राष्ट्रीय

महंगाई से बढ़ती आम आदमी की मुश्किलें

इस समय देश में अनेक खाद्य वस्तुओं में महंगाई लगातार बढ़ रही है। महंगाई से देश में आम आदमी के लिए मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। खाद्य तेल तो पहले से ही दिन-प्रतिदिन महंगे होते जा रहे हैं। अब प्याज, चीनी, मक्का, सभी के भाव बढ़ते जा रहे हैं। खाद्य तेल और प्याज अपने-अपने कारणों से महंगे हो रहे हैं लेकिन चीनी और मक्का के महंगे होने के पीछे ज्यादातर लोग एथेनॉल को जिम्मेदार मान रहे हैं। 

भारत सरकार ने पैट्रोलियम के लिए विदेशों पर निर्भरता कम करने के लिए एथेनॉल को पैट्रोल में 20 प्रतिशत करने का निर्णय तो ले लिया लेकिन सरकार ने इसके कारण उत्पन्न होने वाली महंगाई का शायद कोई अनुमान नहीं लगाया। लोगों का मानना है कि गन्ने का इस्तेमाल एथेनॉल बनाने में हुआ तो चीनी के दाम आसमान पर पहुंच गए। उत्पादन कम होने के कारण भारत में जमाखोर सक्रिय न हों, ऐसा हो ही नहीं सकता। जिस विदेशी मुद्रा को बचाने के लिए भारत सरकार आयातित कच्चे तेल की निर्भरता और नखरों से बचकर एथेनॉल को बढ़ावा दे रही थी, अब उसी विदेशी मुद्रा से लम्बे समय बाद चीनी आयात करेगी। 

वहीं मक्का से एथेनॉल बनाने की बात सामने आ रही है। इसी कारण मक्का के दाम पिछले 3 साल में दोगुने हो गए हैं। जहां चीनी महंगी होने से उसके साथ जुड़ी अनेकों वस्तुओं के दाम भी बढ़ रहे हैं, वहीं मक्का के दाम बढऩे से पोल्ट्री उद्योग में महंगाई बढ़ी है। मांसाहार के शौकीन लोगों को अंडा और चिकन महंगा मिल रहा है क्योंकि मुर्गीदाने में मक्का का इस्तेमाल होता है। यहां भी चीनी वाला ही मामला हो रहा है। जहां हम पहले वियतनाम और बंगलादेश को मक्का निर्यात करते थे, अब आयात कर रहे हैं। और इन चीजों से बने एथेनॉल को पैट्रोल में 20 प्रतिशत मिलाने पर वाहन मालिक अलग परेशान हैं। 

आखिर सरकार को इस सब मसले पर गंभीरता से सोचना पड़ेगा। कच्चे तेल की उपलब्धता सुनिश्चित करनी पड़ेगी। उसे अपनी कुछ नीतियों को बदलना होगा। बिना किसी दबाव के चीन की तरह बनना होगा। किसी ताकत के दबाव में यहां से खरीदो, यहां से नहीं, जैसी बातों को नकार देश की जरूरत के हिसाब से कहीं से भी खरीदने का निर्णय करने की क्षमता को बढ़ाना होगा। चीन ऐसे मामलों में किसी भी ताकत के सामने नहीं झुकता, वह अपनी जरूरत के हिसाब से निर्णय लेता है।

जहां तक पैट्रोल में एथेनॉल  बढ़ाने की सरकार नीति की बात है, सरकार को इस पर सोचना ही पड़ेगा। मेरे विचार से इस तरफ खर्चा करने की बजाय सरकार इलैक्ट्रिक वाहनों पर और सबसिडी बढ़ा दे और लोगों को पैट्रोल-डीजल की बजाय इलैक्ट्रिक वाहनों की ओर आकॢषत करे तो बेहतर होगा। इससे एथेनॉल बनाकर कुछ वस्तुओं पर होने वाली महंगाई से सरकार जनता को बचा सकेगी। इलैक्ट्रिक वाहन अभी भी आम लोगों की हैसियत के हिसाब से ऊंचे दाम पर मिल रहे हैं। अगर इनके दाम तर्कसंगत होंगे तो आम आदमी पैट्रोल-डीजल से चलने वाले वाहन क्यों खरीदेगा और प्रदूषण से भी राहत मिलेगी।

रही बात प्याज और खाद्य तेलों की महंगाई की, तो सरकार को दूरदॢशता से काम लेना होगा। सरकारी मशीनरी और नेताओं को उत्पादन और मांग पर पैनी नजर रखनी होगी। अधिकारी सरकार को उत्पादन के सही आंकड़े दें तो इस तरह बेतहाशा महंगाई से जनता को न जूझना पड़े, क्योंकि सही जानकारी होने पर सरकार समय पर वस्तुओं का निर्यात और आयात करने पर उचित फैसले ले सकेगी। जमाखोरों को पकड़ कर सख्त सजा देनी होगी। तभी इस ‘महंगाई डायन’ से जनता बच पाएगी।-वकील अहमद 

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