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पीएम पोषण योजना के तहत तीन साल में 76.27 लाख मीट्रिक टन खाद्यान्न आवंटित

पीएम पोषण योजना के तहत देशभर में सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों के बच्चों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने के लिए पिछले तीन वर्षों में 75 लाख मीट्रिक टन से अधिक खाद्यान्न आवंटित किया गया है। केंद्र सरकार योजना के तहत खाद्यान्न, परिवहन लागत तथा प्रबंधन, निगरानी एवं मूल्यांकन (एमएमई) की लागत के लिए 100% सहायता देती है, जबकि बच्चों को ताजा और पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने की समग्र जिम्मेदारी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की है। शिक्षा राज्य मंत्री जयंत चौधरी ने सोमवार को लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी दी।

2023-24 में 26.81 लाख मीट्रिक टन आवंटन

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पीएम पोषण योजना के तहत वर्ष 2023-24 में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को कुल 26,81,575.28 मीट्रिक टन खाद्यान्न आवंटित किया गया। वर्ष 2024-25 में यह मात्रा घटकर 25,31,266.40 मीट्रिक टन और वर्ष 2025-26 में 24,15,007.25 मीट्रिक टन रही। तीन वर्षों में कुल आवंटन 76,27,848.93 मीट्रिक टन रहा।

उत्तर प्रदेश को सबसे अधिक खाद्यान्न

राज्यवार आंकड़ों में उत्तर प्रदेश को तीनों वर्षों में सबसे अधिक खाद्यान्न आवंटित किया गया। यूपी को 2023-24 में 3,46,423.21 मीट्रिक टन, 2024-25 में 3,09,093.88 मीट्रिक टन और 2025-26 में 2,97,399.06 मीट्रिक टन खाद्यान्न आवंटित हुआ। तीन वर्षों का कुल आवंटन 9,52,916.15 मीट्रिक टन रहा।

बिहार और पश्चिम बंगाल भी बड़े लाभार्थी

खाद्यान्न आवंटन के मामले में बिहार और पश्चिम बंगाल भी प्रमुख राज्यों में रहे। बिहार को 2023-24 में 3,11,304.40 मीट्रिक टन, 2024-25 में 3,24,227.06 मीट्रिक टन और 2025-26 में 3,01,148.29 मीट्रिक टन खाद्यान्न मिला। वहीं पश्चिम बंगाल को क्रमश: 2,92,433.20, 2,46,130.60 और 2,29,596.92 मीट्रिक टन खाद्यान्न आवंटित किया गया।

महाराष्ट्र, राजस्थान और मध्य प्रदेश को भी बड़ा आवंटन

महाराष्ट्र को तीन वर्षों में क्रमश: 2,62,489.28, 2,60,330.25 और 2,49,637.79 मीट्रिक टन खाद्यान्न आवंटित हुआ। राजस्थान को 1,71,793.46, 1,39,190.39 और 1,32,888.46 मीट्रिक टन तथा मध्य प्रदेश को 1,35,102.86, 1,25,971.57 और 1,30,864.22 मीट्रिक टन खाद्यान्न दिया गया।

एफसीआई की महत्वपूर्ण भूमिका

पीएम पोषण योजना के तहत खाद्यान्न भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के माध्यम से उपलब्ध कराया जाता है। एफसीआई की जिम्मेदारी अपने डिपो और उत्तर पूर्वी क्षेत्र में प्रधान वितरण केंद्रों पर पर्याप्त खाद्यान्न की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित करना है। निर्बाध आपूर्ति के लिए किसी माह या तिमाही के लिए एक माह पहले तक खाद्यान्न की ढुलाई की अनुमति दी जाती है।

गुणवत्ता की निगरानी के लिए व्यवस्था

एफसीआई योजना के तहत सर्वोत्तम उपलब्ध गुणवत्ता का खाद्यान्न जारी करता है, जो कम से कम उचित औसत गुणवत्ता (एफएक्यू) के मानकों के अनुरूप होना जरूरी है। प्रत्येक राज्य में खाद्यान्न आपूर्ति से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए एफसीआई ने नोडल अधिकारी नियुक्त किए हैं। जिला स्तर पर भी संयुक्त निरीक्षण के बाद खाद्यान्न जारी किए जाने की व्यवस्था है। भविष्य में किसी शिकायत की स्थिति में सत्यापन और विश्लेषण के लिए खाद्यान्न के नमूने सुरक्षित रखे जाते हैं।

यूपी में लाखों बच्चों तक पहुंचा पोषण कार्यक्रम

उत्तर प्रदेश के जिलावार आंकड़ों के अनुसार, योजना के तहत राज्य में 2023-24 में बड़ी संख्या में बच्चों को खाद्यान्न उपलब्ध कराया गया। लखीमपुर खीरी में 3,52,730, सीतापुर में 3,55,996, बहराइच में 2,96,075, प्रयागराज में 2,93,950 और हरदोई में 2,78,540 बच्चों का आंकड़ा दर्ज किया गया। इन जिलों में क्रमश: 10,001.737, 9,248.635, 7,143.958, 5,134.881 और 7,509.348 मीट्रिक टन खाद्यान्न वितरित किया गया।

2025-26 में सीतापुर में सबसे अधिक वितरण

वर्ष 2025-26 में सीतापुर में 3,37,066 बच्चों के लिए 9,861.088 मीट्रिक टन खाद्यान्न वितरित किया गया। लखीमपुर खीरी में 3,23,882 बच्चों के लिए 8,890.248 मीट्रिक टन और बहराइच में 3,05,547 बच्चों के लिए 7,491.588 मीट्रिक टन खाद्यान्न वितरित किया गया। प्रयागराज में 2,70,213 बच्चों के लिए 7,132.633 मीट्रिक टन तथा हरदोई में 2,65,771 बच्चों के लिए 7,053.725 मीट्रिक टन खाद्यान्न वितरित हुआ।

निगरानी के लिए बहुस्तरीय तंत्र

पीएम पोषण योजना में निगरानी के लिए केंद्र से लेकर जिला स्तर तक कई व्यवस्थाएं हैं। केंद्रीय शिक्षा मंत्री की अध्यक्षता में अधिकार प्राप्त समिति, सचिव स्तर पर कार्यक्रम अनुमोदन बोर्ड (पीएबी), मुख्य सचिव की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय संचालन-सह-निगरानी समिति और जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में जिला स्तरीय समिति इसके प्रमुख हिस्से हैं। दिशानिर्देशों में जिले के वरिष्ठतम सांसद की अध्यक्षता में समिति के जरिए त्रैमासिक निगरानी का भी प्रावधान है।

स्कूलों में सार्वजनिक की जाती है जानकारी

योजना में पारदर्शिता के लिए स्कूलों में पोषण संबंधी मानदंड प्रमुख स्थानों पर प्रदर्शित किए जाते हैं। इसके अलावा साप्ताहिक मेनू और उसमें इस्तेमाल सामग्री, प्राप्त और उपयोग किए गए खाद्यान्न की मात्रा, अन्य खरीदी और उपयोग की गई सामग्री, भोजन पाने वाले बच्चों की संख्या तथा कार्यक्रम में शामिल सामुदायिक सदस्यों की सूची भी साप्ताहिक या मासिक आधार पर प्रदर्शित की जाती है।

शिकायतों के निवारण के लिए टोल-फ्री सुविधा

राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने जन शिकायतों के निवारण के लिए समर्पित तंत्र और टोल-फ्री कॉल सुविधा विकसित की है। इन व्यवस्थाओं का व्यापक प्रचार किया जाता है, ताकि योजना से जुड़े लाभार्थी और अन्य लोग खाद्यान्न की गुणवत्ता, भोजन की उपलब्धता अथवा योजना के संचालन से जुड़ी शिकायतों को संबंधित अधिकारियों तक पहुंचा सकें।

बाल वाटिका से कक्षा 8 तक बच्चों को लाभ

पीएम पोषण योजना के तहत बाल वाटिका यानी कक्षा 1 से ठीक पहले के स्तर तथा सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त विद्यालयों की कक्षा 1 से 8 तक पढ़ने वाले बच्चों को ताजा और पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया जाता है। योजना का उद्देश्य बच्चों के पोषण स्तर में सुधार के साथ-साथ स्कूलों में उनकी नियमित उपस्थिति और शिक्षा में सहभागिता को बढ़ावा देना है। 

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