अब इस मामले की अगली सुनवाई 7 अक्टूबर को होगी. इसमें सुप्रीम कोर्ट यह तय करेगा कि आधार कार्ड को पहचान पत्र मानकर वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने की यह प्रक्रिया संवैधानिक है या नहीं.

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