बीपी कंट्रोल पिल्स के साथ ओमेगा-3 लेना सही या गलत? एक्सपर्ट्स ने दी जरूरी सलाह

हाई ब्लड प्रेशर के मरीजों के मन में अक्सर एक सवाल सामने आता है कि क्या बीपी की दवाओं के साथ फिश ऑयल या ओमेगा 3 सप्लीमेंट लिया जा सकता है. दिल की सेहत के लिए फायदेमंद माने जाने वाले फिश ऑयल को लेकर लोगों के मन में कन्फ्यूजन रहता है. वहीं इसे लेकर कार्डियोलॉजिस्ट का कहना है कि ज्यादातर मामलों में फिश ऑयल सप्लीमेंट बीपी की दवाओं के साथ लिया जा सकता है, लेकिन इसके लिए डॉक्टर की सलाह जरूरी है. ओमेगा-3 फैटी एसिड ब्लड सेल्स में सूजन कम करने, धमनियों की लचीलापन बढ़ाने और ट्राइग्लिसराइड लेवल घटाने में मदद करते हैं. कुछ रिसर्च यह भी बताती है कि ब्लड प्रेशर को हल्के स्तर पर कम करने में सहायक हो सकते हैं.
दवाओं के साथ टकराव नहीं, लेकिन सावधानी जरूरी
एक्सपर्ट्स के अनुसार फिश ऑयल आमतौर पर बीपी कंट्रोल करने वाली दवाओं जैसे ACE इनहिबिटर्स, ARBs, कैल्शियम चैनल ब्लॉकर्स, बीटा ब्लॉकर्स और डाइयूरेटिक्स के असर को नकारता नहीं है. इसलिए इसे सपोर्ट सप्लीमेंट्स के तौर पर लिया जा सकता है. हालांकि अगर किसी व्यक्ति का ब्लड प्रेशर दवाओं से पहले ही नियंत्रित है तो फिश ऑयल जोड़ने से बीपी थोड़ा और नीचे जा सकता है. ज्यादातर लोगों में यह गंभीर समस्या नहीं बनता है, लेकिन बुजुर्गों या कई दवाएं लेने वालों में ब्लड प्रेशर जरूरत से ज्यादा गिर सकता है. ऐसे में चक्कर आना, खड़े होने पर सिर हल्का लगना या बेहोशी जैसे लक्षण नजर आ सकते हैं.
ज्यादा मात्रा से बढ़ सकता है ब्लीडिंग का खतरा
फिश ऑयल में हल्का ब्लड-थिनिंग प्रभाव होता है. नॉर्मल मात्रा में लिया गया सप्लीमेंट आमतौर पर सुरक्षित माना जाता है, लेकिन अगर रोजाना 3 ग्राम से ज्यादा EPA और DHA लिया जाए, तो खून बहने का जोखिम बढ़ सकता है. यह खास तौर पर उन लोगों के लिए जरूरी है जो पहले से एस्पिरिन या अन्य ब्लड थिनर दवाएं ले रहे हैं. वहीं कई फिश ऑयल कैप्सूल्स में 1000 मिलीग्राम फिश ऑयल लिखा होता है. लेकिन उनमें असली ओमेगा-3 की मात्रा करीब 300 मिलीग्राम ही होती है. सामान्य हार्ट हेल्थ के लिए यह मात्रा सुरक्षित मानी जाती है. इसके हाई ट्राइग्लिसराइड या ब्लड प्रेशर पर खास असर के लिए दी जाने वाली ज्यादा खुराक डॉक्टर की निगरानी में ही लेनी चाहिए.
सप्लीमेंट की क्वालिटी भी रखती है मायने
ओमेगा-3 फैटी एसिड गर्मी, रोशनी और हवा से प्रभावित हो सकते हैं. अगर सप्लीमेंट सही तरीके से स्टोर ने किया गया हो या एक्सपायरी के करीब हो तो उसकी गुणवत्ता काम हो सकती हैं और स्वाद में बदबू या कड़वाहट महसूस हो सकती है. इसके अलावा शरीर में ओमेगा-3 के अवशोषण की क्षमता भी अलग-अलग हो सकती है. एक जैसी मात्रा लिखे होने के बावजूद दो सप्लीमेंट का असर समान हो यह जरूरी नहीं है. इसके अलावा डॉक्टर का साफ कहना है कि फिश ऑयल बीपी की दवाओं का ऑप्शन नहीं है. हाई ब्लड प्रेशर को कंट्रोल रखने के लिए नियमित एक्सरसाइज संतुलित वजन कम नमक का सेवन, सीमित शराब और तनाव नियंत्रण सबसे प्रभावी उपाय है.




