स्कूल नहीं आ पाउंगा मास्साब…’, छात्र की बुंदेलखंडी लीव एप्लिकेशन पढ़कर लोटपोट हुए टीचर!

Viral Post : अक्सर स्कूलों में छुट्टी लेने के लिए छात्र एक तय फॉर्मेट का इस्तेमाल करते हैं, जिसकी शुरुआत ‘सविनय निवेदन है…’ जैसे औपचारिक शब्दों से होती है. यह तरीका सालों से चलता आ रहा है और ज्यादातर छात्र उसी ढर्रे पर अपनी अर्जी लिखते हैं. लेकिन हाल ही में बुंदेलखंड के एक छात्र ने इस परंपरा को अपने अनोखे अंदाज से बदल दिया.
उसने अपनी छुट्टी की एप्लिकेशन में किताबों वाली भाषा की बजाय अपनी क्षेत्रीय बोली और सादगी को जगह दी है. जिसने लोगों का दिल जीत लिया. यही वजह है कि यह लेटर अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है.
इस दिलचस्प एप्लिकेशन को Arpit Verma ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर शेयर किया. जैसे ही यह पोस्ट सामने आई, लोगों ने इस पर जमकर प्रतिक्रिया देनी शुरू कर दी. उन्होंने बताया कि यह छात्र बुंदेलखंड क्षेत्र का रहने वाला है. पोस्ट वायरल होते ही हजारों लोगों ने इसे पसंद किया और कमेंट्स में छात्र की ईमानदारी और उसकी देसी भाषा की तारीफ की है. कई यूजर्स ने इसे दिल से लिखा हुआ बताया, तो कुछ ने इसे सबसे अलग और मजेदार एप्लिकेशन कहा है.
इस आवेदन में ‘कलुआ’ नाम के छात्र ने बुंदेलखंडी भाषा में अपनी बीमारी का जिक्र करते हुए छुट्टी मांगी है. उसने बहुत ही सीधे और दिलचस्प अंदाज में लिखा कि उसे पिछले दो दिनों से बुखार है और साथ ही नाक भी बह रही है, जिसके कारण वह स्कूल नहीं आ पाएगा.
उसने अपने गुरुजी से विनम्रता से निवेदन किया कि उसे दो-चार दिनों की छुट्टी दे दी जाए. उसकी भाषा में न तो कोई बनावट थी और न ही किसी तरह की औपचारिकता, बल्कि एक सच्चाई और मासूमियत झलक रही थी.
इस पत्र का अंत सबसे ज्यादा चर्चा में रहा, जहां उसने मजाकिया अंदाज में लिखा कि उसके स्कूल न आने से कोई स्कूल बंद नहीं हो जाएगा. यह लाइन पढ़कर लोग हंस पड़े और यही वजह है कि यह एप्लिकेशन इंटरनेट पर वायरल हो गई. सोशल मीडिया पर इस पोस्ट को हजारों लाइक्स और ढेरों कमेंट्स मिल चुके हैं. कई लोगों ने मजाक में कहा कि अब वे भी छुट्टी के लिए इसी अंदाज को अपनाएंगे.
कुछ यूजर्स ने यह भी कहा कि इस तरह की क्षेत्रीय भाषा को सामने लाना गर्व की बात है. वहीं कई लोग अपनी संस्कृति और बोली को इस तरह वायरल होते देख खुश नजर आए




