स्वास्थ्य

Brain में Clot होने के संकेत, लापरवाही की तो अचानक ही निकल जाएगी जान!

डेस्कः ब्रेन क्लॉट यानि की दिमाग में खून के थक्के जम जाना, ये समस्या अब बहुत आम हो गई है लेकिन ये थक्का जानलेवा भी साबित हो सकते हैं इसलिए समय पर इसका इलाज करना जरूरी है। चलिए इस बारे में समझना जरूरी है। मस्तिष्क में रक्त का थक्का एक गंभीर स्थिति है जो अचानक स्ट्रोक और मृत्यु का कारण बन सकता है। इसके शुरुआती लक्षण जैसे सिरदर्द, बोलने में परेशानी, या दृष्टि धुंधली होना कभी भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय रहते सही जांच और इलाज से जान बचाई जा सकती है।

मस्तिष्क में रक्त का थक्का तब बनता है जब रक्त वाहिका क्षतिग्रस्त होकर अवरुद्ध हो जाती है और मस्तिष्क तक रक्त और ऑक्सीजन की आपूर्ति रुक जाती है। यह स्थिति स्ट्रोक, दौरे, लकवा और यहां तक कि मौत तक का कारण बन सकती है।

रक्त के थक्कों के प्रकार

थ्रोम्बोसिस (Thrombosis)-यह तब होता है जब किसी रक्त वाहिका के भीतर ही थक्का बन जाता है। आमतौर पर यह चोट या किसी अन्य बीमारी की वजह से होता है और स्थिर रहता है।

एम्बोलिज़्म (Embolism)- इसमें थक्का शरीर के किसी अन्य हिस्से से निकलकर मस्तिष्क तक पहुंच जाता है। धमनी को ब्लॉक कर देता है और अचानक स्ट्रोक जैसी स्थिति उत्पन्न कर सकता है।

मस्तिष्क में रक्त का थक्का बनने के कारण

मोटापाः अधिक बीएमआई होने पर थक्का बनने का खतरा बढ़ जाता है।

धूम्रपानः यह रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचाता है और थक्का बनने का मुख्य कारण है।

गर्भनिरोधक गोलियांः एस्ट्रोजन लेवल बदलने से थक्का बनने का खतरा बढ़ता है।

मस्तिष्क पर चोट (Brain Trauma): चोट के बाद रक्तस्राव से थक्का बन सकता है।

एथेरोस्क्लेरोसिसः रक्त वाहिकाओं में प्लाक बनने से रुकावट होती है और थक्का जम सकता है।

मस्तिष्क में रक्त के थक्के के लक्षण

अचानक और तेज़ सिरदर्द
बोलने में कठिनाई या दिक्कत आना 
धुंधली या दोहरी दृष्टि
शरीर में सुन्नपन या लकवा
चक्कर और बेहोशी
झटके या दौरे पड़ना

यदि ये लक्षण अचानक दिखाई दें तो यह स्ट्रोक की चेतावनी हो सकती है और तुरंत इलाज ज़रूरी है।

ब्रेन स्ट्रोक होने पर कौन से टेस्ट जरूरी 

रक्त परीक्षणः खून में प्रोटीन और असामान्यता की जांच

सीटी स्कैन और एमआरआईः थक्के की सही लोकेशन पता करने के लिए

अल्ट्रासाउंडः रक्त वाहिकाओं की स्थिति जानने के लिए

एमआर एंजियोग्राफीः मस्तिष्क में ब्लॉकेज का पता लगाने के लिए

उपचार (Treatment)

दवाइयांः एंटीकोएगुलेंट्स और एंटीप्लेटलेट्स (जैसे वारफेरिन) – खून पतला करके थक्के को बढ़ने से रोकते हैं।

थ्रोम्बोलाइटिक्सः थक्का तेजी से घोलने के लिए (आपात स्थिति में)।

सर्जरी(Surgery): सर्जरी करने से 

मैकेनिकल थ्रोम्बेक्टॉमीः उपकरण से थक्का निकालना।

बर होल ड्रेनेजः खोपड़ी में छेद कर दबाव कम करना और थक्का निकालना।

कपाल-उच्छेदन (Craniotomy)ः खोपड़ी खोलकर थक्का निकालना।

इसके अलावा ये इलाज 

स्टेंट डालनाः रक्त वाहिका को खुला रखने के लिए।

वेना कावा फिल्टरः खून में थक्के को मस्तिष्क/हृदय तक पहुंचने से पहले रोकने के लिए।

नोटः जीवनशैली में बदलाव जैसे धूम्रपान छोड़ना, मोटापा नियंत्रित करना और डॉक्टर की सलाह पर दवा लेना इस खतरे को काफी हद तक कम कर सकते हैं।

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