मध्यप्रदेश

सतपुड़ा से बांधवगढ़ पहुंचे 27 भारतीय गौर; 5 नर और 22 मादा गौरों की सफल शिफ्टिंग 

उमरिया: बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में भारतीय गौर की आबादी को बढ़ाने के लिए एक बड़ा काम पूरा हुआ है। सतपुड़ा टाइगर रिजर्व से 27 भारतीय गौरों को बांधवगढ़ लाया गया है। यह खास कार्यक्रम 22 जनवरी 2026 को शुरू हुआ और 26 जनवरी 2026 को खत्म हुआ। इस काम में 210 से ज़्यादा वन अधिकारी और कर्मचारी शामिल थे।

5 नर और 22 मादा गौर

यह गौरों को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने का काम बहुत ही सावधानी से किया गया। सतपुड़ा टाइगर रिजर्व से 5 नर और 22 मादा गौरों को खास गाड़ियों में बिठाकर बांधवगढ़ लाया गया। यह सफर 593 किलोमीटर का था। गाड़ियों में एक साथ 2 या 3 गौर होने की वजह से कभी-कभी थोड़ी मुश्किल भी हुई, लेकिन साथ चल रहे डॉक्टर और वन अधिकारी लगातार निगरानी करते रहे। हर गौर की जांच की गई और उन्हें पूरी तरह सुरक्षित बांधवगढ़ के कल्लवाह परिक्षेत्र में बने बाड़े में छोड़ा गया।

200 से ज्यादा कर्मचारी लगे

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर डॉक्टर अनुपम सहाय ने बताया कि यह एक बहुत बड़ा कार्यक्रम था। इसमें सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के 150 से ज़्यादा और बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के 60 से ज़्यादा अधिकारी और कर्मचारी लगे थे। साथ ही, पूरे प्रदेश के 9 से ज़्यादा जाने-माने वन्यजीव डॉक्टर भी इस काम में शामिल थे। इस पूरे अभियान का नेतृत्व सतपुड़ा टाइगर रिजर्व की फील्ड डायरेक्टर श्रीमती राखी नंदा ने किया। उन्होंने दिन-रात मेहनत करके इस कार्यक्रम को सफल बनाया।

1998 में विलुप्त हो गए थे गौर

वन्यजीव विशेषज्ञों, डॉक्टरों और वन विभाग के कर्मचारियों की टीम ने इस पूरे अभियान पर कड़ी नज़र रखी ताकि गौरों को कोई नुकसान न हो। सभी गौर अभी स्वस्थ हैं और नए माहौल में ढलने की कोशिश कर रहे हैं। इससे पहले भी बांधवगढ़ में गौरों को लाया गया है। साल 2010-11 में कान्हा से 50 गौर और फरवरी 2025 में सतपुड़ा से 22 गौर यहां लाए गए थे। साल 1998 में बांधवगढ़ से गौर विलुप्त हो गए थे, जिसके बाद से उन्हें फिर से बसाने का काम चल रहा है।

केंद्र और दूसरी संस्थाओं के साथ चला कार्यक्रम

यह गौरों को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने का कार्यक्रम भारत सरकार, मध्यप्रदेश वन विभाग, वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (WII) और दूसरी संस्थाओं के साथ मिलकर चलाया गया। इस प्रोजेक्ट का नाम था, ‘Population Management Strategies for Gaur: Supplementation of Gaur in Bandhavgarh Tiger Reserve , Madhya Pradesh’।

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