कुछ लोग चॉक और मिट्टी क्यों खाने लगते हैं? न्यूरोलॉजिस्ट ने बताया सबसे बड़ा कारण

Reason for Craving Soil or Clay: कई बार बच्चे चॉक, मिट्टी या कागज खाने लगते हैं. बच्चे नादान होते हैं और उन्हें इन चीजों की समझ नहीं होती है. यही वजह है कि अक्सर पैरेंट्स बच्चों की इन आदतों को नजरअंदाज कर देते हैं. कई बार वयस्कों को भी ये चीजें खाने की लत लग जाती है. अक्सर इसे गलत आदत माना जाता है, लेकिन हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो इन चीजों को खाने की तेज इच्छा किसी अंदरूनी स्वास्थ्य समस्या का संकेत भी हो सकती है. खासतौर पर अगर यह आदत लंबे समय तक बनी रहे, तो इसे गंभीरता से लेना जरूरी है. अगर वक्त रहते इससे बचाव कर लिया जाए, तो सेहत को नुकसान नहीं होगा.
नई दिल्ली के एम्स से प्रशिक्षित न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. प्रियंका सेहरावत ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर किया है, जिसमें बताया है कि चॉक, मिट्टी, कागज या चिकनी मिट्टी जैसी चीजें खाने की इच्छा एक ईटिंग डिसऑर्डर है. इसे पिका (Pica) ईटिंग डिसऑर्डर कहा जाता है. कई मरीज क्लीनिक में इस तरह की शिकायत लेकर आते हैं कि उन्हें बार-बार मिट्टी या चॉक खाने की बहुत ज्यादा तेज क्रेविंग होती है. यह सिर्फ अजीब आदत नहीं, बल्कि शरीर के अंदर चल रही किसी कमी का संकेत हो सकता है.
पिका एक ऐसी कंडीशन है, जिसमें व्यक्ति कम से कम एक महीने या उससे अधिक समय तक लगातार गैर-खाद्य पदार्थ यानी नॉन फूड खाने की इच्छा महसूस करता है. यह समस्या बच्चों, गर्भवती महिलाओं और मेंटल डिसऑर्डर से जूझ रहे लोगों में ज्यादा देखी जाती है. अगर समय रहते इसका कारण न खोजा जाए, तो यह पाचन संबंधी समस्याएं, संक्रमण या टॉक्सिसिटी जैसी जटिलताओं को जन्म दे सकती है. आपका बच्चा लंबे समय से ये चीजें खा रहा है, तो उसे डॉक्टर को जरूर दिखाएं.
डॉ. सेहरावत के अनुसार पिका का सबसे सामान्य कारण शरीर में आयरन की कमी है. आयरन की कमी से एनीमिया हो सकता है, जिससे शरीर में थकान, चक्कर और कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई देते हैं. ऐसे में शरीर असामान्य चीजें खाने की इच्छा के जरिए संकेत देता है कि उसे पोषक तत्वों की जरूरत है. अगर किसी को मिट्टी, चॉक या कागज खाने की इच्छा हो रही है, तो तुरंत ब्लड टेस्ट कराकर आयरन लेवल की जांच करवानी चाहिए. इससे सटीक कारण का पता लग सकता है.
डॉ. सेहरावत सलाह देती हैं कि आयरन की कमी को सही डाइट और सप्लीमेंट्स की मदद से सुधारा जा सकता है. डेली डाइट में खजूर, किशमिश, गुड़, मेवे, बीज, हरी पत्तेदार सब्जियां और आयरन-फोर्टिफाइड अनाज शामिल करें. जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह से आयरन सप्लीमेंट भी लेना पड़ सकता है. इसके अलावा समय-समय पर खून की जांच करवाना जरूरी है, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि आयरन का स्तर सामान्य बना हुआ है.
हेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना है कि पिका को हल्के में लेना सही नहीं है. यह शरीर का एक चेतावनी संकेत हो सकता है, जो पोषण की कमी या अन्य स्वास्थ्य समस्याओं की ओर इशारा करता है. सही समय पर पहचान और इलाज से इस समस्या को पूरी तरह कंट्रोल किया जा सकता है. अगर आप या आपका बच्चा गैर-खाद्य वस्तुएं खाने की इच्छा महसूस कर रहा है, तो इसे केवल आदत न समझें, बल्कि डॉक्टर से कंसल्ट करके असली कारण जानें और प्रॉपर ट्रीटमेंट कराएं.




