भारत ने अपने कृषि और डेयरी सेक्टर पर लगाया ‘सुरक्षा कवच’, US को नहीं दी ढील

ब्यूरो — नई दिल्ली, भारत और अमरीका के बीच हुई ट्रेड डील के स्ट्रक्चर को अंतिम रूप दे दिया गया है। अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उस पर साइन भी कर दिए हैं। इसके बाद शनिवार को केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस डील की प्रमुख बातों को बताया। उन्होंने बताया कि भारतीय कृषि उत्पाद अमरीका में जीरो टैरिफ पर निर्यात किए जाएंगे, जबकि अमरीका के कृषि उत्पादों को भारत में कोई टैरिफ छूट नहीं दी गई है। उन्होंने कहा कि यह व्यापार समझौता निर्यात को बढ़ावा देने वाला साबित होगा। खासतौर पर टैरिफ रेट 18 फीसदी हो जाने का खासा फायदा भारत को मिलेगा। पीयूष गोयल ने साफ किया कि इस समझौते में जेनेटिकली मॉडिफाइड फूड को भारत में प्रवेश की अनुमति नहीं मिली है। उन्होंने कहा कि यह समझौता भारतीय निर्यातकों के लिए 30 अरब डॉलर के अमरीकी बाजार को खोलेगा। बता दें कि भारत और अमरीका ने शुक्रवार देर रात अंतरिम व्यापार समझौते का फ्रेमवर्क जारी किया है। इसके तहत भारतीय सामान पर अमरीका का टैक्स 50 फीसदी घटाकर 18 फीसदी कर दिया गया है। रूस से तेल खरीदने को लेकर भारत पर लगाया गया 25 फीसदी अतिरिक्त टैक्स भी हटा लिया गया है।
इस पर श्री गोयल ने कहा कि 50 फीसदी का टैरिफ घटकर 18 फीसदी पर आ चुका है। यह हमारे पड़ोसी देशों की तुलना में बहुत कम है। इससे हमारे निर्यातकों को काफी फायदा मिलेगा। इस डील के बाद भारत के सामानों पर अमरीका एक्सपोर्ट करने पर अधिकतम 18 फीसदी ही टैरिफ लगेगा। वहीं ट्रेड डील के तहत कई चीजों को टैरिफ से मुक्त भी रखा है। पीयूष गोयल ने किसानों के हितों को सबसे ऊपर रखते हुए कहा कि इस समझौते से भारतीय कृषि उत्पादों को अमरीकी बाजार में बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के प्रवेश मिलेगा, जबकि अमरीका के कृषि उत्पादों को भारत में कोई टैरिफ छूट नहीं दी गई है। साथ ही, यह भी सुनिश्चित किया गया है कि इससे देश के किसानों को कोई नुकसान न हो। श्री गोयल ने अमरीका के साथ अंतरिम व्यापार समझौते को ‘विकसित भारत 2047’ की दिशा में महत्त्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा कि इसमें देश के किसानों के हितों के साथ कोई समझौता नहीं किया गया है। इससे 30 अरब डॉलर का अमरीकी बाजार भारतीय निर्यातकों के लिए खुलेगा। उन्होंने कहा कि कुछ किसान विरोधी लोग यह दुष्प्रचार कर रहे हैं कि इससे भारतीय किसानों को नुकसान होगा। उन्होंने कहा कि हमने इस समझौते में कोई ऐसा काम नहीं किया है जिसमें देश के किसानों, हस्तशिल्प और हथकरघा को कोई नुकसान पहुंचे। श्री गोयल ने कहा कि यह समझौता किसानों, एमएसएमई, हस्तशिल्प और हथकरघा के हितों को किसी भी तरह से नुकसान नहीं पहुंचाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि भारत ने अल्कोहल युक्त पेय पदार्थ, सौंदर्य प्रसाधन और चिकित्सा उपकरणों जैसे क्षेत्रों में अमरीका को शुल्क रियायतें दी हैं। व्यापार समझौते के तहत भारत को कुछ वाहनों और विमानों के कलपुर्जों पर भी अमरीका में शून्य जवाबी शुल्क का लाभ मिलेगा।
डेयरी प्रोडक्ट सेफ
डेयरी प्रोडक्ट जैसे दूध (तरल, पाउडर, कैंडीड आदि), पनीर(मोजेरेला, ब्लू वेन्ड, कसा हुआ/पाउडर आदि), क्रीम, मक्खन तेल, दही, पनीर और अन्य उत्पाद, छाछ, म_ा उत्पाद आदि, मक्खन और घी पूरी तरह सेफ रखे गए हैं।
अनाज-दलहन की सुरक्षा
अनाज में रागी, गेहूं, कोपरा, समाक, मक्का, बाजरा, चावल, जौ, जई, ज्वार, महीन आटा, और आटा (गेहूं, मक्का, चावल, बाजरा आदि) के आयात पर पूर्ण प्रतिबंध
सब्जियों के आयात पर रोक
फ्रोजन सब्जियां जैसे आलू, मटर, खीरा और गुरकिन। इसके अलावा बीन्स, अन्य फलियां (छिलके वाली या बिना छिलके वाली), अस्थायी रूप से संरक्षित सब्जियां जैसे खीरा और मशरूम और मिश्रित डिब्बाबंद सब्जियां। इन सब का आयात नहीं हो सकेगा।
मसालों का संरक्षण
काली मिर्च, लंबी, सूखी हरी मिर्च, दालचीनी (छाल, फूल आदि), धनिया, जीरा, हींग, अदरक, हल्दी, अजवाइन, मेथी, कैसिया, सरसों, राई, भूसी और अन्य पिसे हुए मसालों को पूर्ण सुरक्षा दी गई।
मेक इन इंडिया होगा मजबूत, बड़े पैमाने पर पैदा होगा रोजगार
नई दिल्ली। भारत और अमरीका के बीच हुए व्यापार समझौते को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुशी जाहिर करते हुए अमरीका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को धन्यवाद दिया है। उन्होंने कहा कि दोनों महान देशों के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा पर सहमति बन गई है। मैं दोनों देशों के बीच मजबूत संबंधों के प्रति अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की व्यक्तिगत प्रतिबद्धता के लिए उन्हें धन्यवाद देता हूं। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यह फ्रेमवर्क हमारी साझेदारी की बढ़ती गहराई, विश्वास और गतिशीलता को दिखाता है। उन्होंने कहा कि भारत-अमरीका व्यापार समझौता हमारे किसानों, उद्यमियों, लघु एवं मध्यम उद्यमों, स्टार्टअप और मछुआरों को नए अवसर प्रदान करके ‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा देगा। इससे महिलाओं और युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार पैदा होगा। साथ ही उन्होंने कहा कि यह फ्रेमवर्क मजबूत और भरोसेमंद सप्लाई चेन को भी मजबूत करेगा और वैश्विक विकास में योगदान देगा।




