ब्रह्मांड का सबसे अकेला ग्रह! अभी तक था नजरों से छिपा, एक जगह नहीं रहता स्थिर

ब्रह्मांड में कई ग्रह हैं. इनमें से ज्यादातर किसी तारे की परिक्रमा करते हैं और एक फिक्स्ड जगह पर घूमते रहते हैं. लेकिन अब वैज्ञानिकों को सैटर्न के साइज का एक नया ग्रह मिला है जो किसी भी तारे की परिक्रमा नहीं करता है.
ब्रह्मांड में ग्रहों की कल्पना हम आमतौर पर सूरज जैसे तारे के चारों ओर घूमते हुए करते हैं. लेकिन हाल ही में वैज्ञानिकों ने एक ऐसी खोज की है जिसने सबको हैरान कर दिया. ये है एक ‘रोग प्लैनेट’ या फ्री-फ्लोटिंग प्लैनेट. एक सैटर्न के आकार का ग्रह, जो किसी तारे की परिक्रमा नहीं करता!
ये ग्रह मिल्की वे आकाशगंगा के केंद्र की ओर करीब 10,000 प्रकाश वर्ष दूर अकेला तैर रहा है. ये खोज 1 जनवरी 2026 को साइंस जर्नल में पब्लिश हुई और ब्रह्मांड के रहस्यों में नया अध्याय जोड़ती है. इस ग्रह की खोज ग्रेविटेशनल माइक्रोलेंसिंग से हुई. जब ये ग्रह एक दूर की स्टार के सामने से गुजरा, तो उसकी गुरुत्वाकर्षण ने स्टार की रोशनी को थोड़ा मोड़ दिया और बढ़ा दिया, जैसे कोई प्राकृतिक लेंस हो. ये घटना इतनी छोटी थी कि ज्यादातर टेलीस्कोप इसे मिस कर देते, लेकिन ग्राउंड-बेस्ड टेलीस्कोप (जैसे KMTNet और OGLE) और ESA के गैया स्पेस टेलीस्कोप ने एक साथ इसे कैप्चर कर लिया.
इतना बड़ा है ग्रह
रिसर्चर्स ने पाया कि ग्रह की मास जूपिटर की 22% है, यानी सैटर्न के करीब (सैटर्न जूपिटर का 30% है). ये पहली बार है जब किसी रोग प्लैनेट की मास और दूरी इतनी सटीक मापी गई. पहले ऐसे ग्रहों की मास सिर्फ अनुमान होती थी, क्योंकि माइक्रोलेंसिंग में दूरी और मास में कन्फ्यूजन रहता है. ये खोज ‘आइंस्टीन डेजर्ट’ नाम के गैप को भरती है, जहां मिड-रेंज मास के रोग प्लैनेट्स पहले नहीं मिले थे. वैज्ञानिकों का मानना है कि ये ग्रह किसी सौर मंडल में पैदा हुआ था, लेकिन ग्रेविटेशनल टकराव (जैसे दूसरे ग्रहों या अस्थिर स्टार से) की वजह से बाहर फेंक दिया गया. ये ‘ईजेक्टेड प्लैनेट’ का उदाहरण है, ना कि स्टार जैसा छोटा ऑब्जेक्ट जो अकेले पैदा हुआ हो. ऐसे ग्रह ब्रह्मांड में बहुत हो सकते हैं—शायद स्टार्स से ज्यादा! ये खोज OGLE और KMTNet जैसे ग्रुप्स ने की, जिसमें चाइना के पेकिंग यूनिवर्सिटी के सबो डोंग, पोलैंड के आंद्रेज उदाल्स्की और कई अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक शामिल थे.



