भारत-यूरोप ‘मदर डील’…

अंतत: भारत और यूरोपीय संघ ने साझा इतिहास रच दिया। करीब 19 साल की माथापच्ची, उधेड़बुन, असमंजस, सवाल समाप्त हुए और दोनों लोकतांत्रिक शक्तियां ‘मदर डील’ पर सहमत हुईं। आपस में हस्ताक्षर कर दिए गए और दस्तावेजों का आदान-प्रदान किया गया। प्रधानमंत्री मोदी और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर ने इस सर्वाधिक व्यापक ‘मुक्त व्यापार समझौते’ (एफटीए) की घोषणा कर नई विश्व-व्यवस्था की बुनियाद रख दी। व्यापक और विश्व व्यवस्था परिवर्तनकारी इसलिए माना जा सकता है, क्योंकि पहली बार 193 करोड़ से अधिक की आबादी एक एफटीए के दायरे में होगी। भारत-यूरोप की अर्थव्यवस्था दुनिया की जीडीपी की 25 फीसदी है और दुनिया का एक-तिहाई व्यापार दोनों के बीच है, जिसे 2032 तक 40 लाख करोड़ रुपए तक ले जाने का लक्ष्य तय किया गया है। यूरोपीय संघ विश्व की दूसरी (27 देशों को मिला कर) और भारत चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है, लिहाजा यह ‘मदर डील’ ही है। इस एफटीए से अमरीकी राष्ट्रपति टं्रप की ‘टैरिफ दादागीरी’ का बड़ा रचनात्मक और शालीन जवाब दिया गया है। इसके अलावा, चीन के समानांतर भारत को ‘इनोवेशन एंड मैन्यूफैक्चरिंग हब’ बनाने का लक्ष्य तय कर चीनी वर्चस्व को भी चुनौती दी गई है, लिहाजा वाकई यह ‘मदर ऑफ ऑल टे्रड डील्स’ है। चीन में करीब 1700 यूरोपीय कंपनियां सक्रिय हैं। क्या अब वे भारत शिफ्ट हो सकती हैं? इसकी प्रबल संभावना बन गई है। गौरतलब यह है कि जब 2027 में यह एफटीए यूरोप के सभी 27 देशों में लागू हो जाएगा, तब भारत के 99 फीसदी से अधिक उत्पाद, सामान या तो ‘टैरिफ-मुक्त’ होंगे अथवा रियायती शुल्क ही देना पड़ेगा। मसलन-जैतून का तेल, वनस्पति तेल, ऑप्टिकल उपकरण, मशीनरी, रासायनिक एवं सर्जिकल उपकरण, फार्मा (खासकर जेनेरिक दवाएं), वस्त्र, रत्न-आभूषण, चमड़ा एवं जूते-चप्पल, चॉकलेट, पास्ता आदि लंबी सूची है।
अधिकतर उत्पादों और उपकरणों को ‘टैरिफ-मुक्त’ तय किया गया है। करीब 2 ट्रिलियन डॉलर के यूरोपीय बाजार में 2030 तक भारतीय उत्पादों का निर्यात 300 अरब डॉलर तक ले जाने का भी लक्ष्य रखा गया है। इससे महाराष्ट्र, कर्नाटक, गुजरात, आंध्रप्रदेश, तमिलनाडु, कानपुर, आगरा के सूक्ष्म एवं लघु उद्यम (एमएसएमई) का व्यापारिक लाभ काफी बढ़ सकता है। यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर ने खुलासा किया है कि 4 अरब यूरो से अधिक के टैक्स खत्म करने का फैसला किया गया है। इससे दोतरफा व्यापार बढ़ेगा, लाखों नौकरियां पैदा होंगी, दोनों पक्षों की प्रतिभाएं, छात्र, शोधार्थी और पेशेवर एक-दूसरे के देशों में सहजता से आ-जा सकेंगे। प्रधानमंत्री मोदी के मुताबिक, 8 लाख से अधिक भारतीय इस समय यूरोप के देशों में बसे हैं और काम कर रहे हैं। प्रधानमंत्री ने इस व्यापार समझौते को ‘साझा समृद्धि का ब्लू प्रिंट’ करार दिया है। गौरतलब यह भी है कि भारत की करीब 1500 कंपनियां फिलहाल यूरोप में सक्रिय हैं। एफटीए के बाद नीदरलैंड से प्रौद्योगिकी का हस्तांतरण होगा, लिहाजा 2030 तक भारत विश्व के शीर्ष 5 सेमीकंडक्टर हब में आ सकता है। फ्रांस, जर्मनी, इटली सरीखे देश भारत में रक्षा-फैक्टरियां स्थापित कर सकेंगे। अभी यूरोपीय कारें भारत में बहुत महंगी पड़ती हैं, क्योंकि उन पर 110 फीसदी टैक्स है। अब आगामी पांच साल में, चरणबद्ध तरीके से, यह टैक्स मात्र 10 फीसदी तक लाया जाएगा। जो लोग ऑडी, मर्सेडीज, फॉक्सवैगन, पोर्शे, बीएमडब्ल्यू सरीखी यूरोपीय कारों के शौकीन हैं, उनके लिए यह एफटीए भारी बचत की खबर लाया है। अब यूरोपीय बीयर पर टैरिफ 50 फीसदी कम किया गया है और शराब पर 40 फीसदी ही टैक्स लगेगा, जबकि अभी यह टैक्स 150 फीसदी तक है। भारत-यूरोप की यह ‘मदर डील’ बहुआयामी है, क्योंकि यह बहुपक्षीय गठबंधन की पक्षधर है। दुनिया के देश किसी एक-दो देशों की धमकियों के दबाव में कांपते और डरते न रहें, लिहाजा ऐसी डील कर जवाब दिया गया है।




