मुक्त व्यापार का सुकूनदेह परिदृश्य

साथ ही वर्ष 2026 में पेरू, चिली, आसियान, मैक्सिको, कनाडा, दक्षिण अफ्रीका, इजराइल, भारत गल्फ कंट्रीज काउंसिल सहित अन्य प्रमुख देशों के साथ भी नए एफटीए आकार लेते हुए दिखाई देंगे…
यकीनन इस समय भारत के मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) का सुकूनदेह परिदृश्य उभरकर दिखाई दे रहा है। 21 जनवरी को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनॉल्ड ट्रंप ने दावोस में विश्व आर्थिक मंच की 56वीं बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मेरे करीबी दोस्त और एक सम्मानित वैश्विक नेता हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिका और भारत शीघ्र ही एक शानदार व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) को आकार देते हुए दिखाई देंगे। इसी तरह 20 जनवरी को यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने दावोस में विश्व आर्थिक मंच पर अपने संबोधन में कहा कि भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) एक ऐसे ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) की कगार पर हैं, जिससे दो अरब लोगों का विशाल बाजार बनेगा। यह बाजार वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का लगभग एक चौथाई हिस्सा होगा। उन्होंने इस समझौते को सभी समझौतों की जननी करार दिया है। वस्तुत: भारत और 27 देशों के ईयू के बीच एफटीए पर पिछले 18 वर्षों से जारी वार्ता अंतिम दौर में है। उम्मीद है कि 27 जनवरी को नई दिल्ली में आयोजित भारत-यूरोपीय शिखर सम्मेलन के दौरान यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला और यूरोपीयन परिषद के अध्यक्ष एंटोनिया कास्टा की उपस्थिति में भारत-यूरोपीय संघ के बीच एफटीए पर हस्ताक्षर किए जाएंगे। गौरतलब है कि भारत और ईयू के बीच यह एफटीए एक ऐसे समय में सुनिश्चित हो रहा है, जबकि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप भारत और यूरोपीय देशों के खिलाफ टैरिफ का इस्तेमाल करके भारत और ईयू दोनों के वैश्विक व्यापार को प्रभावित कर रहे हैं। पिछले वर्ष भारत और ईयू के बीच 135 अरब डॉलर से अधिक का व्यापार हुआ है।
ऐसे में ईयू से एफटीए टेक्सटाइल व कृषि निर्यात को सबसे अधिक लाभ दे सकता है। अभी कृषि, मांस और अन्य प्रोसेस्ड उत्पादों को ईयू में निर्यात करने पर 15.2 प्रतिशत तो टेक्सटाइल व गारमेंट पर 10 प्रतिशत का शुल्क लगता है। व्यापार समझौते के बाद ईयू के बाजार में इन वस्तुओं पर शून्य शुल्क हो जाएगा और इन भारतीय उत्पादों का निर्यात ईयू के बाजार में कई गुना बढ़ जाएगा। यह बात भी महत्वपूर्ण है कि पिछले वर्ष मार्च 2025 से भारत और अमेरिका बीच बीटीए को लेकर चली आ रही वार्ता का सातवां दौर 13 जनवरी से भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियागोर की पहल पर शुरू हुआ है और अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने शीघ्र ही बीटीए के आकार लेने की बात कही है। यद्यपि 19 जनवरी को अमेरिका-भारत स्ट्रेटेजिक पाटर्नरशिप फोरम के प्रेसीडेंट मुकेश अघी ने कहा है कि अमेरिका और भारत के बीच व्यापक व्यापार समझौता आगामी तीन महीनों में संभावित है, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने भारत के लिए बार-बार वार्ता के लक्ष्य बदले हैं। शुरुआत में ट्रंप ने कहा कि भारत अमेरिका से अधिक खरीद कर व्यापार घाटे को कम करे। उसके बाद वे रूसी तेल पर केंद्रित हो गए और पिछले दिनों यह समझौता केवल भारत द्वारा ट्रंप को खुश नहीं किए जाने से अधर में लटका हुआ बताया गया था। ऐसे में भारत के लिए उपयुक्त यही है कि वह अमेरिका के साथ व्यापार वार्ता आगे बढ़ाते हुए अमेरिका के बाजार में निर्यात में रुकावट और ऐसे निर्यात की भरपाई के लिए नई वैकल्पिक व्यवस्था स्थापित करने की रणनीति के साथ आगे बढ़े। इसमें कोई दो मत नहीं है कि भारत के लिए पिछले वर्ष 2025 में ब्रिटेन, ओमान और न्यूजीलैंड के साथ किए गए एफटीए का इस वर्ष 2026 में कार्यान्वयन अहम होगा। विगत माह 22 दिसंबर को भारत और न्यूजीलैंड ने नौ महीने की लगातार बातचीत के बाद एक मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) को अंतिम रूप दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने इसकी घोषणा की है। प्रधानमंत्री मोदी ने एक्स पर कहा कि भारत-न्यूजीलैंड की साझेदारी नई ऊंचाइयों पर पहुंचने वाली है और इस एफटीए से अगले 5 वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने में मदद मिलेगी।
इस एफटीए के तहत न्यूजीलैंड में 100 प्रतिशत भारतीय निर्यात पर शून्य शुल्क सुनिश्चित किया गया है। साथ ही न्यूजीलैंड ने भारत में अगले 15 वर्षों में 20 अरब डॉलर के प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की प्रतिबद्धता भी जताई है। दूसरी ओर भारत ने न्यूजीलैंड के 70 प्रतिशत उत्पादों के लिए शुल्क में नरमी की पेशकश की है, जो 95 प्रतिशत द्विपक्षीय व्यापार मूल्य को कवर करती है। इस एफटीए से 30 प्रतिशत उत्पादों के लिए शुल्क खत्म हो जाएगा। खास बात यह है कि इस एफटीए के तहत लगभग 29.97 प्रतिशत उत्पादों को सूची से बाहर रखा गया है। इनमें दूध, दही, पनीर, भेड़ मांस, म_ा के साथ अन्य पशु उत्पाद, चना, मक्का, बादाम, चीनी, प्याज जैसी वस्तुएं शामिल हैं। एफटीए लागू होने के बाद न्यूजीलैंड के लिए भारत का शुल्क घटकर 13.18 प्रतिशत रहेगा। यह एफटीए भारत की प्रतिभाओं, स्टार्टअप्स और नवाचार के लिए एक मजबूत बुनियाद प्रदान करता है। यह एफटीए भारत के लिए सबसे प्रमुख सेवाओं की ऐसी पेशकश करता है, जो अब तक किसी भी पिछले एफटीए में शामिल नहीं हैं। उल्लेखनीय है कि विगत माह 18 दिसंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ओमान के सुल्तान हैथम बिन तारिक की मौजूदगी में मस्कट में वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और ओमान के उनके समकक्ष कैस बिन मोहम्मद अल यूसुफ ने मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस एफटीए को आधिकारिक तौर पर समग्र आर्थिक भागीदारी समझौता (सीपा) कहा गया है। यह बात भी महत्वपूर्ण है कि भारत-ओमान एफटीए के तहत भारत के 98 प्रतिशत निर्यात को ओमान के बाजार में शून्य पर पहुंच मिलेगी। इसमें ओमान को होने वाले 99 प्रतिशत से अधिक निर्यात शामिल हैं। इस समझौते से भारत के कपड़ा, रत्न-आभूषण, दवाई, वाहन, कृषि उत्पाद और चमड़ा उद्योग को बड़ा फायदा होने की उम्मीद है। खास तौर से भारत से करीब 3.64 अरब डॉलर के निर्यात पर ओमान में फिलहाल लगने वाला 5 प्रतिशत शुल्क शून्य हो जाएगा। इसके बदले में भारत ने ओमान से आने वाले विभिन्न उत्पादों पर आयात शुल्क में कमी सुनिश्चित की है। इसी तरह विगत वर्ष भारत और ब्रिटेन के बीच किया गया एफटीए भी महत्वपूर्ण है। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीएर स्टार्मर और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि भारत और ब्रिटेन (यूके) के बीच एफटीए से दोनों देशों के बीच आपसी कारोबार ऊंचाई पर होगा और नए अवसर बेजोड़ होंगे।
इन सबके साथ-साथ 2026 में मॉरीशस, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), ऑस्ट्रेलिया और चार यूरोपीय देशों आइसलैंड, स्विट्जरलैंड, नॉर्वे और लिकटेंस्टाइन के समूह यूरोपियन फ्री ट्रेड एसोसिएशन (एफ्टा) के साथ एफटीए के लाभ अधिक मिलते हुए दिखाई देंगे। साथ ही वर्ष 2026 में पेरू, चिली, आसियान, मैक्सिको, कनाडा, दक्षिण अफ्रीका, इजराइल, भारत गल्फ कंट्रीज काउंसिल सहित अन्य प्रमुख देशों के साथ भी नए एफटीए आकार लेते हुए दिखाई देंगे। यह बात भी महत्वपूर्ण है कि भारत के द्वारा विभिन्न देशों के साथ एफटीए के अधिकतम लाभ उठाने के लिए घरेलू उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने, एफटीए के लिए जागरूकता बढ़ाने, गैर-टैरिफ बाधाएं दूर करने, सेवा क्षेत्र का लाभ उठाने, निर्यात में विविधता लाने, कृषि और संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा करने, व्यापार संतुलन को भारत के पक्ष में लाने के साथ-साथ, पर्यावरण और श्रम मानकों के परिपालन पर ध्यान केंद्रित करना जरूरी होगा। उम्मीद करें कि भारत एफटीए की नई आर्थिक शक्ति से निर्यात, सेवा, निवेश, तकनीकी सहयोग और पेशेवरों की आवाजाही को नई ऊंचाई देते हुए भारत को वर्ष 2028 तक दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था और वर्ष 2047 तक विकसित देश बनाने की डगर पर आगे बढ़ते हुए दिखाई देगा।-डा. जयंती लाल भंडारी




