लेख

संविधान लागू करने के लिए 26 जनवरी की तारीख ही क्यों चुनी गई? दिलचस्प है किस्सा…

Republic Day 2026: 2 साल, 11 महीने और 17 दिनों तक लंबे संघर्ष और बहस के बाद 26 नवंबर 1949 को संविधान को अपना लिया गया. जब 26 जनवरी 1950 को संविधान लागू हुआ, तो भारत औपचारिक रूप से एक संप्रभु लोकतांत्रिक गणराज्य बन गया, जिसने स्वतंत्र भारत में संवैधानिक शासन की शुरुआत की. 1976 में 42वें संशोधन अधिनियम के जरिए ‘समाजवादी और धर्मनिरपेक्ष’ शब्द जोड़े गए. इसके बाद भारत ‘संप्रभु, समाजवादी और धर्मनिरपेक्ष’ लोकतांत्रिक गणराज्य बन गया. नए बनाए गए संविधान को भारत सरकार अधिनियम 1935 के स्थान पर लागू किया गया.

15 अगस्त 1947 को भारत आजाद तो हो गया था. लेकिन देश में कानून अंग्रेजों वाले ही चल रहे थे. हमारे पास अपनी सरकार थी मगर अपना संविधान नहीं था. इस कमी को दूर करने के लिए संविधान सभा बनी. करीब 3 साल बाद देश को अपना संविधान मिला. लेकिन क्या आपको पता है कि इसे लागू करने के लिए 26 जनवरी की तारीख ही क्यों चुनी गई. इसके पीछे 1930 के ‘पूर्ण स्वराज’ की एक ऐतिहासिक कहानी है. इसी दिन भारत ने अंग्रेजों के डोमिनियन स्टेटस को ठुकराया था. आज हम आपको बताएंगे कि कैसे भारत एक संवैधानिक गणतंत्र बना और इसका इतिहास क्या है.

1930 के पूर्ण स्वराज से जुड़ा है गहरा नाता
आजादी की लड़ाई में 26 जनवरी का दिन बहुत खास था. साल 1929 में पूर्ण स्वराज की मांग एक औपचारिक राजनीतिक लक्ष्य बन गई थी. इसके बाद 26 जनवरी 1930 को पूरे देश में पहली बार ‘पूर्ण स्वराज दिवस’ मनाया गया. भारतीयों ने कसम खाई थी कि वे अंग्रेजी हुकूमत को नहीं मानेंगे और पूरी आजादी लेंगे. यह स्वतंत्रता संग्राम का एक निर्णायक मोड़ था. इसी ऐतिहासिक दिन को याद रखने के लिए संविधान लागू करने की तारीख 26 जनवरी तय की गई. इसने आंदोलन के संघर्ष को गणतंत्र के ढांचे से जोड़ दिया.

बाबासाहेब के बिना संविधान पर उठते सवाल
संविधान बनाने की शुरुआत 9 दिसंबर 1946 को हुई थी. डॉ राजेंद्र प्रसाद को सभा का अध्यक्ष और बाबासाहेब अंबेडकर को ड्राफ्टिंग कमेटी का चेयरमैन बनाया गया. पूर्व कानून मंत्री सलमान खुर्शीद ने बताया था कि गांधीजी और नेहरू का मानना था कि बाबासाहेब के बिना संविधान अधूरा है. अगर वे नहीं होते तो लोग सवाल उठाते कि हमारी बात नहीं समझी गई. 2 साल 11 महीने और 17 दिन की कड़ी मेहनत के बाद यह तैयार हुआ. इसके लिए 11 सत्र आयोजित किए गए थे और मसौदे पर 114 दिन चर्चा हुई थी.

अंग्रेजों के 1935 एक्ट की जगह ली संविधान ने
26 नवंबर 1949 को संविधान अपना लिया गया था. लेकिन इसे लागू 26 जनवरी 1950 को किया गया. इसके साथ ही भारत सरकार अधिनियम 1935 खत्म हो गया. भारत औपचारिक रूप से एक संप्रभु लोकतांत्रिक गणराज्य बन गया. बाद में 1976 में 42वें संशोधन के जरिए इसमें ‘समाजवादी और धर्मनिरपेक्ष’ शब्द जोड़े गए. संविधान लागू होते ही लोकतांत्रिक संस्थाओं को पूरी ताकत और अधिकार मिल गए. यह एक नए युग की शुरुआत थी.

कर्तव्य पथ पर दुनिया देखती है भारत की ताकत
गणतंत्र दिवस पर नई दिल्ली के कर्तव्य पथ पर भव्य परेड होती है. यह दुनिया को भारत की सैन्य ताकत और सांस्कृतिक विरासत दिखाती है. दिन की शुरुआत पीएम द्वारा नेशनल वार मेमोरियल पर श्रद्धांजलि देने से होती है. राष्ट्रपति तिरंगा फहराते हैं और राष्ट्रगान के साथ 21 तोपों की सलामी दी जाती है. सेना, नेवी और एयरफोर्स के जवान कदमताल करते हुए अनुशासन की मिसाल पेश करते हैं. स्कूली बच्चे और झांकियां इस समारोह में रंग भर देते हैं.

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button