‘सस्ते दिनों’ का शुभारंभ

इसमें प्रधानमंत्री के राष्ट्र के नाम संबोधन का विषय क्या था? जिस दिन जीएसटी परिषद ने दरें घटाने का सर्वसम्मत निर्णय लिया था, उसके बाद ही देश को सांगोपांग जानकारी मिल गई थी कि जीएसटी सुधार लागू किए जाएंगे। प्रधानमंत्री मोदी ने स्वतंत्रता दिवस पर लालकिले की प्राचीर से भी राष्ट्र को संबोधित करते हुए दीपावली के ‘दोहरे तोहफे’ की बात कही थी। चूंकि शारदीय नवरात्रि से ‘सस्ते दिनों’ का आगाज हुआ है, लिहाजा जीएसटी सुधार लागू करने को शक्ति की उपासना के पर्व-दिवस से जोड़ दिया गया। यह प्रधानमंत्री के 20 मिनट के राष्ट्रीय संबोधन का विषय नहीं था। यदि इस संबोधन से जन-समर्थन जुगाडऩे की मंशा जुड़ी है, तो उस राजनीति के लिए प्रधानमंत्री को रोका नहीं जा सकता। जीएसटी पर राजनीति कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खडग़े ने भी की है, जब उन्होंने बयान दिया कि 8 सालों में 55 लाख करोड़ रुपए जीएसटी के रूप में वसूल लिए गए। अब बिल्ली हज करने चली है। बहरहाल राजनीति को छोड़ कर हम जीएसटी सुधारों की बात करते हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने इसे ‘बचत का उत्सव’ भी करार दिया है। इन सुधारों को देश की आत्मनिर्भरता और स्वदेशी संकल्प से भी जोड़ा है, लिहाजा ये आह्वान प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय संबोधन के लिए जरूरी महसूस किए होंगे! प्रधानमंत्री मोदी ने देश को भरोसा दिलाया है कि जीएसटी सुधार लागू होते ही, नवरात्रि के सूर्योदय के साथ ही, 375 से अधिक वस्तुएं सस्ती हो जाएंगी। करीब 99 फीसदी वस्तुएं या तो 5 फीसदी जीएसटी के दायरे में होंगी अथवा बिल्कुल ‘शून्य कर’ वाली होंगी। मसलन कैंसर समेत 33 जीवनरक्षक दवाओं को बिल्कुल ‘कर-मुक्त’ किया गया है। यकीनन इन ‘सस्ते दिनों’ से गरीब, मध्यम वर्ग, युवा, महिला, किसान, दुकानदार, व्यापारी, उद्यमी आदि को फायदा होगा। ‘क्रिसिल’ एजेंसी की ताजा रपट के मुताबिक, हर शहरी को हर माह औसतन 1819 रुपए और ग्रामीण को औसतन 1154 रुपए की बचत होगी। मासिक खर्च करीब 27 फीसदी तक घट सकता है। बेशक आम आदमी की जेब में पैसा होगा, तो उसकी क्रय-शक्ति और मांग में बढ़ोतरी होगी। मांग के साथ बाजार भी फलेगा-फूलेगा। बाजार में बढ़ोतरी होगी, तो कंपनियां और छोटे, कुटीर उद्योग भी अपने उत्पादन को गति देंगे।
उसे बढ़ाएंगे। उत्पादन बढ़ेंगे, ज्यादा कारोबार होगा, तो देश की अर्थव्यवस्था का भी विस्तार होगा। 2025-26 वित्त वर्ष के अंत तक भारत विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकेगा। इन संभावनाओं के साथ ही जीएसटी सुधारों की अग्नि-परीक्षा जुड़ी है। प्रधानमंत्री मोदी का आकलन है कि इन सुधारों के लागू होने से देश के नागरिकों को 2.5 लाख करोड़ रुपए की बचत होगी, लिहाजा यह ‘बचत का उत्सव’ भी है। जीएसटी सुधारों के संदर्भ में सबसे अहम और बुनियादी सवाल यह है कि क्या खुदरा बाजार के स्तर पर आम ग्राहक को घटी दरों पर सामान मिलेगा? पुरानी एमआरपी वाली वस्तुएं भी क्या घटी दरों पर उपलब्ध होंगी? फिलहाल सरकार ने आश्वस्त किया है कि दुकानदार घटी दरों पर ही सामान बेचेंगे। जीएसटी रिटर्न फाइल करते समय दुकानदार इसे एडजस्ट कर सकते हैं। सवाल यह भी है कि क्या इन सुधारों को पूरी तरह लागू करने में केंद्र और राज्य सरकारों का परस्पर सहयोग संभव होगा, क्योंकि कई राज्यों में विपक्ष की सरकारें हैं? राज्य इन सुधारों को लागू जरूर करेंगे, लेकिन उन्होंने कहना शुरू कर दिया है कि दरें घटाने से उन्हें करीब 48,000 करोड़ रुपए का नुकसान होगा, लिहाजा केंद्र इसकी भरपाई की शुरुआत अभी से करे। विरोधाभास है कि आटा, चावल, गेहूं, दालें, ताजा सब्जियां, फल, दूध, दही, छाछ, अंडे, नमक, प्राकृतिक शहद और पेयजल (पैक्ड छोड़ कर) आदि के दामों पर कोई असर नहीं होगा। इनके अलावा, सोना-चांदी, पेट्रोल-डीजल, सिलेंडर, स्मार्ट फोन-लैपटॉप आदि पर जीएसटी पूर्ववत ही रहेगा। इनमें से कई वस्तुएं हमारी रोजमर्रा की जरूरतों की हैं। उन्हें सस्ता क्यों नहीं किया गया है? बहरहाल, विलासिता वाली वस्तुओं पर 40 फीसदी जीएसटी लगाना एक सही फैसला है।




