भारत से कारोबार को बेताब दुनिया…

जहां यह एफटीए क्लीन टेक्नोलॉजी, फार्मास्यूटिकल्स और सेमीकंडक्टर जैसे खास सेक्टर में जरूरी सप्लाई चेन को मजबूत करेगा, वहीं यह एग्रीमेंट मैरीटाइम सिक्योरिटी, काउंटरटेररिज्म और साइबर-डिफेंस जैसे एरिया में सहयोग बढ़ाएगा…
यकीनन इस समय दुनिया के कई विकसित और विकासशील देश भारत से व्यापार समझौते के लिए आगे बढ़ते हुए दिखाई दे रहे हैं। हाल ही में 5 फरवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव का जवाब देते हुए कहा कि इस समय दुनिया में आकार ले रही नई विश्व व्यवस्था भारत की ओर झुकी हुई है। यह कोई छोटी बात नहीं है कि पहले अधिकांश अंतरराष्ट्रीय आर्थिक-व्यापारिक टिप्पणियों में कहा जाता था कि भारत ने मौका गंवा दिया, लेकिन अब दुनिया भर के देशों का मानना है कि अगर वे आर्थिक रूप से तेजी से बढ़ते हुए भारत के साथ नहीं जुड़ पाए तो वे महत्वपूर्ण मौका गंवा देंगे। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत का तेज आर्थिक विकास और महंगाई नियंत्रण एक दुर्लभ संयोग है। भारत का तेजी से बढ़ता मजबूत बुनियादी ढांचा, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग (एमएसएमई) की रफ्तार, ऊर्जा विकास, नई पीढ़ी की शक्ति, डिजिटल विकास व मैन्युफैक्चरिंग सहित सर्विस सेक्टर की ताकत की वजह से दुनिया के लिए भारत उद्योग-कारोबार और चमकीले बाजार के दृष्टिकोण से आकर्षक देश बन गया है। भारत की भविष्य के लिए तैयार की नई आर्थिक रणनीतियों के मद्देनजर भी दुनिया के विकसित देश बेताबी से भारत के साथ द्विपक्षीय और मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के लिए तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। हाल ही में भारत के अमेरिका और यूरोपीय संघ (ईयू) के साथ हुए व्यापार समझौते सहित अन्य व्यापार समझौते भारत के युवाओं और एमएसएमई के लिए अपार अवसरों के द्वार खोलेंगे। गौरतलब है कि 2 फरवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच फोन पर वार्ता के बाद दोनों देशों के बीच अंतरिम व्यापार समझौते ने आकार लिया है।
इस समझौते से खाद्य, कृषि और डेयरी क्षेत्र में भारत के हितों का पूरा ध्यान रखा गया है। इस समझौते से जहां कई क्षेत्रों में भारत से अमेरिका को निर्यात बढ़ेंगे, वहीं भारत में निवेश भी बढ़ेंगे। इस समझौते से दुनिया के लिए मेक इन इंडिया, डिजाइन इन इंडिया और इनोवेट इन इंडिया का अभियान तेजी से आगे बढ़ेगा। 7 फरवरी को इस व्यापार समझौते के तहत अमेरिका के द्वारा भारतीय वस्तुओं पर लगाए गए 25 प्रतिशत जवाबी टैरिफ को घटाकर 18 फीसदी किया गया है और रूस से तेल खरीदी के मद्देनजर अमेरिकी के द्वारा दंडात्मक रूप में भारत पर लगाए गए 25 फीसदी अतिरिक्त टैरिफ को हटा दिया गया है। उल्लेखनीय है कि पिछले माह 27 जनवरी को नई दिल्ली में आयोजित भारत ईयू के शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष ऊर्सला वान डेर लायन की उपस्थिति में भारत-ईयू के बीच ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) का ऐलान किया गया। इस एफटीए पर आधिकारिक हस्ताक्षर लगभग छह महीने बाद होंगे। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यह एफटीए दुनिया की दो बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच तालमेल का शानदार उदाहरण है और भारत के लिए अत्यधिक लाभप्रद है। ऊर्सला ने इस समझौते को सभी व्यापार समझौतों की जननी (मदर ऑफ ऑल ट्रेड डील्स) कहते हुए यह रेखांकित किया कि दुनिया के वर्तमान ‘ग्रोथ सेंटर’ और इस सदी के आर्थिक पावर हाउस भारत के साथ यह एफटीए यूरोप को दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते आर्थिक क्षेत्रों में पहली बढ़त दिलाएगा। साथ ही यह वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए एक गेम-चेंजर साबित होने वाला एफटीए होगा। उन्होंने यह भी कहा कि इस एफटीए से दो अरब लोगों का एक साझा बाजार तैयार होगा और यह संयुक्त बाजार वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के लगभग एक चौथाई हिस्से का प्रतिनिधित्व करेगा। निश्चित रूप से इस एफटीए ने अमेरिका द्वारा लगाए गए ऊंचे टैरिफ के बीच भारत और ईयू को नई रणनीतिक गोलबंदी के साथ व्यापारिक संबंधों को नई दिशा दी है। गौरतलब है कि भारत-ईयू एफटीए के लिए बातचीत 2007 में शुरू हुई थी, लेकिन 2013 में यह वार्ता रुक गई। जून 2022 में वार्ता फिर से शुरू की गई थी, जो अब अंजाम तक पहुंची है। यह बात महत्वपूर्ण है कि यूरोपीय संघ भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है। भारत और यूरोपीय संघ एक-दूसरे के प्रतिद्वंद्वी नहीं बल्कि साझेदार हैं, क्योंकि दोनों मूल्य श्रृंखला के अलग-अलग स्तरों पर काम करते हैं। भारत प्रमुखतया श्रम-प्रधान और प्रसंस्करण आधारित वस्तुओं का निर्यात करता है, जबकि यूरोपीय संघ प्रमुखतया पूंजीगत वस्तुओं, उन्नत प्रौद्योगिकी और औद्योगिक उत्पादों की आपूर्ति करता है।
पिछले वित्त वर्ष 2024-25 में भारत और 27 देशों के संगठन ईयू के बीच वस्तुओं और सेवाओं में कुल व्यापार 190 अरब डॉलर से अधिक का रहा है। पिछले वित्त वर्ष में दोनों के बीच वस्तुओं का द्विपक्षीय व्यापार 136.53 अरब डॉलर रहा। इसमें भारत का निर्यात 75.85 अरब डॉलर और आयात 60.68 अरब डॉलर था। इसके अलावा, यूरोपीय संघ भारत में एक बड़ा निवेशक भी है, जिसका अप्रैल 2000 से सितंबर 2024 तक संचयी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) करीब 117.4 अरब डॉलर रहा है। यदि हम भारत-ईयू एफटीए को देखें तो पाते हैं कि इससे भारत और यूरोपीय संघ के छात्रों, मौसमी कामगारों, शोधकर्ताओं और उच्च कुशल पेशेवरों की आवाजाही को सुगम बनाने, अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए एक व्यापक गतिशील ढांचे को आकार मिला है। यह एफटीए भारत-ईयू व्यापार के लिए महज एक व्यापार का रणनीतिक दस्तावेज नहीं है, बल्कि आर्थिक पुनव्र्यवस्था के रूप में भारत और ईयू दोनों के लिए व्यापारिक जोखिम को पुनर्संतुलित करने और बदलते वैश्विक व्यापार वातावरण में आगे बढऩे का अवसर देने वाला चमकीला दस्तावेज है। इस एफटीए के तहत दोनों पक्ष आपसी व्यापार वाली 90 प्रतिशत से अधिक वस्तुओं पर आयात शुल्क शुरुआत से ही कम या समाप्त कर देंगे, जबकि कुछ अन्य वस्तुओं पर इसे आगामी वर्षों में चरणबद्ध तरीके से हटाया जाएगा। यह एफटीए व्यापार, निवेश, स्वच्छ और हरित ऊर्जा, विज्ञान और प्रौद्योगिकी, सुरक्षा और रक्षा, डिजिटल पहलों, कनेक्टिविटी, अंतरिक्ष और कृषि के क्षेत्रों में आपसी प्रतिबद्धता को दिखाता है। यह एफटीए वस्तुओं, सेवाओं के व्यापार और नियमों पर केंद्रित है, लेकिन निवेश संरक्षण और जीआई जैसे मुद्दे अलग से सुलझाए जाएंगे।
नि:संदेह विज्ञान और प्रौद्योगिकी सहयोग भारत-ईयू एफटीए का एक मुख्य स्तंभ है, जिसे संस्थागत ढांचे का समर्थन प्राप्त है और इससे सहयोगी अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा मिलेगा। इससे स्मार्ट ग्रिड, जल, टीके, आईसीटी, धु्रवीय विज्ञान और यूरोपीय अनुसंधान परिषद के साथ काम करने वाले युवा वैज्ञानिकों की गतिशीलता जैसे क्षेत्रों में नया सहयोग मिलेगा। अंतरिक्ष सहयोग भारत-ईयू एफटीए का एक महत्वपूर्ण आयाम है, जो दशकों के तकनीकी सहयोग और बढ़ते संस्थागत जुड़ाव पर आधारित है। जहां यह एफटीए क्लीन टेक्नोलॉजी, फार्मास्यूटिकल्स और सेमीकंडक्टर जैसे खास सेक्टर में जरूरी सप्लाई चेन को मजबूत करेगा, वहीं यह एग्रीमेंट मैरीटाइम सिक्योरिटी, काउंटरटेररिज्म और साइबर-डिफेंस जैसे एरिया में सहयोग बढ़ाएगा। इसमें कोई दो मत नहीं हैं कि अमेरिका और ईयू के साथ व्यापार समझौते भारत के निर्यात और निवेश के साथ विकास दर बढ़ाने में अहम होंगे। यह भी उल्लेखनीय है कि ईयू के अलावा अन्य देशों के साथ भारत के एफटीए भारत की आर्थिक तस्वीर को नया रूप देंगे। लेकिन अब भारत के द्वारा विभिन्न देशों के साथ एफटीए के अधिकतम लाभ उठाने के लिए घरेलू उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने, एफटीए के लिए जागरूकता बढ़ाने व गैर-टैरिफ बाधाएं दूर करने की जरूरत है।
डा. जयंती लाल भंडारी




