8 साल से ठप अंबानी की टेलीकॉम कंपनी, फिर भी एक्टिव 32 मोबाइल नंबरों को कौन कर रहा इस्तेमाल?

अनिल अंबानी की रिलायंस कम्युनिकेशंस की टेलीकॉम सेवाएं बंद हो गई हैं, लेकिन कंपनी के 32 मोबाइल कनेक्शंस अभी भी देश में एक्टिव हैं। जानकारी के अनुसार, इन्हें आम लोग उपयोग नहीं कर रहे। ये कनेक्शंस कंपनी के इंटरनल डेटा व अन्य कामों से जुड़े हो सकते हैं।
आपको रिलायंस कम्युनिकेशंस याद है? धीरूभाई अंबानी के छोटे बेटे अनिल अंबानी उस कंपनी को चलाते थे और एक वक्त में रिलायंस मोबाइल का देश में बोलबाला था। CDMA तकनीक पर मोबाइल सिम कार्ड बेचने वाली कंपनी अब बंद हो गई है। इसका कामकाज 8 साल ठप है। इसके बाद भी टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (ट्राई) के अगस्त 2026 के डेटा में देश में रिलायंस कम्युनिकेशंस के 32 मोबाइल कनेक्शन एक्टिव हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि जब कंपनी बंद हो गई तो इन 32 कनेक्शनों को कौन चला रहा है?
ट्राई का अगस्त 2026 का डेटा
ट्राई के अगस्त 2026 के डेटा में बताया गया है कि रिलायंस कम्युनिकेशंस के वायरलेस मोबाइल सब्सक्राइबर्स की संख्या देश में अगस्त महीने में 32 है। जुलाई में यह 119 थी यानी 87 कनेक्शंस बंद हो गए हैं। अभी सबसे ज्यादा 27 एक्टिव कनेक्शन मुंबई में हैं। 1 कनेक्शन केरल में, 1 पंजाब में और 2 राजस्थान में हैं।
कौन इस्तेमाल कर रहा 32 कनेक्शन
ट्राई के डेटा और अन्य जानकारियों से पता चलता है कि रिलायंस कम्युनिकेशंस के बचे हुए 32 कनेक्शनों को कोई आम मोबाइल उपभोक्ता यूज नहीं कर रहा। दरअसल, ट्राई के डेटा में इन कनेक्शनों का एक्टिव रेट 100% है। इसका मतलब है कि ये सभी कनेक्शन किन्हीं नेटवर्क्स से जुड़े हैं। अगर ये आम ग्राहकों के पास होते तो सभी नंबर एक्टिव नहीं होते। कुछ स्विच्ड ऑफ होते तो कुछ आउट ऑफ कवरेज मिलते। आसान भाषा में समझाएं तो ये कनेक्शन मशीन से सिस्टम से जुड़े स्थायी लिंक्स हो सकते हैं।
किस काम में उपयोग हो रहे कनेक्शन?
जानकारी के अनुसार, जब भी किसी टेलीकॉम कंपनी का नेटवर्क आम उपभोक्ताओं के लिए बंद हो जाता है, उसके बाद भी कुछ कनेक्शंस ऑटोमेटेड सिम स्लॉट में काम कर रहे होते हैं। ये पावर ग्रिड बैकअप और रिमोट सर्वर एक्सेस के लिए बेस स्टेशनों में उपयोग होते हैं। आंकड़े भी बताते हैं कि रिलायंस कम्युनिकेशंस के सबसे ज्यादा कनेक्शन मुंबई में एक्टिव हैं। मुंबई में ही कंपनी का प्रमुख कॉरपोरेट डेटा बेस और केबल स्टेशन है।
जानकारी के अनुसार, जब तक टेलीकॉम डिपार्टमेंट में कंपनी का लाइसेंस कानूनन बंद नहीं हो जाता, कंपनियां कुछ सिम नंबरों को टेस्टिंग के रूप में भी लाइव रखती हैं।
क्या हुआ रिलायंस कम्युनिकेशंस के साथ?
कर लो दुनिया मुट्ठी में टैगलाइन के साथ देश के टेलीकॉम मार्केट में हलचल मचाने वाले रिलायंस कम्युनिकेशंस ने 2000 के शुरुआती दशक में अच्छा यूजरबेस तैयार कर लिया था। उसने 501 रुपये के डाउनपेमेंट पर मोबाइल फोन देना शुरू किया था और 40 पैसे प्रति मिनट कॉल दर के साथ लोगों को आकर्षित किया था।
- कंपनी के सामने चुनौती आई GSM तकनीक के कारण। एयरटेल, हच और आइडिया जैसी कंपनियां GSM तकनीक वाले सिम बेचती थीं।
- CDMA तकनीक में ग्राहक एक ही कंपनी के साथ बंध जाता था। रिलायंस ने बाद में GSM पर स्विच किया, जिसमें भारी खर्चा हुआ।
- एयरसेल के साथ उसकी बात नहीं बन पाई। 2016 में जियाे के एंट्री करने से पूरी टेलीकॉम इंडस्ट्री पर दबाव आया और कहा जाता है कि रिलायंस कम्युनिकेशंस उस दबाव को झेल नहीं पाई।




