मंत्री विजय शाह के समर्थन में उतरी पूरी एमपी कैबिनेट, 45 मिनट तक चली मीटिंग, बचाने को निकाला नया रास्ता

भोपाल: मध्य प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर बड़ा भूचाल आ गया है। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान कर्नल सोफिया कुरैशी पर दिए गए अपने कथित विवादित बयान को लेकर घिरे जनजातीय मंत्री विजय शाह के मामले में राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के विपरीत रुख अपनाया है। मंगलवार को हुई रूटीन कैबिनेट बैठक के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और उनके मंत्रिमंडल ने विजय शाह का पूरी तरह समर्थन करने का फैसला किया है, जिससे यह मामला और अधिक पेचीदा हो गया है।
कैबिनेट का 45 मिनट का मंथन
मंगलवार की कैबिनेट बैठक खत्म होने के बाद एक गुप्त और रणनीतिक सत्र चलाया गया। बैठक कक्ष से मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल, सीएम के अपर मुख्य सचिव नीरज मंडलोई, गृह विभाग के एसीएस संजय शुक्ला, जीएडी के एसीएस शिवशेखर शुक्ला और लॉ सचिव मुकेश कुमार, इन 5 वरिष्ठ अधिकारियों को छोड़कर बाकी सभी अधिकारियों को बाहर भेज दिया गया।
इसके बाद एसआईटी (SIT) की रिपोर्ट के आधार पर मंत्री विजय शाह को कक्ष में बुलाया गया, जहां उन्होंने मंत्रियों के सामने अपनी सफाई पेश की। सफाई देने के बाद शाह को कक्ष से बाहर कर दिया गया और उनके बाहर खड़े रहने के दौरान करीब पौन घंटे तक कानूनी पहलुओं और उन्हें बचाने के तर्कों पर गहन चर्चा हुई। अंततः यह सहमति बनी कि विजय शाह पर केस चलाने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
मंत्रियों का तर्क- माफी मांग चुके तो केस क्यों?
कैबिनेट बैठक के दौरान अधिकांश मंत्रियों का यह तर्क था कि मंत्री विजय शाह अपने बयान के बाद सार्वजनिक रूप से तीन-चार बार माफी मांग चुके हैं, इसलिए अब इस मामले को आगे बढ़ाने का कोई औचित्य नहीं बनता। एसआईटी की रिपोर्ट कैबिनेट के सामने रखने से पहले सरकार ने अटॉर्नी जनरल (AG) की कानूनी राय भी ली थी।




