राजनीति में क्यों आएं युवा?

यह समझना आवश्यक है कि युवा ही किसी देश का वर्तमान और भविष्य दोनों हैं। उन्हें देश की नीतियों, राजनीतिक मुद्दों और सामाजिक चुनौतियों के प्रति जागरूक रहना चाहिए। राजनीति से दूरी बनाकर, वास्तविक परिस्थितियों की अनदेखी करके और देश में चल रही घटनाओं के प्रति आंखें मूंदकर हम अपने ही राष्ट्र के भविष्य के साथ अन्याय कर रहे हैं। इसलिए आवश्यकता इस बात की नहीं है कि युवा राजनीति से दूर रहें, बल्कि आवश्यकता इस राजनीति से दूरी की नहीं, युवाओं की सक्रिय भागीदारी की है। समय की मांग है कि युवा सकारात्मक राजनीति के समर्थक बनें…
आमतौर पर एक सामान्य व्यक्ति शांतिप्रिय, ईमानदार, सहयोगी और अपने काम से काम रखने वाला होता है। वह समाज में शांति और सद्भाव बनाए रखना चाहता है। इसके विपरीत राजनीति में प्रवेश करने वाले अनेक लोग महत्वाकांक्षी हो जाते हैं और किसी न किसी तरह सत्ता एवं प्रभाव हासिल करने की कोशिश करते हैं। प्रसिद्ध नाटककार जॉर्ज बर्नार्ड शॉ ने अपने नाटक ‘द एप्पल कार्ट’ में आम जनता और राजनेताओं के संबंधों पर व्यंग्य करते हुए एक रोचक उदाहरण प्रस्तुत किया है। उनके अनुसार आम जनता पांच वर्षों के लिए अपने प्रतिनिधियों को चुनती है और उन्हें एक गुब्बारे में बैठाकर ऊपर भेज देती है। गुब्बारे में बैठे राजनेता पांच वर्षों तक जनता से दूर रहते हैं, जबकि जनता उनसे किए गए वादों को पूरा होने की उम्मीद में आसमान की ओर देखती रहती है। इस दौरान आम आदमी की जेब खाली होती जाती है।
पांच साल बाद गुब्बारा वापस आता है और फिर वही प्रक्रिया दोहराई जाती है। परिणामस्वरूप आम आदमी और गरीब होता जाता है, जबकि राजनेता अधिक समृद्ध होते जाते हैं। इस प्रकार राजनीति कई बार आम जनता के शोषण का माध्यम बनती दिखाई देती है। इसे युवा ही रोक सकते हैं। महात्मा गांधी ने भी राजनीति के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा था, ‘जो व्यक्ति यह कहता है कि उसे राजनीति में कोई रुचि नहीं है, वह उस डूबते हुए व्यक्ति के समान है जो कहता है कि उसे पानी में कोई रुचि नहीं है।’ इस विषय पर आगे बढऩे से पहले यह समझना आवश्यक है कि राजनीति का वास्तविक अर्थ क्या है। दुर्भाग्यवश, अधिकांश लोगों के मन में राजनीति को लेकर नकारात्मक धारणा बनी हुई है। वे इसे भ्रष्टाचार, अनैतिकता और अनुचित हथकंडों का खेल मानते हैं। जबकि वास्तविकता यह है कि राजनीति का संबंध किसी देश या क्षेत्र के शासन, प्रशासन और नीतियों के निर्माण से है। पुराने घाघ नेताओं की मौजूदगी के चलते भारतीय राजनीति में प्रवेश करना किसी युवा के लिए अब आसान नहीं है। इसके लिए आर्थिक रूप से मजबूत होना और जनता के बीच अच्छी पहचान तथा समर्थन होना बहुत जरूरी है। एक आम आदमी जो बड़ी मुश्किल से अपना घर चलाता है और अपनी जरूरतों पर ही पैसा खर्च करता है, उसके लिए किसी राजनीतिक पार्टी से चुनाव लडऩे का टिकट पाने के लिए लाखों या करोड़ों रुपए खर्च करना आसान नहीं है। अगर कोई व्यक्ति निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लडऩा चाहता है, तो उसे भी अपने प्रचार-प्रसार और चुनाव जीतने के लिए काफी पैसा खर्च करना पड़ता है। दूसरी बड़ी समस्या जनता का समर्थन हासिल करना है। ऐसे में किसी युवा, योग्य और ईमानदार व्यक्ति के लिए जनता का समर्थन हासिल करना कठिन हो सकता है। इसके अलावा भारतीय राजनीति में आपराधिक मामलों का सामना कर रहे कुछ उम्मीदवारों और नेताओं की मौजूदगी भी एक चिंता का विषय है। ऐसे माहौल में एक सामान्य व्यक्ति के लिए अपनी जगह बनाना और राजनीति में टिके रहना आसान नहीं होता।
इन मुश्किलों के बावजूद युवा यह भी सोचें कि हम 21वीं सदी में रह रहे हैं, जहां एक ओर दुनिया तेजी से एक-दूसरे के करीब आ रही है, वहीं दूसरी ओर वैश्विक स्तर पर अस्थिरता भी बढ़ रही है। ऐसे समय में देश को सही दिशा में आगे ले जाने की जिम्मेदारी युवा पीढ़ी के कंधों पर है। देश की प्रगति, शांति और स्थिरता के लिए युवाओं का जागरूक और जिम्मेदार होना बेहद जरूरी है। आज शिक्षा, खेल और राजनीति जैसे जीवन के विभिन्न क्षेत्र एक-दूसरे से अलग नहीं हैं, बल्कि आपस में जुड़े हुए हैं। जब 18 वर्ष की आयु में किसी युवा को मतदान का अधिकार दिया जाता है और वह वाहन चलाने के लिए लाइसेंस प्राप्त कर सकता है, तो फिर उसी उम्र में उसे राजनीति के प्रति जागरूक होने से क्यों रोका जाए? यदि हम उसे देश के लिए योग्य राजनीतिक नेतृत्व चुनने में सक्षम मानते हैं, तो देश की राजनीतिक गतिविधियों में उसकी रुचि और समझ भी आवश्यक है। संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों के अनुसार भारत विश्व की सबसे बड़ी युवा आबादी वाले देशों में शामिल है। देश की 65 प्रतिशत से अधिक आबादी 35 वर्ष से कम आयु की है। इसका अर्थ है कि भारत के राजनीतिक भविष्य को निर्धारित करने में युवाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। आज के युवाओं के लिए देश की राजनीतिक परिस्थितियों से परिचित होना और विश्वभर में हो रहे राजनीतिक बदलावों पर नजर रखना आवश्यक है। विद्यार्थियों को अपने देश, संविधान, मौलिक अधिकारों, कर्तव्यों, राजनीतिक दलों तथा उनके चुनावी एजेंडों की जानकारी होनी चाहिए। इससे उनमें सामाजिक समस्याओं के प्रति संवेदनशीलता, जिम्मेदारी और जागरूकता विकसित होगी। जब किसी देश की युवा शक्ति एक साझा उद्देश्य के लिए एकजुट होती है, तो वह एक अपराजेय ताकत बन जाती है। कुछ लोगों का मानना हो सकता है कि राजनीति में रुचि लेने से विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो सकती है। लेकिन यह धारणा पूरी तरह उचित नहीं है। राजनीति की जानकारी प्राप्त करना शिक्षा में बाधा नहीं, बल्कि व्यक्तित्व के सर्वांगीण विकास का माध्यम है। इससे युवाओं को समाज और दुनिया को बेहतर ढंग से समझने, जीवन की कठिन परिस्थितियों का सामना करने और देश के प्रति अपने कर्तव्यों को पहचानने में सहायता मिलती है। राजनीति में सक्रिय रूप से शामिल होना हर युवा के लिए जरूरी नहीं है, लेकिन राजनीतिक रूप से जागरूक होना प्रत्येक नागरिक के लिए महत्वपूर्ण है। इतिहास इस बात का साक्षी है कि सामाजिक और राजनीतिक परिवर्तन लाने में युवाओं ने हमेशा अग्रणी भूमिका निभाई है। मार्टिन लूथर किंग जूनियर और शहीद भगत सिंह जी जैसे महान व्यक्तित्वों ने अपनी युवावस्था में ही सामाजिक एवं राजनीतिक बदलाव की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
यदि उस दौर के युवाओं ने अन्याय के विरुद्ध आवाज न उठाई होती, तो शायद उनके देशों का इतिहास कुछ और होता। अंतत: यह समझना आवश्यक है कि युवा ही किसी देश का वर्तमान और भविष्य दोनों हैं। उन्हें देश की नीतियों, राजनीतिक मुद्दों और सामाजिक चुनौतियों के प्रति जागरूक रहना चाहिए। राजनीति से दूरी बनाकर, वास्तविक परिस्थितियों की अनदेखी करके और देश में चल रही घटनाओं के प्रति आंखें मूंदकर हम अपने ही राष्ट्र के भविष्य के साथ अन्याय कर रहे हैं। इसलिए आवश्यकता इस बात की नहीं है कि युवा राजनीति से दूर रहें, बल्कि आवश्यकता इस राजनीति से दूरी की नहीं, युवाओं की सक्रिय भागीदारी की है। समय की मांग है कि युवा देश हित में स्वच्छ, जागरूक, जिम्मेदार और सकारात्मक राजनीति के समर्थक बनें। पूरी दुनिया में युवा अपने अपने देश में राजनीतिक भागीदारी के लिए संघर्ष कर रहे हंै क्योंकि जागरूक युवा ही सशक्त लोकतंत्र और समृद्ध राष्ट्र की नींव रख सकते हैं।-डा. वरिंद्र भाटिया




