महाराष्ट्र

वडोदरा के छात्रों का ऐतिहासिक शोध, रत्नागिरी के समुद्र से ढूंढा ऐसा बैक्टीरिया, जो खुद पैदा करता है रोशनी

वडोदरा : गुजरात के वडोदरा की महाराजा सयाजीराव यूनिवर्सिटी (एमएसयू) के तहत आने वाले एम.के. अमीन कॉलेज, पादरा के दो छात्रों ने विज्ञान के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। बीएससी माइक्रोबायोलॉजी के स्टूडेंट अर्णव ढमढेरे और हरिओम पाठक ने समुद्र के पानी से एक ऐसे बैक्टीरिया की खोज की है जो अंधेरे में रोशनी पैदा करता है। इन्हें बायोल्युमिनिसेंट बैक्टीरिया कहा जाता है और इनकी यह खोज एकेडमिक और साइंस जगत में चर्चा का विषय बनी हुई है। अर्णव और हरिओम ने अपनी रिसर्च से न सिर्फ अपने कॉलेज, बल्कि पूरे वडोदरा को गौरवान्वित किया है, साथ ही युवा छात्रों को भी प्रेरित किया है।

अमीन कॉलेज के विद्यार्थी अर्णव ढमढेरे ने बताया कि हर्बल साइंस के ओपन हाउस में स्कूल के छात्रों को बुलाया जाता है। बायोल्युमिनिसेंट बैक्टीरिया को आइसोलेट करने का हमारा प्राइमरी उद्देश्य कुछ अलग करके दिखाने का था।

ऐसे खोजा रोशनी वाला बैक्टीरिया

पढ़ाई के दौरान हमें पता चला कि बायोल्युमिनिसेंट बैक्टीरिया की वजह से रात को समुद्र चमकता है। इस बैक्टीरिया की खोज करने की यही वजह है। अर्णव ने बताया कि हरिओम समुद्र के पानी को ले आया। हमें बायोल्युमिनिसेंट बैक्टीरिया मिले हैं। यह बैक्टीरिया काफी काम का है।

खारे पानी में रहता है जिंदा

अमीन कॉलेज के विद्यार्थी हरिओम पाठक ने बताया कि बीते एक वर्ष से इस पर काम कर रहे हैं। इस बैक्टीरिया के खोज की हमारी कोशिश थी। हमें रिफाइन और पहचान करने के लिए एक वर्ष का समय लगा। बायोल्युमिनिसेंट बैक्टीरिया खारे पानी में जिंदा रहता है। इस बैक्टीरिया को पहचानने में छह महीने का समय लगा। छोटी-छोटी समस्याओं की वजह से हमको इसकी पहचान करने में ज्यादा वक्त लगा।

लिक्विड बनाने का करेंगे काम

प्रोफेसर ने बताया कि हमने विद्यार्थियों को पूरी तरह से सपोर्ट किया है। रिसर्च के लिए उनको जिस भी चीज की आवश्यकता हुई, हमने उपलब्ध कराए। बायोल्युमिनिसेंट बैक्टीरिया लिक्विड बनाने के काम आएंगे। इसके लिए हम भी कोशिश करने वाले हैं। कहीं-कही टेस्टिंग या डायग्नोसिस के लिए भी इसका यूज कर रहे हैं। हमारी भी कोशिश रहेगी इसको करने की।

महाराष्ट्र के रत्नागिरी इलाके में लिए सैंपल

प्रोफेसर देवर्षि गज्जर और डॉ. प्रिया मिश्रा के मार्गदर्शन में हुई इस रिसर्च में इन छात्रों ने महाराष्ट्र के रत्नागिरी क्षेत्र से समुद्री जल के नमूने जुटाए। उसके बाद इसमें मौजूद इस खास बैक्टीरिया का आइसोलेशन कर स्टडी की। करीब 11 महीनों की कड़ी मेहनत, प्रयोगशाला में सटीक प्रयोग और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ किए गए इस रिसर्च ने आखिरकार यह महत्वपूर्ण सफलता दिलाई।

बायोल्युमिनिसेंट बैक्टीरिया का उपयोग भविष्य में प्रदूषण की निगरानी, मेडिकल रिसर्च और बायोटेक्नोलॉजी के क्षेत्र में किया जा सकता है। फिलहाल, इनका पैथोलॉजिकल एनालिसिस जारी है, जिसके बाद इनके व्यापक उपयोग के नए रास्ते खुलने की उम्मीद है।

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