युद्धविराम समझौते पर जवाब तैयार कर रहा ईरान, ट्रंप बोले- बातचीत जारी; कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट

नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष को समाप्त करने के लिए प्रस्तावित समझौते पर तेहरान विचार कर रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी मंगलवार को कहा कि ईरान के साथ बातचीत लगातार जारी है।
साथ ही उन्होंने उन खबरों को गलत बताया है, जिसमें दावा किया जा रहा था कि दोनों पक्षों ने एक दूसरे से बातचीत बंद कर दी है। तनाव कम होने की उम्मीद में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमत एक प्रतिशत से ज्यादा गिर गईं।
आईआरजीसी ने मंगलवार को दावा किया कि पिछले 24 घंटों में उसकी नौसेना से अनुमति मिलने के बाद 24 जहाज होर्मुज स्ट्रेट से गुजरे हैं।
समुद्री सुरक्षा को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच दुनिया की सबसे बड़ी शिपिंग कंपनी एमएससी ने बताया कि इराक के उम्म कसर बंदरगाह पर खड़े उसके एक जहाज पर एक दिन पहले दो प्रक्षेपास्त्रों से हमला किया गया।
आईआरजीसी ने इसकी जिम्मेदारी लेते हुए कहा कि यह कार्रवाई ओमान की खाड़ी में एक ईरानी पोत पर अमेरिकी हमले के जवाब में की गई।अमेरिका और इजरायल की ओर से ईरान पर हमले शुरू किए हुए तीन महीने से अधिक समय बीत चुका है।
इस दौरान संघर्ष एक तरह के गतिरोध में बदल गया है। अंतरिम समझौते को लेकर चल रही बातचीत भी अब तक निर्णायक नतीजे तक नहीं पहुंच सकी है।
इसी बीच होर्मुज जलडमरूमध्य से समुद्री यातायात भी काफी हद तक प्रभावित बना हुआ है। ईरान ने सोमवार को चेतावनी दी थी कि यदि इजरायल ने बेरूत पर हमले दोबारा शुरू किए तो वह लाल सागर के प्रवेश द्वार बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य तक अपनी नाकेबंदी का दायरा बढ़ा सकता है।
रॉयटर के अनुसार, मेहर समाचार एजेंसी ने एक सूत्र के हवाले से बताया कि ईरान अभी प्रस्तावित समझौते के अंतिम मसौदे पर अपना जवाब तैयार कर रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका के पूर्व रिकार्ड और आपसी अविश्वास को देखते हुए तेहरान वार्ता में सख्त रुख अपनाए हुए है।
ट्रंप ने सोमवार को कहा कि ईरान के साथ बातचीत जारी है और अगले सप्ताह तक अप्रैल की शुरुआत में हुए युद्धविराम को आगे बढ़ाने तथा होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने को लेकर समझौता हो सकता है।
हालांकि मार्च के मध्य से ट्रंप कई बार शांति समझौते के करीब पहुंचने का दावा कर चुके हैं, लेकिन ईरान के परमाणु कार्यक्रम जैसे जटिल मुद्दे अब भी अनसुलझे हैं।
युद्ध समझौते में लेबनान पर हमले रुकना भी जरूरी: गलीबॉफ
एएनआई के अनुसार, ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकर गलीबॉफ ने कहा है कि अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष समाप्त करने के लिए होने वाले किसी भी संभावित समझौते में लेबनान समेत सभी मोर्चों पर हमले रोकने का प्रविधान शामिल होगा।
लेबनानी संसद अध्यक्ष नबीह बेरी से बातचीत के बाद गलीबाफ ने एक्स पर कहा कि व्यापक युद्धविराम किसी भी समाधान की अनिवार्य शर्त है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इजरायल ने अपने सैन्य अभियान जारी रखे तो ईरान न केवल वार्ता प्रक्रिया रोक देगा, बल्कि इजरायल के खिलाफ सीधे खड़ा भी होगा।
भारत ने कहा, शांति और स्थिरता के लिए संवाद व कूटनीति ही रास्ता
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत ने एक बार फिर संवाद और कूटनीति के जरिए समाधान निकालने पर जोर दिया है। विदेश मंत्रालय ने कहा है कि वह क्षेत्र की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और शांति व स्थिरता की शीघ्र बहाली के लिए बातचीत ही सबसे प्रभावी मार्ग है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग में लेबनान में इजरायली सैन्य कार्रवाई और उसके क्षेत्रीय प्रभावों से जुड़े सवाल के जवाब में कहा कि भारत शुरू से ही वार्ता और कूटनीति के पक्ष में रहा है।
जायसवाल ने कहा कि भारत यह संदेश सभी संबंधित पक्षों को लगातार देता रहा है और क्षेत्र में तनाव कम करने के प्रयासों का समर्थन करता है।
होर्मुज स्ट्रेट खोलने के बदले ईरान को प्रतिबंधों में राहत नहीं: रुबियो
न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने मंगलवार को स्पष्ट किया कि ट्रंप प्रशासन ने केवल होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने के बदले ईरान को प्रतिबंधों में राहत देने की कोई पेशकश नहीं की है।
ईरान युद्ध के मुद्दे पर मंगलवार को अमेरिकी सांसदों के सामने पेश हुए रूबियो ने कहा कि ईरान होर्मुज को पूरी तरह खोल भी देता है, तब भी उस पर लगे प्रतिबंध नहीं हटाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि न तो ईरान से इस पर कोई चर्चा हुई है और न तेहरान से कोई ऐसा प्रस्ताव दिया गया है।
उन्होंने कहा कि ईरान पर लगे प्रतिबंधों में किसी भी तरह की ढील उसके परमाणु कार्यक्रम से जुड़ी शर्तों को पूरा करने पर ही निर्भर करेगी। उन्होंने कहा कि परमाणु वार्ता बेहद जटिल है और किसी समाधान तक पहुंचने में कई महीने लग सकते हैं।




