स्वास्थ्य

35 की उम्र के बाद चुपचाप कमजोर होने लगती हैं हड्डियां, महिलाओं को रहना चाहिए अलर्ट?

Bone Density Women: महिलाओं के शरीर में 30 की उम्र पार करने के बाद कई बदलाव धीरे-धीरे शुरू हो जाते हैं, लेकिन इनमें से कुछ ऐसे होते हैं जो दिखते नहीं, महसूस भी नहीं होते और लंबे समय तक नजरअंदाज होते हैं. हड्डियों की मजबूती यानी बोन डेंसिटी में कमी भी ऐसा ही एक बदलाव है जो आमतौर पर 35 की उम्र के बाद शुरू होता है. खास बात यह है कि यह प्रक्रिया बिना किसी स्पष्ट लक्षण के आगे बढ़ती रहती है और कई सालों बाद जाकर इसका असर दिखाई देता है. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि 35 की उम्र के बाद कैसे हड्डियां चुपचाप कमजोर होने लगती है और महिलाओं को इससे क्यों सतर्क रहना चाहिए.

आमतौर पर महिलाओं में हड्डियों की अधिकतम मजबूती 20 के आखिरी सालों या 30 की शुरुआत तक बनती है. इसके बाद शरीर हड्डियों को बनाता तो है लेकिन टूटने की प्रक्रिया उससे तेज हो जाती है. एक्सपर्ट्स के अनुसार यही संतुलन धीरे-धीरे बोन मास को कम करता है जाे शुरुआत में समझ नहीं आता और बिना किसी चेतावनी के बढ़ता रहता है.

हड्डियों के कमजोर होने की सबसे बड़ी चुनौती यही है कि शुरुआत में इसका कोई साफ संकेत नहीं मिलता. जब लक्षण सामने आते हैं, तब तक स्थिति काफी आगे बढ़ चुकी होती है. इनमें हल्की ऊंचाई कम होना, बार-बार पेट दर्द या मामूली गिरने पर फ्रैक्चर जैसी समस्या शामिल हो सकती है. भारत में भी कई मामलों में ऑस्टियोपोरोसिस का पता तब चलता है, जब हड्डी टूट चुकी होती है.

ऑस्टियोपोरोसिस सिर्फ हड्डियों के कमजोर होने की स्थिति नहीं, बल्कि हड्डियों की संरचना में बदलाव होता है. इसमें हड्डियां हल्की और खोखली हो जाती है, जिससे वह जल्दी टूट सकती है और शरीर का भार संभालने में कमजोर पड़ जाती है

वहीं महिलाओं में हड्डियों के कमजोर होने के पीछे कई कारण होते हैं. हार्मोनल बदलाव इसमें सबसे अहम भूमिका निभाता है. खासकर एस्ट्रोजन हार्मोन जो हड्डियों की सुरक्षा करता है. उम्र बढ़ने के साथ इसका स्तर बदलने लगता है, जिसका असर हड्डियों पर पड़ता है. इसके अलावा कैल्शियम और विटामिन डी की कमी, लंबे समय तक बैठकर काम करना और फिजिकल एक्टिविटी की कमी भी हड्डियों को कमजोर करती है. प्रेगनेंसी और ब्रेस्टफीडिंग के दौरान शरीर से कैल्शियम की खपत बढ़ जाती है, जिससे हड्डियों पर असर पड़ सकता है, अगर सही पोषण न मिले.

हड्डियों की स्थिति जानने के लिए DEXA स्कैन किया जाता है जो आसान और बिना दर्द वाली जांच होती है. लेकिन अक्सर महिलाएं इसे उम्र बढ़ने के बाद ही करवाती है, जिससे शुरुआती स्तर पर समस्या का पता नहीं चल पाता. एक्सपर्ट्स का मानना है कि समय पर जांच और सही देखभाल से फ्रैक्चर के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है.

वहीं 35 के बाद भी हड्डियों की देखभाल करके उनकी मजबूती को बनाए रखा जा सकता है. इसके लिए नियमित एक्सरसाइज खासकर वेट बेयरिंग एक्सरसाइज, कैल्शियम युक्त संतुलित आहार, रोजाना धूप लेना और एक्टिव लाइफस्टाइल जरूरी है. जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह से भी इलाज किया जा सकता है.

एक्सपर्ट्स बताते हैं की हड्डियों की कमजोरी धीरे-धीरे बढ़ती है, इसलिए इस पर रोजाना ज्यादा ध्यान नहीं दिया जाता है. लेकिन इसके रिजल्ट बाद में सामने आते हैं, जब रिकवरी मुश्किल हो जाती है और लाइफ की गुणवत्ता प्रभावित होती है.

Related Articles

Back to top button