31 मई तक 10 लाख जल संरचनाओं का लक्ष्य-विष्णुदेव साय

रायपुर: शुक्रवार को नवा रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में आयोजित बैठक में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल वर्चुअली शामिल हुए और बैठक को संबोधित किया. बैठक में जल संचय-जन भागीदारी 2.0 अभियान के क्रियान्वयन की समीक्षा की गई. इस दौरान बिलासपुर, दुर्ग और सूरजपुर जिले के कलेक्टर ने अपने अपने जिलों में जल संचय-जन भागीदारी 2.0 अभियान के अंतर्गत होने वाले कार्यों और गतिविधियों के बारे में बताया.
पानी का उपयोग प्रसाद की तरह हो
सीएम साय ने कहा 21वीं सदी में जल संकट सिर्फ पर्यावरणीय नहीं बल्कि आर्थिक, सामाजिक और विकासात्मक चुनौती भी बन चुका है. जल संरक्षण को स्थायी और प्रभावी बनाने के लिए जनभागीदारी अनिवार्य है. सीएम साय ने पीएम मोदी के उस संदेश का उल्लेख किया, जिसमें पानी के उपयोग को प्रसाद के समान मानते हुए जल के प्रति संवेदनशील और जिम्मेदार दृष्टिकोण अपनाने पर जोर दिया गया है.
विष्णुदेव साय ने आगे कहा कि अभियान के पहले चरण में छत्तीसगढ़ ने देशभर में दूसरा स्थान हासिल किया है. विभिन्न जिलों को भी अलग-अलग श्रेणियों में पुरस्कार मिले. पहले चरण में सामुदायिक भागीदारी के मॉडल पर कार्य करते हुए बड़े पैमाने पर बोरवेल रिचार्ज, रूफटॉप रेनवॉटर हार्वेस्टिंग, रिचार्ज शाफ्ट, सोक पिट और ओपनवेल रिचार्ज जैसी संरचनाओं का निर्माण किया गया.
साय ने कहा कि प्रदेश में वर्तमान में 5 क्रिटिकल और 21 सेमी-क्रिटिकल भू-जल ब्लॉक चिन्हित हैं. वर्ष 2024 की तुलना में 2025 में इनमें से 5 ब्लॉकों में भू-जल निकासी में कमी और भू-जल स्तर में सुधार दर्ज किया गया है, जो जल संरक्षण प्रयासों के सकारात्मक परिणामों का संकेत है.
31 मई तक 10 लाख जल संरचनाओं का लक्ष्य
मुख्यमंत्री ने कहा कि अभियान के दूसरे चरण “जल संचय-जन भागीदारी 2.0” के अंतर्गत तकनीक आधारित और ज्यादा परिणाममूलक रणनीति अपनाई जा रही है. राज्य सरकार ने 31 मई 2026 तक 10 लाख जल संरक्षण संरचनाओं के निर्माण का लक्ष्य निर्धारित किया है. सीएम ने इसे जल सुरक्षा की दिशा में प्रदेश का ऐतिहासिक कदम बताया.
जल संचय के लिए किसानों को किया जा रहा प्रोत्साहित
उन्होंने कहा कि राज्य के रजत जयंती वर्ष के अवसर पर एक विशेष पहल के तहत 10 एकड़ से ज्यादा भूमि वाले चार लाख से अधिक किसानों को अपने खेतों में डबरी निर्माण के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है. इस कार्य में जिला प्रशासन के साथ-साथ औद्योगिक समूहों का सहयोग भी लिया जा रहा है. इन डबरियों से भू-जल स्तर में वृद्धि के साथ किसानों को सिंचाई एवं मछली पालन जैसी अतिरिक्त सुविधाएँ मिलेंगी.
गांव के युवा बनेंगे ‘जल मित्र’
सीएम ने आगे कहा दूसरे चरण में सभी जल संरचनाओं की जियोटैगिंग, ग्राम पंचायतों के वॉटर बजट और जल सुरक्षा योजनाओं के निर्माण पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा. साथ ही गांवों के युवाओं को “जल मित्र” के रूप में प्रशिक्षित किया जाएगा, ताकि अभियान को गति मिल सके. क्रिटिकल और सेमी-क्रिटिकल ब्लॉकों पर विशेष फोकस रखते हुए सेमी-क्रिटिकल ब्लॉकों में 40 प्रतिशत और क्रिटिकल ब्लॉकों में 65 प्रतिशत जल संरक्षण कार्यों का लक्ष्य निर्धारित किया गया है. उन्होंने प्रदेशवासियों से जल संरक्षण को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाने, जल संरचनाओं की रक्षा करने और जल के प्रति जिम्मेदार सोच अपनाने का आह्वान भी किया.
केंद्रीय मंत्री ने छत्तीसगढ़ के जल संरक्षण कार्यों की तारीफ की
केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने छत्तीसगढ़ में जल संरक्षण के क्षेत्र में हो रहे कार्यों और नवाचारों की सराहना की. उन्होंने कहा कि गत वर्ष जल संरक्षण के प्रयासों में छत्तीसगढ़ देशभर में दूसरे स्थान पर रहा, जो राज्य के लिए गौरव का विषय है. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सितंबर 2024 को सूरत से ‘जल संचय जन भागीदारी अभियान’ की शुरुआत की थी और ‘कर्मभूमि से मातृभूमि के लिए जल संचयन में सहयोग’ का आह्वान किया था.इस अभियान का उद्देश्य जल संरक्षण को जनआंदोलन का रूप देना है.
केंद्रीय मंत्री ने प्रदेश के सभी कलेक्टर से मनरेगा के तहत जल संचय कार्यों के लिए प्राप्त राशि का पूर्ण और प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करने को कहा. उन्होंने राजनांदगांव प्रवास के दौरान एक महिला सरपंच द्वारा स्वयं के प्रयासों से जल संचयन के लिए किए गए उल्लेखनीय कार्यों की प्रशंसा की. इसके साथ ही उन्होंने जल संचय में व्यापक जनभागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया.




