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अमेरिका को मिलेगी कड़ी टक्कर! स्पेस इकॉनमी में लहराएगा तिरंगा, स्काईरूट ने खोला अवसरों का द्वार

नई दिल्ली: हैदराबाद की स्पेस-टेक कंपनी स्काईरूट एयरोस्पेस ने हाल में बड़ी उपलब्धि हासिल की। स्काईरूट सफलतापूर्वक रॉकेट लॉन्च करने वाली देश की पहले कंपनी है। इसके साथ ही भारत उन चंद देशों की लिस्ट में शामिल हो गया है जिनके पास प्राइवेट रॉकेट ऑपरेटर हैं। हालांकि भारत के प्राइवेट स्पेस सेक्टर को अभी लंबा रास्ता तय करना है लेकिन इस उपलब्धि ने भारतीय कंपनियों के लिए अवसरों का एक बड़ा मौका खोल दिया है। इसकी वजह यह है कि दुनियाभर में सैटेलाइट लॉन्च की मांग बढ़ रही है और भारतीय कंपनियां इस मौके का फायदा उठा सकती हैं।

भारत ने साल 2020 में प्राइवेट कंपनियों के लिए स्पेस सेक्टर के दरवाजे खोले थे। इसका मकसद ग्लोबल मार्केट में भारत की हिस्सेदारी को मौजूदा 2% से बढ़ाकर 2030 तक 10% करना था। इसके तहत कंपनियों को रॉकेट और सैटेलाइट बनाने और इसरो की लॉन्च सुविधाओं का इस्तेमाल करने की इजाजत दी गई। सरकार का दावा है कि देश में 400 से ज्यादा स्पेस स्टार्टअप शुरू हुए हैं। इनमें स्काईरूट सबसे सफल रही है और यह इस सेक्टर की इकलौती यूनिकॉर्न कंपनी है।

ग्लोबल सैटेलाइट लॉन्च सर्विस मार्केट की वैल्यू लगभग 12.1 अरब से 25.3 अरब अमेरिकी डॉलर के बीच है। इसके 14% से 15.6% CAGR के साथ 2030 तक 41 अरब अमेरिकी डॉलर से ज्यादा होने का अनुमान है। इस इंडस्ट्री में अभी नॉर्थ अमेरिका का दबदबा है, जो ग्लोबल रेवेन्यू का 40% से ज्यादा हिस्सा रखता है। इसमें अमेरिका का कमर्शियल सेक्टर लॉन्च वॉल्यूम और टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट, दोनों में सबसे आगे है।

सफलता के मायने

स्काईरूट अगले साल अपना कमर्शियल ऑपरेशन शुरू करेगी और उसकी हर महीने एक उड़ान लॉन्च करने की योजना है। कम लागत भारत की स्पेस टेक्नोलॉजी की सबसे बड़ी खासियत रही है। इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन ने पश्चिमी देशों के मुकाबले बहुत कम खर्च में मंगल और चंद्रमा मिशन पूरे किए हैं। डाका का कहना है कि स्पेसएक्स बेहतर तरीके से फेल होने और तेजी से आगे बढ़ने की रणनीति अपनाती है। इससे टेक्नोलॉजी में तेजी से तरक्की होती है, लेकिन इसमें बहुत ज्यादा पैसा खर्च होता है। स्काईरूट को पैसे के मामले में बहुत सावधान रहना पड़ा और कंपनी का फोकस पहली बार में ही सही काम करने पर था।

हाल में खबर आई थी कि भारत के स्पेस रेगुलेटर IN-SPACe ने रिलायंस जियो के करीब 1,600 लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) सैटेलाइट तैनात करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इससे पता चलता है कि भारत में आने वाले दिनों में सैटेलाइट लॉन्च की डिमांड कितनी बढ़ने वाली है। स्काईरूट की सफलता ने कई उद्योगपतियों का ध्यान अपनी तरफ खींचा है। हाल में वेदांता का चेयरमैन और दिग्गज उद्योगपति अनिल अग्रवाल ने भी पवन चंदना से मुलाकात की थी।

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