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…पाली के जवाई में मंदिर की सीढ़ियों पर साथ बैठते हैं पुजारी और पैंथर

पाली. जंगल का सामान्य कानून कहता है कि शिकारी और शिकार कभी एक साथ नहीं रह सकते, लेकिन राजस्थान के पाली जिले में एक ऐसा इलाका है जिसने इस वैश्विक रीत को ही बदल दिया है. हम बात कर रहे हैं जवाई हिल्स की, जहाँ ग्रेनाइट की पहाड़ियों के बीच इंसानों और खूंखार तेंदुओं के बीच सदियों से ‘दोस्ती’ का रिश्ता चला आ रहा है. यह दुनिया का एकमात्र ऐसा क्षेत्र है जहाँ 40 से 50 तेंदुए रिहायशी इलाकों और मंदिरों के आसपास खुलेआम घूमते हैं, लेकिन दशकों से आज तक यहाँ किसी इंसान पर तेंदुए के हमले की कोई घटना सामने नहीं आई है. दुनिया इसे ‘लेपर्ड हिल्स ऑफ इंडिया’ के नाम से जानती है.

जवाई क्षेत्र के प्राचीन मंदिरों, विशेषकर ‘वारा माताजी’ मंदिर में एक ऐसा दृश्य आम है जिसे देखकर बाहरी दुनिया के लोग दंग रह जाते हैं. यहाँ के पुरोहित और ग्रामीण जब सुबह-शाम मंदिर की सीढ़ियां चढ़ते-उतरते हैं, तो कई बार ये ‘गोल्डन कैट्स’ यानी तेंदुए उनके बिल्कुल पास से शांति से गुजर जाते हैं. कई बार तो ये तेंदुए मंदिर की चौखट और सीढ़ियों पर ही आराम फरमाते नजर आते हैं. स्थानीय लोग इसे माताजी का चमत्कार मानते हैं कि उनके बीच से गुजरने के बावजूद इन खूंखार वन्यजीवों ने कभी किसी को नुकसान नहीं पहुँचाया है.

मादा तेंदुए नहीं सिखातीं इंसानों का शिकार
वन्यजीव विशेषज्ञों ने इस अनोखे व्यवहार का एक वैज्ञानिक और व्यवहारिक कारण भी खोजा है. जवाई की मादा तेंदुए (लेपर्ड मदर्स) अपने शावकों को शिकार करना तो सिखाती हैं, लेकिन वे कभी भी अपने बच्चों को इंसानों का पीछा करना या उन पर हमला करना नहीं सिखातीं. यहाँ के शावक बचपन से ही इंसानों को अपने आसपास शांति से घूमते देखते हैं, जिससे उनके मन में इंसानों को लेकर कोई डर या शिकार वाली छवि नहीं बनती. यही कारण है कि ये तेंदुए इंसानों को भोजन (Prey) के तौर पर नहीं देखते.

सम्मान और लिहाज का रिश्ता
जवाई के इस पारिस्थितिक तंत्र (Ecosystem) में लिहाज और सम्मान का रिश्ता दोनों तरफ से है. यदि तेंदुआ इंसानों को रास्ता देता है, तो ग्रामीण भी उनके आवास और शांति में कभी दखल नहीं देते. पर्यावरण प्रेमी सुमित माहेश्वरी बताते हैं कि यह ईश्वरीय कृपा और प्रकृति का अद्भुत संतुलन है. यहाँ चरवाहे अपनी भेड़ों के साथ उसी पहाड़ी के नीचे से बेखौफ गुजरते हैं, जहाँ ऊपर की शिला पर बैठा लेपर्ड शांति से धूप सेंक रहा होता है. यह दृश्य जवाई को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक अद्वितीय पर्यटन और शोध केंद्र के रूप में पहचान दिलाता है.

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