छत्तीसगढ़

करोड़ों का घोटाला, नगर निगम के 4 अधिकारी निलंबित, आयुक्त बोले – विभागीय और विधिक जांच भी होगी

 रायपुर। नगर निगम में 100 करोड़ से ज्यादा के भ्रष्टाचार मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए आयुक्त ने चार अधिकारियों को निलंबित कर दिया है। नगर निगम आयुक्त विश्वदीप ने बताया कि चार सदस्यीय जांच कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर जोन क्रमांक 10 के तत्कालीन जोन कमिश्नर विवेकानंद दुबे, कार्यपालन अभियंता आशीष शुक्ला, इंजीनियर योगेश यादव और अजय श्रीवास्तव के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की गई है। मामले में विभागीय जांच भी की जाएगी। साथ ही विधिक कार्रवाई के साथ-साथ वेतन वृद्धि में भी रोक लगाई जाएगी।

बताया जा रहा है कि यह मामला करीब 150 से 159 एकड़ अवैध जमीन को गलत तरीके से वैध बनाने की साजिश से जुड़ा हुआ है। जांच में सामने आया है कि पूरी प्रक्रिया में नगर निगम मुख्यालय को बायपास किया गया और संरचना अनुमोदन व TMC अप्रूवल में गंभीर अनियमितताएं बरती गईं।

टाउन एंड कंट्री प्लानिंग के अधिकारियों की मिलीभगत की आशंका

इस मामले की जांच के लिए गठित चार सदस्यीय कमेटी ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी है, जिसके आधार पर निलंबन की कार्रवाई की गई। जांच समिति में पंकज शर्मा (अपर आयुक्त, नगर निवेश) को अध्यक्ष बनाया गया था, जबकि आभाष मिश्रा, आशुतोष सिंह और सोहन गुप्ता सदस्य के रूप में शामिल थे। रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि जांच के दौरान कई बार मूल नस्ती (दस्तावेज) मांगे जाने के बावजूद उपलब्ध नहीं कराए गए। साथ ही टाउन एंड कंट्री प्लानिंग के अधिकारियों की मिलीभगत की आशंका भी जताई गई है।

क्या है मामला?

बता दें कि लल्लूराम डॉट कॉम ने 16 अप्रैल को इस खबर को प्रकाशित किया था, जिसमें TNC (टाउन एंड कंट्री प्लानिंग) और मार्ग संरचना अप्रूवल के नाम पर नियम-कानूनों को दरकिनार कर फाइलें पास करने और बाद में मूल दस्तावेजों के गायब होने के आरोप लगे हैं। मामले में प्रक्रिया को बायपास करने, 70 से अधिक खसरा नंबरों की फाइलें गायब होने और अधिकारियों-बिल्डरों की मिलीभगत जैसे गंभीर सवाल उठे हैं।

अवैध कॉलोनियों को अवैध तरीके से वैध करने का षड्यंत्र

नगर निगम के नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी ने इस घोटाले को लेकर गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने कहा था कि यह 100 करोड़ से अधिक का घोटाला है। दलाल, बिल्डरों और कुछ अधिकारियों की मिलीभगत से खेल खेला गया है। नियम-कानून और प्रक्रिया को तिलांजलि दे दी गई है। मामले की जानकारी होते ही मूल नस्ती गायब कर दी गई। अवैध कॉलोनियों को अवैध तरीके से वैध करने का एक बड़ा षड्यंत्र है।

घोटाले का केंद्र- बोरियाखुर्द, ओम नगर, साई नगर, बिलाल नगर

यह पूरा मामला कामरेड सुधीर मुखर्जी वार्ड क्रमांक 54 अंतर्गत आरडीए कॉलोनी से लगे बोरियाखुर्द, ओम नगर, साई नगर और बिलाल नगर क्षेत्र के भूखंडों से जुड़ा है। इनमें भूखंड क्रमांक 81, 82, 86 से लेकर 450 तक कुल 70 से अधिक खसरा नंबर, All of Part शामिल हैं।

प्रक्रिया कैसे बायपास की गई?

नियम के अनुसार अप्रूवल की प्रक्रिया इस प्रकार है—

जोन से फाइल निगम मुख्यालय आती है।
निगम कमिश्नर अप्रूवल देते हैं।
फिर टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (TNC) विभाग भेजी जाती है।
TNC से वापस कमिश्नर के पास आती है और अंतिम अप्रूवल के बाद जोन को भेजी जाती है।

लेकिन इस मामले में जोन क्रमांक 10 से फाइल सीधे TNC विभाग पहुंचा दी गई। निगम कमिश्नर को पूरी तरह बायपास कर दिया गया। जब TNC से फाइल कमिश्नर के पास आई, तो उन्होंने हैरानी जताई कि यह फाइल तो उन्होंने अप्रूव ही नहीं की थी। इसके बाद जोन क्रमांक 10 से मूल नस्ती मंगवाई गई, तो पता चला कि मूल फाइल गायब हो चुकी है। जोन आयुक्त, जोन-10 ने नस्ती गुम होने का आधिकारिक पत्र भी लिखा है।

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