मंत्री मारे थप्पड़

यह लोकतंत्र है या कोई गुंडा-मवाली राज है? क्या कोई मंत्री, जनता के बीच, शिकायतों के माहौल में, किसी युवक को सरेआम थप्पड़ मार सकता है? क्या कोई राजनीतिक कार्यकर्ता मंत्री के सामने, मंत्री के परिवार को, गालियां देने का दुस्साहस कर सकता है? दिल्ली सरकार के लोक निर्माण मंत्री प्रवेश वर्मा ने आवेश में आकर एक युवक को थप्पड़ मारा है। यह संज्ञेय और दंडनीय अपराध है, लेकिन चौतरफा राजनीतिक दबाव के बाद पुलिस ने शिकायत तो दर्ज की है, लेकिन वह ‘गैर-संज्ञेय अपराध सूचना’ (एनसीआर) ही है, जो महज खानापूर्ति है। आम आदमी पार्टी (आप) के जिस विधायक जरनैल सिंह ने सडक़ निर्माण में भ्रष्टाचार की परतें उखाड़ कर मंत्री जी के सामने सब कुछ बेपरदा कर दिया था, उनके खिलाफ भी पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज की है। मंत्री ने विधायक पर ही 50 लाख रुपए की ‘कमीशन’ मांगने का आरोप चस्पां कर दिया है और विभाग के इंजीनियर से पुलिस में भ्रष्टाचार की शिकायत दर्ज कराई है। सरकारी काम में बाधा डालने का आरोप लगाया गया है। वह प्राथमिकी है या नहीं, यह स्पष्ट नहीं है। मंत्री प्रवेश वर्मा की सफाई है कि जब इंजीनियर और ठेकेदार ने ‘घूस’ देने से साफ इंकार कर दिया, तो ‘आप’ विधायक ने सडक़ उखाड़ कर साबित करने की कोशिश की कि देश की राजधानी दिल्ली में सडक़ों का निर्माण और उनकी गुणवत्ता ‘खस्ताहाल’ है। मंत्री जी! आप झूठ बयां कर रहे हैं। राजधानी दिल्ली में मॉनसून की बारिश सारी पोल खोल देती है। सडक़ों की गुणवत्ता ही ‘खस्ताहाल’ नहीं है, बल्कि गहरे, खुले गड्ढे भी हैं, जो ‘मौत के कुएं’ साबित हो रहे हैं। और फिर विधायक जरनैल सिंह ने अपने हाथों से सडक़ के टुकड़े उखाड़ कर मंत्री के सामने रखे थे,उन पर संबद्ध अधिकारियों और ठेकेदार को तलब क्यों नहीं किया गया? इंजीनियर को तुरंत निलंबित क्यों नहीं किया गया? विधायक ने तो काले, कुरूप सच को नंगा कर दिया था। क्या दिल्ली सरकार ऐसे ठेकेदारों को भी संरक्षण दे रही है? बहरहाल विधायक के सहयोगी युवक ने ‘उखड़ी सडक़’ का वीडियो बनाया, तो उसे थप्पड़ रसीद कर दिया गया! क्या नए भारत की, नई भाजपा की, यही नई संस्कृति और राजनीति है? दरअसल प्रवेश वर्मा की फितरत और व्यवहार ही ऐसा है।
जब वह यमुना के पानी और सफेद झाग वाले प्रदूषण का मुआयना करने गए थे, तब उन्होंने एक आला अधिकारी को, सभी के सामने, बुरी तरह फटकार लगाई थी। वह ‘थप्पड़’ से भी करारा दुव्र्यवहार था। यही नहीं, पंजाब में भाजपा मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान को थप्पड़ मारने वाले फर्जी वीडियो सोशल मीडिया पर अपलोड कर रही है, तो क्या ऐसा व्यवहार ‘लोकतांत्रिक’ माना जा सकता है? अद्र्धराज्य दिल्ली ने विधानसभा के लिए केजरीवाल की ‘आप’ के खिलाफ जनादेश दिया था, तो कुछ अपेक्षाएं थीं, कुछ उम्मीदें और आकांक्षाएं थीं, कमोबेश जनता या किसी भी नागरिक को थप्पड़ मारने का जनमत नहीं दिया गया था। विवश भी नहीं किया जा सकता। मौजूदा संदर्भ में विधायक ने ‘घूस’ मांगी या नहीं, ‘आप’ के युवा कार्यकर्ता ने मंत्री के परिवार को गालियां दीं या नहीं, ये सभी जांच के विषय हैं। यदि दिल्ली पुलिस तटस्थ, गंभीर होकर जांच करेगी, तो निश्चित रूप से ‘काला यथार्थ’ सामने आएगा, लेकिन हमें लगता नहीं कि पुलिस मंत्री के खिलाफ कुछ जांच करेगी, क्योंकि दिल्ली पुलिस सीधे केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन है। गृहमंत्री अमित शाह अपनी ही पार्टी की सरकार के मंत्री के खिलाफ कार्रवाई क्यों करेंगे? इतने नीर-क्षीर विवेकी नहीं हैं केंद्रीय गृहमंत्री! सवाल तो यह भी है कि यदि विधायक जरनैल सिंह ने इंजीनियर, ठेकेदार से ‘कमीशन’ मांगी थी, तो उनके खिलाफ भ्रष्टाचार की धाराओं में पहले ही केस दर्ज क्यों नहीं किया गया? मंत्री ने अधिकारियों को आदेश क्यों नहीं दिए? मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने दिल्ली पुलिस आयुक्त से आग्रह क्यों नहीं किया? क्या भाजपा की सियासत यही है? नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी इस संदर्भ में सही ही लगते हैं कि यह सत्ता का ऐसा चेहरा है, जिसे वोटर का डर नहीं है। सत्ता से सवाल करोगे, तो इसी तरह थप्पड़ रसीद किए जाते रहेंगे। विपक्ष इस विषय पर लामबंद हो रहा है। वह आंदोलने छेडऩे के मूड में है। किसी भी नेता को किसी अन्य व्यक्ति को थप्पड़ मारने का अधिकार नहीं है। इस मामले में सीमाओं का अतिक्रमण हुआ है। इस संबंध में ठोस कार्रवाई की जानी चाहिए। दोबारा इस तरह की हरकत न हो, इसके लिए जरूरी है कि दोषी नेता पर कड़ी कार्रवाई की जाए। नेता लोग अगर अपनी सीमाओं को उल्लंघन करेंगे, तो सियासत में बुराई का साम्राज्य स्थापित हो जाएगा।




