प्राचीन काल का खुला राज, हाथ लगा 2000 साल पुराना सबूत!

आज के वक्त में हमारे पास एलोपैथिक और होमियोपैथिक दवाओं का विकल्प है, इसके साथ अन्य तरह की भी पद्धतियां शामिल हैं. पर सोचिए कि गुजरे हुए साल में लोगों का क्या होता होगा. हाल ही में एक शोध हुआ जिससे पुराने समय से जुड़ी हैरान करने वाली चीज पता चली. वैज्ञानिकों ने पाया कि पुराने वक्त में बीमारी को ठीक करने के लिए लोग इंसानी मल का प्रयोग करते थे. प्राचीन काल से जुड़े इस राज का खुलासा हुआ तो हर कोई चौंक गया. वैज्ञानिकों के हाथ 2000 साल पुराना सबूत लगा है.
डेली स्टार की रिपोर्ट के अनुसार एक 2000 साल पुराने ग्लास वायल की जब जांच की गई तो उसमें पुराने वक्त के इंसानी मल के सबूत मिले. इससे ये नतीजा निकाला गया कि उस दौर में मेडिकल टूलकिट का हिस्सा इंसानी मल भी रहा होगा. माना जा रहा है कि गुजरे साल में रोमन लोग इंफेक्शन और इंफ्लेमेशन का ट्रीटमेंट उसी के जरिए किया करते थे. इस प्रैक्टिस का जिक्र प्राचीन मिस्र, चीन और ग्रीस में मिले लेखों में भी हुआ है. अब जो लेटेस्ट स्टडी हुई है, वो ऐसा सबूत है जो पहली बार हाथ लगा है और ये दावा करता है कि पुराने लोग मल को दवा की तरह इस्तेमाल करते थे.
2000 साल पहले मल को दवा की तरह इस्तेमाल करते थे लोग!
रिपोर्ट के अनुसार वैज्ञानिकों को एक वायल में से ब्राउन फ्लेक्स मिले हैं जो असल में इंसानी मल हैं. उसके साथ उन्हें थायम भी मिला है. ये पुदीने की तरह एक ज़ड़ीबूटी है जिसे महक बदलने के लिए उसमें डाला जाता होगा. ये वायल, तुर्की में पाए जाने वाले एक प्राचीन शहर, पर्गामोन के एक मकबरे से मिली है. इस शहर को दूसरी सदी में रोमन राजा ट्राजन ने फिर से रीडिज़ाइन किया था. यह शहर फेमस चिकित्सक गैलेन ऑफ़ पर्गामोन का भी निवास स्थान था, जिन्हें हिप्पोक्रेट्स के साथ प्राचीन काल के सबसे प्रसिद्ध चिकित्सकों में गिना जाता है.
तुर्की की सिवास कुम्हुरियत यूनिवर्सिटी के प्रमुख लेखक डॉ. सेंकर अतिला ने कहा- “ग्रीको-रोमन चिकित्सा से जुड़ी किताबों में मल-आधारित औषधीय उपचारों का डीटेल में डिस्क्रिप्शन मिलता है.” इन लेखों के आधार पर पाया गया है कि प्राचीन मिस्र, चीन, ग्रीक और रोमन लोग मल का प्रयोग उपचार के लिए कर रहे थे. हालांकि, अभी तक इसको लेकर कोई पुख्ता सबूत नहीं था. उस वायल के अंदर मौजूद पदार्थों में मल से जुड़े सबूत मिले हैं. “साथ ही कार्वाक्रोल जैसे सुगंधित पदार्थ भी मिले, जो थाइम तेल का प्रमुख इंग्रीडियंट है. ये नतीजे उन नुस्खों से मेल खाते हैं, जिनमें रोगियों की सहमति बढ़ाने के लिए मल के साथ दुर्गंध छिपाने वाले पदार्थ मिलाए जाते थे.” टीम अब तुर्की में अन्य ऐसे वायल्स की खोज में है जिससे उन्हें कुछ और सबूत मिल सकते हैं.




