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भाई से मिला तोहफा बेच लगाया ठेला, मां के हुनर का किया इस्‍तेमाल, अब 18 साल के लड़के की बंपर कमाई

नई दिल्‍ली: यह कहानी 18 साल के हनी खान की है। वह लखनऊ के रहने वाले हैं। उनकी अब एक अलग पहचान बन गई है। लखनऊ यूनिवर्सिटी के बाहर वह इडली और मेंडू वड़ा बेचते हैं। इसकी शुरुआत उन्‍होंने पिछले साल सितंबर से की थी। भाई से गिफ्ट में मिले प्‍लेस्‍टेशन (PS) को 14,000 रुपये में बेचकर उन्‍होंने ‘इडली स्ट्रीट’ नाम का स्‍टॉल शुरू किया था। हनी की मां रजिया का हुनर इसमें बहुत काम आया। वह चेन्‍नई के रोयापुरम की रहने वाली हैं। दक्षिण भारतीय व्यंजन बहुत अच्छी तरह बनाती हैं। शादी के बाद वह 20 साल की उम्र में लखनऊ आ गई थीं। अब हनी अपने स्टॉल से रोजाना 5,000 रुपये से 6,000 रुपये की बिक्री करते हैं। उनकी इडली और मेंडू वड़ा हाथों-हाथ बिकते हैं। आइए, यहां हनी खान की सफलता के सफर के बारे में जानते हैं।

चार भाइयों और एक बहन में शहजाद खान उर्फ हनी खान सबसे छोटे हैं। लखनऊ के ऐशबाग में एक साधारण दो बेडरूम के किराए के अपार्टमेंट में रहते हैं। उनके दूसरे भाई खाड़ी देशों में काम करते हैं। बहन हरियाणा में रहती है। लखनऊ विश्वविद्यालय के बाहर इडली और मेंडू वड़ा बेचकर हनी हर महीने चोखी कमाई कर रहे हैं। उन्होंने सितंबर 2025 में ‘इडली स्ट्रीट’ की शुरुआत की थी। अपनी मां के दक्षिण भारतीय व्यंजनों को बनाने में महारत का फायदा उठाकर उन्‍होंने इस स्‍टॉल को शुरू किया था।

हनी की मां रजिया खान शादी के बाद 20 साल की उम्र में लखनऊ आ गई थीं। वह मूल रूप से चेन्‍नई के रोयापुरम की रहने वाली हैं। वहीं उन्‍होंने दक्षिण भारतीय व्यंजन बनाने सीखे। हनी को अपने बड़े भाई से गिफ्ट में PS4 मिला था। इसे 14,000 रुपये में बेचकर उन्होंने 2,500 रुपये का एक मेटल बॉक्‍स खरीदा। उसमें इडली और मेदू वड़ा रखकर लखनऊ विश्वविद्यालय के बाहर बेचना शुरू किया। सामग्री खरीदने के लिए उन्होंने लगभग 7,000 रुपये खर्च किए। उन्होंने चैटजीपीटी और जेमिनी का इस्‍तेमाल करके ‘इडली स्ट्रीट’ का लोगो और ब्रांडिंग डिजाइन की। उसे डिब्बे पर डिस्‍प्‍ले किया। वह इसे अपनी बाइक पर ले जाते थे।

शुरुआत में हनी को सिर्फ 10-15 ग्राहक ही मिलते थे। काफी खाना बर्बाद हो जाता था। एक लखनऊ-बेस्‍ड ब्लॉगर के रील के वायरल होने के बाद स्थिति अचानक बदल गई। इसके बाद ‘इडली स्ट्रीट’ पर ग्राहकों की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी हुई। आज वह रोजाना लगभग 200-300 ग्राहकों को सेवाएं देते हैं। उनकी औसत बिक्री 5,000 से 6,000 रुपये के बीच होती है। इसमें सामग्री, डिस्पोजेबल प्लेट और चम्मच के साथ परिवहन का खर्च शामिल है।

रजिया हर दिन सुबह 4 बजे उठकर इडली और वड़ा तैयार करती हैं। सुबह 10 बजे तक सब कुछ तैयार हो जाता है। हनी खाना पैक करके ई-रिक्शा से स्टॉल तक पहुंचाते हैं। दो इडली नारियल और लाल प्याज की चटनी के साथ 20 रुपये में मिलती है। वहीं, दो मेंडू वड़ा 30 रुपये में बेचे जाते हैं। स्वच्छता का स्‍टॉल पर खास ख्‍याल रखा जाता है। हनी इडली परोसते समय दस्ताने पहनते हैं। डिस्पोजेबल प्लेट और कटोरे का इस्‍तेमाल करते हैं। रजिया रोजाना लगभग 300-400 इडली और 100-200 वड़ा तैयार करती हैं। खाना बिक जाने के बाद हनी लगभग 3,000 रुपये के मुनाफे के साथ घर लौटते हैं।

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