करोड़ों के सरकारी अस्पताल में डॉक्टर ही नहीं, सिर्फ 3 नर्सों पर 35 गांवों का जिम्मा

खंडवा. मध्य प्रदेश के खंडवा जिले के ग्राम बीड़ का प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बदहाल व्यवस्था की कहानी बयां कर रहा है. शासन ने यहां करोड़ों रुपये खर्च कर भवन तो बना दिया लेकिन डॉक्टर और स्टाफ की व्यवस्था नहीं की. स्थिति यह है कि यहां पदस्थ डॉक्टर पिछले एक महीने से अस्पताल नहीं पहुंचे हैं. इस स्वास्थ्य केंद्र पर करीब 35 गांवों के लोगों की इलाज की जिम्मेदारी है लेकिन पूरे अस्पताल को सिर्फ तीन नर्सों के भरोसे चलाया जा रहा है. पर्ची बनाना, जांच करना, दवाई देना हर काम नर्सों को ही संभालना पड़ रहा है. अस्पताल में न तो फार्मासिस्ट मौजूद हैं और न ही ड्रेसर. ऐसे में मरीजों को प्राथमिक इलाज भी ठीक से नहीं मिल पा रहा है. स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह प्रभावित हो रही हैं.
ग्रामीणों का कहना है कि यदि कोई गंभीर मरीज आता है, तो उसे सीधे मूंदी सीएचसी रेफर कर दिया जाता है. कई बार मरीजों को खुद ही मूंदी जाने की सलाह दे दी जाती है. इससे समय पर इलाज नहीं मिल पाता और मरीजों की परेशानी बढ़ जाती है. बीड़ के अंतर्गत सिंगाजी, शिवरिया और भगवानपुरा में उप-स्वास्थ्य केंद्र बनाए गए हैं लेकिन यहां स्टाफ की नियमित उपस्थिति नहीं रहती. ग्रामीणों को छोटी जांच के लिए भी बीड़ अस्पताल आना पड़ता है.
गर्भवती महिलाएं और बच्चे सबसे ज्यादा परेशान
अस्पताल में बड़ी संख्या में गर्भवती महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे इलाज के लिए पहुंचते हैं. डॉक्टर नहीं होने के कारण उन्हें सही सलाह और समय पर उपचार नहीं मिल पाता. इससे जोखिम और बढ़ जाता है.
मजबूरी में प्राइवेट अस्पताल का सहारा
डॉक्टरों की कमी के कारण गरीब मरीजों को मजबूरी में निजी क्लिनिक का रुख करना पड़ रहा है. इससे उनपर आर्थिक बोझ भी बढ़ रहा है. छोटी बीमारी के लिए भी लोगों को ज्यादा खर्च करना पड़ रहा है.
70-80 किमी दूर जिला अस्पताल जाना पड़ता है
लोकल 18 से बातचीत में लव जोशी ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की हालत खराब है. कई जगह डॉक्टर, नर्स और जांच स्टाफ की कमी है. मरीजों को 70-80 किलोमीटर दूर खंडवा जिला अस्पताल जाना पड़ता है. यहां तक कि छोटी चोट के मामलों में भी मरीजों को रेफर कर दिया जाता है.
अधिकारियों ने माना डॉक्टरों की कमी
बीएमओ मूंदी डॉ आनंद ओनकर ने कहा कि डॉक्टरों की कमी बनी हुई है. दो डॉक्टरों का चयन हुआ है लेकिन अभी ज्वाइनिंग नहीं हुई है. उच्च अधिकारियों को पत्र लिखकर डॉक्टरों की मांग की जाएगी.
बहरहाल ग्राम बीड़ का यह स्वास्थ्य केंद्र सिस्टम की बड़ी लापरवाही को उजागर कर रहा है. जहां करोड़ों का भवन होने के बावजूद डॉक्टर नहीं हैं और 35 गांवों की जिम्मेदारी सिर्फ तीन नर्सों पर है. ऐसे में ग्रामीणों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मिलना अब भी एक बड़ा सवाल बना हुआ है.




