स्वास्थ्य

भारत में स्ट्रोक के बढ़ते मामलों पर डॉक्टरों की चेतावनी, 56% मौतों के लिए High BP और 12% में तंबाकू जिम्मेदार

 नई दिल्ली। भारत में स्ट्रोक यानी मस्तिष्काघात के बढ़ते खतरे को कम करने के लिए तंबाकू की लत छुड़ाने और उच्च रक्तचाप को नियंत्रित करने पर विशेष ध्यान देना जरूरी है। विशेषज्ञों ने विश्व स्ट्रोक दिवस से पहले कहा कि केवल जागरूकता अभियान चलाने से समस्या का समाधान नहीं होगा। इसके लिए लोगों को तंबाकू छोड़ने में लगातार मदद और बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करानी होंगी।

स्ट्रोक से होने वाली मौतों में तंबाकू की बड़ी भूमिका

ग्लोबल बर्डन आफ डिजीज के आंकड़ों के 2024 के विश्लेषण के अनुसार, भारत में स्ट्रोक से होने वाली मौतों में 12 प्रतिशत के लिए तंबाकू का सेवन जिम्मेदार था, जबकि 56 प्रतिशत मौतों का संबंध उच्च सिस्टोलिक रक्तचाप से था। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, भारत में हर साल तंबाकू के सेवन से करीब 13.5 लाख लोगों की मौत होती है। देश में सिगरेट के अलावा बीड़ी, खैनी, गुटखा और जर्दा जैसे उत्पादों का भी बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होता है। नोएडा के मेदांता सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के न्यूरोसर्जरी एवं न्यूरोसाइंसेज विभाग के निदेशक डॉ. यशपाल सिंह बुंदेला ने कहा कि निकोटीन की लत के कारण लोगों के लिए तंबाकू छोड़ना मुश्किल हो सकता है। इसलिए परामर्श, निकोटीन रिप्लेसमेंट थेरेपी और अन्य प्रमाणित उपचारों की सुविधा बढ़ानी चाहिए।

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