राजनीति

ममता में बची कितनी ताकत, होने जा रहा तय, बागी- बीजेपी-कांग्रेस सब टकटकी लगाए देख रहे

बंगाल की राजनीत‍ि में 21 जुलाई का द‍िन काफी कुछ तय करने वाला है. यह तय करेगा क‍ि ममता बनर्जी की स‍ियासी ताकत क‍ितनी बची है. यह तय करेगा क‍ि ऋतव्रता बनर्जी बागी नेताओं को तो बांध लाए, लेकिन क्‍या कार्यकर्ता और आम जनता भी उतनी ही उनके साथ है. और इन सब पर नजर बीजेपी कांग्रेस की है.

ममता बनर्जी क‍ितनी ताकतवर? क्‍या उनके व‍िधायकों-सांसदों के जाने से जमीन पर भी असर कम हुआ है? क‍ितने लोग उनके साथ अब भी खड़े हैं? इन सभी सवालों के जवाब म‍िलने जा रहे हैं. आज से ठीक लगभग एक महीने बाद 21 जुलाई को शहीद द‍िवस पर ममता बड़ी रैली करने जा रही हैं. आप सोच रहे होंगे क‍ि इस बार ऐसा क्‍या, ममता तो हर साल ऐसी रैली करती हैं. नया ये है क‍ि ममता इस बार अकेले हैं. उनकी पार्टी टूट चुकी है. इतना ही नहीं, बागी गुट भी इस बार अलग से रैली करने जा रहा है. जिसके पास समर्थन ज्‍यादा होगा, वही जमीन पर असली टीएमसी होने का दम भरेगा. इस पर बागी गुट ही नहीं, बीजेपी और कांग्रेस की भी नजर है.

21 जुलाई का बंगाल की राजनीति में बड़ा महत्‍व है, क्योंकि इसी दिन साल 1993 में वामपंथी शासन के दौरान पुलिस फायरिंग में युवा कांग्रेस के 13 कार्यकर्ताओं की मौत हो गई थी. ममता बनर्जी इसे अपना चुकी हैं और लगातार इस दिन रैली करके जताती भी रही हैं क‍ि वही असली उत्‍तराध‍िकारी हैं. लेकिन अब इसी ऐतिहासिक दिन पर अपना अधिकार जमाने के लिए दोनों गुट आमने-सामने आ गए हैं.

ममता की कैसी है तैयारी

धर्मतला में बड़ी रैली की तैयारियां युद्ध स्तर पर शुरू कर चुका है. हालांकि पिछले वर्षों की तुलना में इस बार भव्य त्रिस्तरीय मंच शायद नजर न आए, लेकिन फिर भी इस बार 50 फुट चौड़ा और 100 फुट लंबा एक विशाल मंच बनाने की तैयारी है. रविवार को पार्टी के वरिष्ठ नेता कुणाल घोष और डोला सेन को खुद धर्मतला में मंच निर्माण कार्य का जमीनी जायजा लेते देखा गया. साफ है क‍ि ममता इस मंच का उपयोग फ‍िर से खुद को खड़ा करने के ल‍िए करने जा रही हैं. वह मैसेज देना चाहती हैं क‍ि असली टीएमसी उन्‍हीं के पास है.

कुणाल घोष ने ऋतव्रत बनर्जी का उड़ाया मजाक

कुणाल घोष ने ऋतव्रत बनर्जी का मजाक उड़ाते हुए कहा, कौन है ऋतव्रत? वह तो बस 4 आने का नकुल दाना (एक प्रकार की सस्ती बंगाली मिठाई) है, और अब उसका भी कैशमेमो मांगा जा रहा है. जिस वामपंथी सरकार के शासनकाल में 13 निर्दोष युवाओं पर अंधाधुंध गोलियां चली थीं, ऋतव्रत तो उसी सीपीआईएम की राजनीतिक पैदाइश हैं. ममता गुट का यह सीधा आरोप है कि जो व्यक्ति उस क्रूर विचारधारा का हिस्सा रहा हो, वह आज किस नैतिक अधिकार से धर्मतला के उसी मैदान में शहीद दिवस मनाने का दावा कर सकता है. यह हमला ऋतव्रत गुट को वैचारिक रूप से खोखला साबित करने की एक सोची-समझी चाल थी.

दूसरी ओर, ऋतव्रत बनर्जी के नेतृत्व वाला विद्रोही गुट भी हाथ पर हाथ धरे नहीं बैठा है और वह ममता की टीएमसी को हर मोर्चे पर कड़ी टक्कर दे रहा है. जैसे ही ममता गुट की तैयारियों की भनक लगी, ऋतव्रत गुट ने भी लामबंदी तेज कर दी. कोलकाता नगर निगम के पूर्व तृणमूल पार्षदों की बैठक हुई. इस बैठक में उन तमाम पूर्व पार्षदों ने हिस्सा लिया जो सत्ता परिवर्तन के बाद से हाशिये पर महसूस कर रहे थे या जिनका वर्तमान नेतृत्व से मोहभंग हो चुका था. यह इस बात का साफ संकेत है कि ऋतव्रत जमीनी स्तर के नेताओं को अपने पाले में करने में सफल हो रहे हैं. इन पूर्व पार्षदों ने बैठक में सर्वसम्मति से यह दृढ़ निर्णय लिया कि वे किसी भी सूरत में 21 जुलाई की रैली आयोजित करके ही दम लेंगे. ऋतव्रत गुट यह साबित करना चाहता है कि असली जमीनी कार्यकर्ता उनके साथ खड़े हैं.

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