
इंसानों का दुनिया सिमटती जा रही है. मतलब की अब सभी मोबाइल में खोते जा रहे हैं. क्या नहीं है यहां- एक क्लिक पर खाना, सब्जी, कपड़े और एंटरटेनमेंट सब कुछ. मेट्रो सीटी से लेकर गांव तक के चौपाल तक मोबाइल से शॉर्ट रील की आवाजें आ रही हैं. बगल में क्या हो रहा है ये किसी को भी नहीं मालूम. सभी एक स्क्रीन और अनलिमिटेड डेटा में खोए हुए हैं. सोशल मीडिया पर कई ऐसे वीडियो देखने को मिल जाते हैं, जिसे देखने के बाद रूह कांप उठती है. ऐसा ही एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें एक दुकान में एक लड़की दूसरी लड़की का पैर पकड़कर कुछ खरीदने की गुहार लगा रही है.
दरअसल, एक छोटी सी दुकान में एक लड़की दुकानदार फूट-फूट कर रो रही है. वह ग्राहक के पैरों में गिरी हुई है. हाथ पकड़कर और चीखकर कहती है- ‘दो घंटे जुड़ें मुझे ये सब समेटने में!’ दरअसल, वीडियो में आपको कहानी का पूरा कॉन्टेक्स्ट नहीं मिलेगा. लेकिन, रोती हुई लड़की की एक लाइन ‘दीदी कुछ ले लो, इसे समेटने में मुझे 2 घंटे लगेंगे’ से सबकुछ क्लियर हो जाएगा. दरअसल, ग्राहक लड़की उस दुकान में कुछ खरिदने के लिए गई होगी, देर तक पसंद करती रही होगी, पसंद ना आने पर जाने लगी होगी. इसी पर वह लड़की कहने लगी कि दीदी कुछ ले लो. इस वीडियो को इंस्टाग्राम पर आईडी से अपलोड किया गया है. इसे 70 लाख से अधिक लोग देख चुके हैं.
कहानी का मर्म
यह उस इंसान की कहानी है जो दिन-रात मेहनत करके अपना घर चलाता है. घंटों तक सामान दिखाने के बाद जब ग्राहक बिना कुछ लिए सब कुछ बिखेर कर चला जाता है. वह केवल उसका सामान नहीं, बल्कि उस महिला की मेहनत, गरिमा और सहनशक्ति को भी कुचल देता है. उसकी आंखों से गिरता हर आंसू उस थकान और बेबसी की गवाही दे रहा है, जिसे हम अक्सर ‘सिर्फ एक ग्राहक’ बनकर अनदेखा कर देते हैं.
इस वीडियो पर हजारों लोगों ने कमेंट किया है. एक यूजर ने लिखा कि ‘यह सीन हमें याद दिलाता है कि हर काउंटर के पीछे एक इंसान होता है, मशीन नहीं. थोड़ी सी हमदर्दी में कुछ नहीं लगता, लेकिन यह किसी की इज़्ज़त बचा सकती है.’ एक दूसरे यूजर ने लिखा, ‘इंसानों में इज़्ज़त खत्म हो रही है. अपने फ़ोन पर स्क्रॉल करना ट्रेडिशनल शोरूम या रिटेल स्टोर में प्रोडक्ट्स को फिजिकली चेक करने के बराबर नहीं है. प्रोडक्ट्स को मैनेज और डिस्प्ले करने में बहुत कुछ लगता है. अगर आप सच्चे खरीदार हैं और सिर्फ़ एक फ्लायर नहीं हैं. उस महिला को कम से कम उस दुकानदार के समय के लिए कुछ छोटा खरीदना चाहिए था.’
हीं, तीसरे यूजर ने कहा, ‘अगर मैं किसी दुकान में जा रहा हूं, तो प्लीज़ सोच-समझकर शॉपिंग करें. मुझे पता है कि मुझे क्या चाहिए, मैं नहीं चाहता कि स्टाफ़ की मेहनत बेकार जाए.’ एक चौथे ने कहा, ‘उन लोगों की इज्जत जो करो, पैकिंग मत खोलो, मैं ऊपर से देखकर पसंद कर लो.’ एक अन्य ने लिखा, मुझे तो 2-3 कपड़े दिखाने के बाद अगर पसंद नहीं आया तो खुद मना कर देता हूं’ एक और अन्य ने लिखा, ‘रोती हुई लड़की कहती है 2 घंटे लगेंगे ये समेटने में… पूरा मामला समझने के लिए काफी है.’




