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70 से अधिक देशों ने घोषणापत्र पर किए हस्ताक्षर, आज सम्मेलन के औपचारिक समापन पर होगा जारी

एआई इम्पैक्ट समिट के मंच से अमेरिका ने वैश्विक एआई साझेदारियों को मजबूत करने और अपनी एआई तकनीकों के निर्यात को बढ़ाने की बड़ी रणनीति पेश की है। अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व माइकल क्रैट्सियोस ने किया, जो व्हाइट हाउस के साइंस एंड टेक्नोलॉजी पॉलिसी विभाग के निदेशक हैं। उनके साथ जैकब हेलबर्ग, विलियम किमिट और सर्जियो गोर भी मौजूद रहे।

केंद्रीय सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में अहम भूमिका निभाने वाले सभी प्रमुख देशों ने इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट-2026 के साझा घोषणापत्र पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। वैष्णव ने कहा, 70 से अधिक देश पहले ही घोषणापत्र पर हस्ताक्षर कर चुके हैं और यह संख्या 80 के पार जाने की उम्मीद है। उन्होंने कहा, दुनिया भारत को सेमीकंडक्टर क्षेत्र में विश्वसनीय भागीदार मानती है।

वैष्णव ने शिखर सम्मेलन में मीडिया से कहा, पिछले शिखर सम्मेलन के घोषणापत्र पर लगभग 60 देशों ने हस्ताक्षर किए थे। हम पहले ही 70 का आंकड़ा पार कर चुके हैं। उन्होंने कहा, कई विदेश मंत्री इस पर भारत सरकार के साथ चर्चा कर रहे हैं और अंतिम संख्या और घोषणापत्र की सामग्री पारदर्शी रूप से शनिवार को साझा की जाएगी। शिखर सम्मेलन को बड़ी सफलता बताते हुए उन्होंने कहा, एआई प्रदर्शनी में 5 लाख से अधिक आगंतुकों ने भाग लिया। इस आयोजन में बुनियादी ढांचे से संबंधित 250 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक के निवेश की प्रतिबद्धता देखी गई।

वैष्णव ने कहा, दुनिया सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला के लिए भारत को विश्वसनीय भागीदार के रूप में देखती है, और सेमीकंडक्टर देश में प्रमुख क्षेत्र के रूप में उभरेगा। एआई में होने वाला नवाचार भी सेमीकंडक्टर क्षेत्र को लाभ पहुंचाएगा। वैष्णव अमेरिका के साथ पैक्स सिलिका समझौते के बारे में एक सवाल का जवाब दे रहे थे।

नवाचार क्षेत्र में कम होगी लागत
नवाचार के क्षेत्र में लागत में कटौती को लेकर हो रही चर्चा पर वैष्णव ने विनिर्माण खर्चों को कम करने के उद्देश्य से चल रहे नवाचारों की ओर इशारा किया। उन्होंने कहा, लोग बिजली की लागत को 50 प्रतिशत तक कम करने पर विचार कर रहे हैं। चिप की लागत में भी यही बदलाव आएगा। बहुत सारे नवाचार हो रहे हैं। तकनीकी प्रगति की इस लहर से भारत को काफी लाभ होगा, विशेष रूप से जब देश अपनी सेमीकंडक्टर क्षमताओं का निर्माण कर रहा है। हम अपने डिजाइन और सेमीकंडक्टर क्षेत्र की यात्रा ऐसे बिंदु से शुरू कर रहे हैं जहां हम एआई के बारे में ज्ञात सभी लाभों का उपयोग कर सकते हैं और नए युग के अनुसार अपने चिप्स के डिजाइन को अनुकूलित कर सकते हैं।

सेना ने एआई-संचालित कई रक्षा उपकरणों का किया प्रदर्शन, राजनाथ ने किया पवेलियन का दौरा
जलवायु विज्ञान और आपदा पूर्वानुमान प्रणाली से लेकर दुर्घटनाओं को रोकने के लिए चालक की थकान का पता लगाने वाले उपकरण तक, भारतीय सेना ने एआई इम्पैक्ट समिट में कई अनुप्रयोगों का प्रदर्शन किया। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को सेना के पवेलियन का दौरा किया। भारतीय नौसेना ने भी शिखर सम्मेलन प्रदर्शनी के हिस्से के रूप में एक पवेलियन लगाया है। सेना ने हॉल नंबर 4 में स्थित अपने पवेलियन में कई एआई-आधारित अनुप्रयोगों का प्रदर्शन किया है। रक्षा मंत्री सिंह ने सैन्य अधिकारियों के साथ बातचीत की, जिन्होंने उन्हें पवेलियन का दौरा कराया, जिसने युवा और बुजुर्ग दोनों तरह के आगंतुकों को आकर्षित किया है। रक्षा मंत्री ने सोशल मीडिया पर पोस्ट में कहा, आज भारत मंडपम में आयोजित एआई इम्पैक्ट समिट में भाग लेकर बेहद प्रसन्न हूं।

भारत एआई व उन्नत प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में तेजी से वैश्विक लीडर के रूप में उभर रहा है। यह शिखर सम्मेलन हमारे नवप्रवर्तकों, शोधकर्ताओं, स्टार्टअप्स, सशस्त्र बलों और उद्योग जगत के नेताओं की अपार प्रतिभा को प्रदर्शित करता है। राजनाथ ने आगे लिखा, पीएम मोदी की ओर से समिट में व्यक्त किया गया भारत का एआई विजन मानव मानवता को एक सुरक्षित और भविष्य के लिए तैयार दुनिया की ओर अग्रसर करता है।

मजबूत डाटा प्रबंधन, परिभाषित परिचालन सीमाएं और स्पष्ट जवाबदेही महत्वपूर्ण
एजेंटिक एआई पर गोलमेज सम्मेलन में वैश्विक तकनीकी उद्योग, नीति एवं कानूनी क्षेत्र और व्यापार- उद्योग व नीतिगत परिप्रेक्ष्य पर चर्चा में इस पर केंद्रित रही कि यह बदलाव किस तरह सुरक्षा, जवाबदेही, साइबर सुरक्षा और जनविश्वास को पुनर्परिभाषित कर रहा है। साथ ही, उत्पादकता और नवाचार के नए लाभों को भी उजागर कर रहा है। पहले पैनल ने भुगतान, क्लाउड इन्फ्रास्ट्रक्चर, साइबर सुरक्षा और इंटेलिजेंट प्रोडक्ट डिज़ाइन सहित विभिन्न क्षेत्रों से वास्तविक दुनिया के परिदृश्यों को प्रस्तुत किया। संयुक्त राज्य पेटेंट और ट्रेडमार्क कार्यालय (यूएसपीटीओ) के निदेशक ऑस्टिन मेयरोन ने जिम्मेदार नवाचार को सक्षम बनाने में मानकों पर आधारित सहयोग की भूमिका पर प्रकाश डाला।

एआई में आत्मनिर्भरता नहीं रणनीतिक साझेदारी जरूरी
असली एआई संप्रभुता का मतलब है – बेहतरीन तकनीक का इस्तेमाल करते हुए अपने देश के हितों को सुरक्षित रखना। उन्होंने कहा कि पूरी तकनीकी आत्मनिर्भरता के बजाय देशों को अमेरिका के साथ साझेदारी करनी चाहिए, ताकि वे जल्दी एआई अपना सकें और संवेदनशील डेटा अपने देश में रखते हुए उन्नत तकनीक का फायदा उठा सकें। यह बात व्हाइट हाउस के साइंस एंड टेक्नोलॉजी पॉलिसी विभाग के निदेशक माइकल क्रैट्सियोस ने कही। उन्होंने केंद्रीकृत अंतरराष्ट्रीय एआई नियामक ढांचे की आलोचना करते हुए राष्ट्रीय संप्रभुता आधारित मॉडल का समर्थन किया है।

एआई निर्यात बढ़ाने के लिए अमेरिकी पहल
नेशनल चैंपियन्स इनिशिएटिव के तहत पार्टनर देशों की एआई कंपनियों को अमेरिकी एआई स्टैक से जोड़ा जाएगा। यूएस टेक कॉर्प्स पहल के तहत तकनीकी विशेषज्ञों की तैनाती की जाएगी। एआई अपनाने में वित्तीय बाधाएं कम करने के लिए विश्व बैंक में नया फंड बनाया जाएगा। इनके अलावा, एक्सपोर्ट-इम्पोर्ट बैंक ऑफ युनाइटेड स्टेट्स, यूएस इंटरनेशनल डेवेलपमेंट फाइनेंस कॉरपोरेशन और स्मॉल बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन जैसी एजेंसियां भी सहयोग करेंगी।

हेल्थकेयर, शिक्षा, ऊर्जा और कृषि में एआई
क्रैट्सियोस ने कहा कि अमेरिका एआई इनोवेशन में लीडर है और वह साझेदार देशों को उनके तकनीकी भविष्य पर नियंत्रण बनाए रखते हुए एआई अपनाने में मदद करना चाहता है। उन्होंने कहा, हेल्थकेयर, शिक्षा, ऊर्जा, कृषि और सरकारी सेवाओं में एआई के इस्तेमाल को तेज करना जरूरी है।

सब लाेगों तक लाभ पहुंचाने में भारत-अमेरिका साझेदारी अहम
एआई के लाभ सभी तक और हर जगह पहुंचाने में अमेरिका-भारत साझेदारी की महत्वपूर्ण भूमिका है। भारत और अमेरिका की ओर से पैक्स सिलिका घोषणापत्र पर हस्ताक्षर से पहले गूगल और उसकी मूल कंपनी अल्फाबेट इंक के सीईओ सुंदर पिचाई ने कहा कि हाल ही में हुए अंतरिम व्यापार समझौते के साथ-साथ यह समझौता आने वाले कई वर्षों तक एक मजबूत अमेरिकी-भारतीय तकनीकी साझेदारी की नींव रखेगा। पिचाई ने बताया कि गूगल ने हाल ही में भारत-अमेरिका कनेक्ट इने शिएटिव की घोषणा की है, जिसके तहत अमेरिका और भारत को जोड़ने के लिए नए सब सी केबल रूट बनाए जाएंगे।

भारत की डिजिटल नीतियां वैश्विक एआई विकास का आधार
पिचाई ने कहा कि भारत एआई के क्षेत्र में दुनिया का नेतृत्व करने की क्षमता रखता है। भारत की डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना और सरकार की दूरदर्शी नीतियां वैश्विक विकास का आधार हैं। देश का डिजिटल मॉडल वैश्विक स्तर पर अनुकरणीय बन चुका है। आधार, यूपीआई और डिजीलॉकर जैसी पहलों ने करोड़ों लोगों को डिजिटल सेवाओं से जोड़ा है और यही मजबूत ढांचा एआई आधारित नवाचारों को तेज गति देने में सहायक बनेगा।

रोजगार और कौशल विकास पर जोर
पिचाई ने कहा, एआई से रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे और इसके लिए युवाओं को भविष्य के कौशल से लैस करना आवश्यक है। सरकार और निजी क्षेत्र को मिलकर स्किल डेवलपमेंट पर ध्यान देना होगा ताकि भारत की विशाल युवा आबादी एआई युग की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार हो सके।

सबको किफायती कंप्यूटिंग क्षमता उपलब्ध कराना लक्ष्य
भारत एक ऐसे मॉडल पर ध्यान केंद्रित कर रहा है जिसमें सरकार, परोपकारी संस्थाएं और निजी क्षेत्र मिलकर सबको किफायती कंप्यूटिंग क्षमताएं उपलब्ध कराना सुनिश्चित कर सकें। इसमें खासतौर पर परोपकारी संगठनों की भूमिका निर्णायक होगी, क्योंकि उनका ध्यान एआई के लाभ सर्वसुलभ बनाने पर केंद्रित है। सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय में सचिव डॉ. सौरभ गर्ग ने यह बात एआई इम्पैक्ट समिट में सार्वजनिक हित में एआई का निर्माण: कंप्यूटिंग संसाधनों तक समान पहुंच के लिए वित्तपोषण विषय पर आयोजित एक सत्र के दौरान कही। गर्ग ने कहा, हमारा ध्यान कंप्यूटिंग क्षमता के बंटवारे पर नहीं, बल्कि बुद्धिमत्तापूर्ण प्राथमिकता निर्धारण पर है। हमारा ध्यान कंप्यूटिंग क्षमता को एक सक्षम मंच बनाने पर केंद्रित रहेगा।

जनहितकारी लक्ष्यों को हासिल करने के लिए हो उपयोग
वैश्विक एआई बदलावों के बीच प्रगति का वास्तविक मापदंड सार्वजनिक उद्देश्यों के साथ इसका तालमेल होगा। मुख्य प्रश्न यह है कि क्या यह न्यायसंगत, समावेशी और जनहित के अनुरूप होगा। यही वर्तमान वैश्विक चर्चा का मुख्य विषय है। यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि संसाधनों का उपयोग स्वास्थ्य, शिक्षा और कृषि जैसे क्षेत्रों में जनहितकारी लक्ष्यों को हासिल करने के लिए हो। 

एआई कोलैबोरेटिव के सीईओ मार्टिन टिस्ने ने कहा, मुझे चिंता है कि दो साल में हम ऐसी स्थिति में पहुंच सकते हैं, जहां हम वैश्विक दक्षिण सहित कई देशों में कंप्यूटिंग क्षमता विकसित करने में सफल हो जाएं, लेकिन डाटा केंद्रों का उपयोग न हो।

पैट्रिक जे. मैकगवर्न फाउंडेशन के अध्यक्ष विलास धर ने नीति, पूंजी और व्यापक स्तर पर तैनाती को जोड़ने वाले नए संस्थागत तंत्रों की जरूरत पर बल देते हुए कहा कि पहुंच को केवल बाजार की ताकतों पर नहीं छोड़ा जा सकता।

डिजिटल निर्भरता से बचने के लिए स्वदेशी एआई जरूरी
भारत को विदेशी प्रणालियों पर निर्भर होकर डिजिटल उपनिवेश बनने से बचने के लिए अपनी खुद की बुनियादी एआई प्रौद्योगिकियां विकसित करनी होंगी। स्वदेशी एआई स्टार्टअप कंपनी सर्वम एआई के सह-संस्थापक विवेक राघवन ने कहा कि एआई एक ऐसी प्रौद्योगिकी है जिसका मानव जीवन के हर पहलू पर प्रभाव पड़ता है। इसे भारत जैसे देश को बुनियादी स्तर से समझना होगा। अन्यथा, हम इस महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकी के लिए दूसरे देशों पर निर्भर एक डिजिटल उपनिवेश बन जाएंगे। उन्होंने कहा कि यह एक ऐसी आधारभूत प्रौद्योगिकी है जो जीवन के हर पहलू को आकार देगी। इसलिए भारत के लिए इसे एकदम शुरू से विकसित करना कोई विकल्प नहीं एक बल्कि अनिवार्य जिम्मेदारी है।

भाषाई और सांस्कृतिक विविधता ही भारत की ताकत
भारत की ताकत उसकी भाषाई और सांस्कृतिक विविधता, बड़ी आबादी व अर्थव्यवस्था की मांग और लागत के प्रति जागरूक नवाचार में निहित है, जो किफायती एआई समाधान बनाने में मदद करती है। सर्वम, एआई एक स्वदेशी एआई मंच तैयार कर रहा है। इसमें भारतीय भाषाओं के लिए विशेष रूप से बनाए गए बोलचाल की पहचान और लिखावट से आवाज वाले मॉडल शामिल हैं। फिलैंथ्रोपी एशिया फाउंडेशन के सीईओ शॉन सियो ने उन्नत कंप्यूटिंग तक पहुंच बढ़ाने के लिए मांग एकत्रीकरण, रियायती पहुंच मॉडल को प्रमुख उपाय बताया।

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