भारत बुन रहा ऐसा जाल, फाइटर जेट से लेकर ड्रोन तक बन जाएंगे कबूतर, छटपटाते रहेंगे चीन-पाक, झटके में खेल खत्म

Anti Drone Defence System: मॉडर्न वॉरफेयर का स्वरूप पूरी तरह से नहीं तो काफी हद तक बदल चुका है. AI जैसी एडवांस्ड टेक्नोलॉजी की मदद से डिफेंस सिस्टम मजबूत हो रहा है तो वेपन सिस्टम पहले के मुकाबले ज्यादा घातक और खतरनाक हो चुका है. पहले फाइटर जेट और मिसाइल का खतरा रहता था और अब स्टील्थ जेट के साथ ही ड्रोन अटैक का खतरा हकीकत बन चुकी है. बदलते सामरिक हालात में एयर डिफेंस सिस्टम को पूरी तरह से चाक-चौबंद करना जरूरी ही नहीं, बल्कि अनिवार्य बन चुका है.
यह 21वीं सदी है. युद्ध का तौर-तरीका बदलने के साथ ही खतरा भी कई गुना बढ़ चुका है. बैटलफील्ड में नए ‘दैत्य’ का आगमन हो चुका है. आसमानी मॉन्स्टर को ऑपरेट करने के लिए पायलट की जरूरत नहीं होती है, लेकिन तबाही व्यापक पैमाने पर मचती है. ड्रोन वॉरफेयर आज के युद्ध की सच्चाई है. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान की तरफ से बड़ी तादाद में ड्रोन अटैक करने की कोशिश की गई थी, जिसे भारत ने पूरी तरह से नाकाम बना दिया था. रूस-यूक्रेन युद्ध में भी ड्रोन का व्यापक पैमाने पर इस्तेमाल हो रहा है. ड्रोन अटैक में रूस के कुछ तेल रिफाइनरियां तबाह हो गईं. हर देश अपने स्तर पर ड्रोन को डेवलप करने में जुटा है, ताकि इसे और खतरनाक एवं मारक बनाया जा सके. ऐसे में ड्रोन वॉरफेयर हर मुल्क के लिए बड़ा खतरा बन गया है, जिससे निपटना समय की मांग है. भारत ने एयर थ्रेट से निपटने और देश को सुरक्षित रखने के लिए मिशन सुदर्शन चक्र लॉन्च किया है. इसे 2035 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है. इसके तहत मिसाइल और लड़ाकू विमान के खतरों से निपटने की मुकम्मल व्यवस्था की जाएगी. अब इंडियन आर्म्ड फोर्सेज ड्रोन के खतरे से निपटने की कोशिश में जुटा है. इसके लिए ज्वाइंट काउंटर अनमैन्ड एरियल सिस्टम (CUAS) ग्रिड तैयार किया जा रहा है. यह एंटी ड्रोन डिफेंस सिस्टम होगा जो खासतौर पर UAV से निपटेगा. ऐसे में अब चीन-पाकिस्तान जैसे देशों के हवाई हमले को नाकाम करना पहले के मुकाबले आसान और प्रभावी हो जाएगा.
देश की हवाई सुरक्षा को और मजबूत करने की दिशा में भारत एक अहम कदम उठा रहा है. केंद्र सरकार जहां मिशन सुदर्शन चक्र के तहत पूरे देश में बहु-स्तरीय एयर डिफेंस शील्ड (Multi-Layered Air Defence Shied) विकसित करने में जुटी है, वहीं इसके समानांतर तीनों सेनाएं (आर्मी, एयरफोर्स और नेवी) मिलकर एक ज्वाइंट काउंटर अनमैन्ड एरियल सिस्टम (CUAS) ग्रिड तैयार कर रही हैं. इसका मकसद दुश्मन ड्रोन के बढ़ते खतरे को समय रहते पहचानना और उसे निष्क्रिय करना है. ‘इंडियन डिफेंस रिसर्च विंग’ की रिपोर्ट के अनुसार, अधिकारियों ने बताया कि हाल के वर्षों में ड्रोन का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है. अब ड्रोन सिर्फ निगरानी तक सीमित नहीं है, बल्कि सटीक हमले, हथियारों की तस्करी और झुंड यानी स्वार्म हमले के लिए भी इस्तेमाल हो रहे हैं. इसी खतरे को देखते हुए भारतीय सेना, वायुसेना और नौसेना अपने-अपने मौजूदा और भविष्य के काउंटर-ड्रोन सिस्टम को जोड़कर एक साझा ग्रिड बनाने पर काम कर रही हैं.
एंटी-ड्रोन डिफेंस सिस्टम क्या होता है?
एंटी-ड्रोन डिफेंस सिस्टम एक ऐसी सुरक्षा व्यवस्था है, जिसका इस्तेमाल दुश्मन या संदिग्ध ड्रोन की पहचान करने, उसे ट्रैक करने और ज़रूरत पड़ने पर उसे निष्क्रिय या नष्ट करने के लिए किया जाता है. यह सिस्टम खास तौर पर सैन्य ठिकानों, सीमावर्ती इलाकों, एयरपोर्ट, वीआईपी सुरक्षा और संवेदनशील प्रतिष्ठानों की रक्षा के लिए लगाया जाता है.
भारत को एंटी-ड्रोन सिस्टम की ज़रूरत क्यों पड़ी?
हाल के वर्षों में सीमाओं पर ड्रोन के ज़रिए हथियार, ड्रग्स और जासूसी गतिविधियों के मामले सामने आए हैं. इसके अलावा युद्ध और आतंकी हमलों में ड्रोन का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है. इन्हीं खतरों को देखते हुए भारत ने एंटी-ड्रोन डिफेंस सिस्टम को अपनी सुरक्षा रणनीति का अहम हिस्सा बनाया है.
एंटी-ड्रोन सिस्टम ड्रोन को कैसे पकड़ता है?
यह सिस्टम रडार, रेडियो फ्रीक्वेंसी सेंसर, कैमरा और इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम की मदद से हवा में उड़ रहे ड्रोन का पता लगाता है. ड्रोन की पहचान होने के बाद उसकी दिशा, ऊंचाई और गति को ट्रैक किया जाता है, ताकि यह तय किया जा सके कि वह खतरा है या नहीं.
ड्रोन को निष्क्रिय करने के लिए कौन-से तरीके अपनाए जाते हैं?
एंटी-ड्रोन सिस्टम ड्रोन को जैमिंग तकनीक से उसके सिग्नल तोड़कर गिरा सकता है. इसके अलावा लेज़र हथियार, माइक्रोवेव सिस्टम या पारंपरिक हथियारों से ड्रोन को नष्ट किया जाता है. कुछ सिस्टम ड्रोन को सुरक्षित तरीके से उतारने में भी सक्षम होते हैं.
भविष्य में एंटी-ड्रोन डिफेंस सिस्टम की क्या भूमिका होगी?
आने वाले समय में ड्रोन का इस्तेमाल और बढ़ने की संभावना है. ऐसे में एंटी-ड्रोन डिफेंस सिस्टम देश की आंतरिक सुरक्षा और सीमा सुरक्षा के लिए बेहद अहम होगा. भारत स्वदेशी तकनीक पर ज़ोर देते हुए संयुक्त और मल्टी-लेयर एंटी-ड्रोन ग्रिड विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है.
CUAS खास क्यों और अलग कैसे?
यह संयुक्त CUAS ग्रिड पारंपरिक एयर डिफेंस नेटवर्क से अलग होगा. अभी भारत की वायु सुरक्षा का मुख्य आधार भारतीय वायुसेना का इंटीग्रेटेड एयर कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम (IACCS) है, जो लड़ाकू विमानों, क्रूज मिसाइलों और बैलिस्टिक खतरों पर नजर रखता है. लेकिन ड्रोन की प्रकृति अलग होती है. वे आकार में छोटे, रडार पर कम दिखाई देने वाले, धीमी गति से उड़ने वाले और कई बार ऑटोमेटेड होते हैं. ऐसे में पारंपरिक रडार-आधारित सिस्टम कई बार उन्हें समय पर पकड़ नहीं पाते. इसी कमी को दूर करने के लिए CUAS ग्रिड को अलग और ज्यादा तेज़ प्रतिक्रिया देने वाला ढांचा बनाया जा रहा है. अधिकारियों के मुताबिक, इस नए ग्रिड की रीढ़ जॉइंट एयर डिफेंस सेंटर्स (JADC) होंगे. ये केंद्र पहले से ही तीनों सेनाओं के बीच समन्वय का काम करते हैं. CUAS ग्रिड के तहत इन केंद्रों के जरिए ड्रोन से जुड़ी हर जानकारी जैसे सेंसर डेटा, खतरे का आकलन और कार्रवाई के फैसले रियल टाइम में साझा की जा सकेगी. इससे ड्रोन अटैक के खिलाफ तुरंत कार्रवाई संभव होगी.
Anti Drone Defence System: भारत मिशन सुदर्शन चक्र के तहत पहले से ही एंटी मिसाइल और एंटी फाइटर जेट डिफेंस सिस्टम का नेटवर्क बनाने पर काम कर रहा है. (फाइल फोटो/Reuters)
क्या है खासियत?
CUAS ग्रिड में ड्रोन को निष्क्रिय करने के लिए कई तरह के उपाय शामिल होंगे. इनमें सॉफ्ट-किल और हार्ड-किल दोनों विकल्प रहेंगे. सॉफ्ट-किल में इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर, जीएनएसएस जैमिंग और कम्युनिकेशन को बाधित करना शामिल है, जिससे ड्रोन बिना विस्फोट के बेअसर हो जाए. वहीं, हार्ड-किल विकल्पों में निर्देशित ऊर्जा हथियार, लेजर सिस्टम और पॉइंट डिफेंस गन जैसे उपाय शामिल होंगे, जिनसे ड्रोन को सीधे मार गिराया जा सकेगा. ज्वाइंट CUAS ग्रिड का दायरा सिर्फ सैन्य ड्रोन तक सीमित नहीं रहेगा. यह छोटे कमर्शियल क्वाडकॉप्टर, फिक्स्ड-विंग यूएवी, लोइटरिंग म्यूनिशन और बड़े आर्म्ड ड्रोन सभी पर नजर रखेगा. खास तौर पर सीमावर्ती इलाकों, तटीय क्षेत्रों और महत्वपूर्ण सैन्य व नागरिक ठिकानों के आसपास इस ग्रिड को तैनात करने पर जोर होगा. इसका उद्देश्य शांति काल और युद्ध दोनों परिस्थितियों में लगातार निगरानी और त्वरित प्रतिक्रिया सुनिश्चित करना है.
एयर डिफेंस की मुकम्मल व्यवस्था
मिशन सुदर्शन चक्र और CUAS ग्रिड का समानांतर विकास भारत की एयर डिफेंस सोच में बड़े बदलाव को दिखाता है. सुदर्शन चक्र जहां उच्च स्तर के हवाई खतरों जैसे लड़ाकू विमान और मिसाइल से निपटने के लिए राष्ट्रीय स्तर की एकीकृत व्यवस्था तैयार कर रहा है, वहीं CUAS ग्रिड उस ड्रोन खतरे पर केंद्रित है जो पारंपरिक एयर डिफेंस परत से नीचे रहता है, लेकिन भारी नुकसान पहुंचाने की क्षमता रखता है. डिफेंस एक्सर्ट्स का मानना है कि CUAS ग्रिड के चालू होने से तीनों सेनाओं के बीच तालमेल और स्थिति की समझ काफी बेहतर होगी. इससे उन कमजोरियों को भी बंद किया जा सकेगा, जिनका फायदा दुश्मन सस्ते और आसानी से उपलब्ध ड्रोन के जरिए उठा सकते हैं. कुल मिलाकर यह पहल भारत की हवाई सुरक्षा को भविष्य के खतरों के लिए ज्यादा मजबूत, लचीला और तैयार बनाएगी, ताकि देश न सिर्फ विमानों और मिसाइलों से बल्कि बढ़ते ड्रोन खतरे से भी प्रभावी ढंग से निपट सके.




