राजनीति

महायुति के मंत्री नहीं चाहते थे महिला अफसर, मुझे साइड किया गया, IAS का खुलासा, खलबली

मुंबई : महाराष्ट्र की सीनियर अफ़सर मनीषा पाटणकर म्हैसकर ने एक ऐसी बात कही, जिससे हलचल मच गई। उन्होंने कहा कि महायुति सरकार में एक मंत्री नहीं चाहते थे कि कोई महिला अफ़सर उनके विभाग की मुखिया बने, जिसकी वजह से उन्हें उस पद के लिए नज़रअंदाज़ कर दिया गया। मनीषा म्हैसकर अभी एडिशनल चीफ़ सेक्रेटरी (गृह) हैं। दिल्ली में हो रहे महिला सिविल सेवकों के एक साहित्यिक सम्मेलन के लिए छपी एक स्मारिका में दिए इंटरव्यू में 2023 की इस घटना का ज़िक्र किया। उस समय एकनाथ शिंदे की सरकार थी।

मनीषा म्हैसकर की टिप्पणियों से ख़ास तौर पर इसलिए हलचल मच गई है, क्योंकि महायुति सरकार महिलाओं को बढ़ावा देने पर गर्व करती है। महायुति में शिंदे सेना, BJP और NCP शामिल हैं। महायुति ने ‘मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहिण योजना’ लागू की है और महाराष्ट्र में पहली महिला चीफ़ सेक्रेटरी, BMC कमिश्नर और पुलिस महानिदेशक की नियुक्ति की है।

2023 की उस घटना का जिक्र

सीनियर आईएएस मनीषा ना कहा कि उनका आईएएस के तौर पर 33 साल का करियर है। महाराष्ट्र में 2023 में जब महायुति की सरकार बनी तो अफसरों को पोस्टिंग मिल रही थी। उन्होंने कहा कि उनकी सीनिएरिटी को बायपास करके जूनियर को पोस्टिंग दी गई। ऐसा इसलिए किया गया क्योंकि उस विभाग के मंत्री को विभाग में महिला अफसर की पोस्टिंग मंजूर नहीं थी। उन्होंने साफ कहा कि मैं अपने विभाग में महिला अफसर की पोस्टिंग नहीं चाहता।

मनीषा ने उस घटना को बताया अपवाद

आईएएस मनीषा ने कहा कि यह घटना चौंकाने वाली थी, क्योंकि अफ़सरशाही में लिंग-भेद लगभग ख़त्म हो चुका था। बाद में TOI से बात करते हुए म्हैसकर ने कहा कि महाराष्ट्र मेरे साथ बहुत निष्पक्ष रहा है और सिर्फ़ एक ही अपवाद रहा है। यह कोई इत्तेफ़ाक नहीं है कि महाराष्ट्र मेरे साथ निष्पक्ष रहा है। हमारे यहां सामाजिक सुधारों की विरासत है, और यह एक बहुत ही प्रगतिशील राज्य है। और सबसे अहम बात यह है कि जनता के लिए अफ़सर का लिंग कोई मायने नहीं रखता।

उन्होंने कहा कि उस लेख में उनकी टिप्पणियों को संदर्भ से हटाकर पेश किया गया। सिर्फ़ उस एक अपवाद को ही ज़्यादा उभारा गया था। महाराष्ट्र में महिला अफ़सरों के गृह, वित्त, ऊर्जा और आवास जैसे अहम विभागों की मुखिया बनने का इतिहास रहा है। मनीषा म्हैसकर PWD, शहरी विकास, प्रोटोकॉल जैसे कई विभागों की मुखिया रह चुकी हैं, और BMC में एडिशनल कमिश्नर भी रही हैं।

‘महिलाओं को खुद को साबित करने के लिए करनी पड़ती है मेहनत’

उस लेख में उन्होंने कहा कि जब उन्होंने यह सेवा जॉइन की थी, उसकी तुलना में आज IAS में कहीं ज़्यादा महिलाएं हैं। समानता के माहौल की वजह से उन्हें शायद ही कभी भेदभाव का सामना करना पड़ता है। हालांकि, उन्होंने कहा कि महिलाओं को अभी भी खुद को साबित करने की ज़रूरत होती है, क्योंकि उनकी परख पुरुष अफ़सरों की तुलना में ज़्यादा सख़्ती से की जाती है। अगर कोई पुरुष अधिकारी अकुशल होता है, तो उसकी आलोचना व्यक्तिगत स्तर पर की जाती है। लेकिन अगर कोई महिला अधिकारी अकुशल होती है, तो उसकी आलोचना को सभी महिलाओं पर लागू कर दिया जाता है।

आईएएस मनीषा ने बताई महिलाओं को चार श्रेणियां

मनीषा म्हैस्कर ने कहा कि आमतौर पर लोगों की चार श्रेणियां होती हैं: वे जो लैंगिक अंतर में विश्वास रखते हैं लेकिन इसे ज़ाहिर नहीं करते, वे जो महिला सहकर्मियों को नहीं चाहते; वे जिनके लिए लिंग से कोई फ़र्क नहीं पड़ता, और वे जिन्हें लगता है कि महिलाएं ज़्यादा बेहतर काम करेंगी। हालांकि, उन्होंने यह भी बताया कि जनता लिंग-तटस्थ होती है। उसे एक अच्छा अधिकारी चाहिए होता है, और लिंग से कोई फ़र्क नहीं पड़ता।

मेरे 33 साल के करियर में ऐसा सिर्फ़ एक बार हुआ। 2023 में सरकार बनने के बाद अफ़सरों को पोस्टिंग मिल रही थीं। एक नेता ने कहा कि वह नहीं चाहते कि कोई महिला उनके विभाग को चलाए और मुझे नज़रअंदाज़ कर दिया गया। मैं क्या कह सकती हूं?

मनीषा म्हैसकर, आईएएस

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