केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा देने के बाद धर्मेंद्र प्रधान ने सबसे पहला काम क्या किया?

What First Dharmendra Pradhan did After Resigning: आखिरकार नीट पेपर लीक मामले में धर्मेंद्र प्रधान ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है. शनिवार दोपहर उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफार्म ‘एक्स’ के जरिए अपने इस्तीफे का ऐलान किया है. अपनी इस पोस्ट में धर्मेंद्र प्रधान ने इस बात का खुलासा भी किया है कि कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) और सरकार के बीच हुई तीसरे राउंड की बातचीत से पहले उन्होंने अपना इस्तीफा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सौंप दिया था. वहीं, शिक्षा मंत्री धर्मेंद प्रधान के इस्तीफे के बाद सरकार ने सीजेपी की दो अन्य मांगों को भी मान लिया. जिसके बाद, सीजेपी ने अपना प्रदर्शन खत्म कर प्रदर्शनकारियों को घर वापस जाने के लिए कह दिया है.
वहीं इस सभी घटनाक्रम के बीच उत्सुकता इस बात को लेकर भी है कि अपना इस्तीफा देने के बाद धर्मेंद्र प्रधान ने सबसे पहले क्या किया. तो इस बात का जवाब है कि इस्तीफा देने के कुछ मिनटों बाद ही उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफार्म ‘एक्स’ के अपने बायो पेज को अपडेट किया है. इस नए अपडेट में उन्होंने अपपनी प्रोफाइल से ‘केंद्रीय शिक्षा मंत्री’ हटा दिया है. अब उनके बायो पेज में उनका परिचय संबलपुर लोकसभा क्षेत्र का सांसद बताया गया है. उन्होंने अपने एक्स एकाउंट में बायो पेज में ‘सांसद (लोकसभा), संबलपुर | विचार व्यक्तिगत हैं | RT समर्थन नहीं है’ लिखा है.
अपने इस्तीफे के साथ धर्मेंद्र प्रधान ने सोशल मीडिया में क्या कहा?
कुछ घंटे पहले शिक्षा मंत्री से पूर्व शिक्षामंत्री हुए धर्मेंद्र प्रधान ने अपनी पोस्ट में लिखा है कि कॉकरोच जनता पार्टी और सरकार के बीच तीसरे दौर की बातचीत से कुछ घंटें पहले उन्होंने अपना इस्तीफा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सौंप दिया था. उन्होंने आगे लिखा कि देश-विरोधी ताकतें जंतर-मंतर के साथ पूरे देश में पैदा हुई परिस्थितियों का फायदा न उठा सकें, इस बात को ध्यान में रखते हुए अपने पद से इस्तीफा दिया है. उन्होंने यह भी लिखा कि देश की एकता बने रहे, देश के एक भी छात्र का भविष्य कानूनी उलझनों में न फंसे, बच्चे अपना समय पढ़ाई में लगाएं और अपना करियर बनाने पर ध्यान दें. इन बातों के मद्देनजर उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना इस्तीफा सौंप दिया है.
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर अड़े थे छात्र
जंतर-मंतर पर 20 जून से जमीं कॉकरोच जनता पार्टी शुरू से ही शिक्षा मंत्री धर्मेंद प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रही थी. वहीं सीजेपी के इस प्रदर्शन को राजनीतिक अवसर मानकर तमाम राजनैतिक पार्टियां इस प्रदर्शन से जुड़ती चली गईं. इसके बाद, 20 जुलाई को ‘संसद मार्च’ का ऐलान किया गया. मार्च के दौरान, छात्रों के हमदर्द बनकर उनकी भीड़ में घुसे अराजकतत्वों ने ऐसा माहौल खड़ा कर दिया कि पुलिस को बल इस्तेमाल करने में मजबूर होना पड़ गया. दुर्भाग्य से पुलिस की इस कार्रवाई में कई छात्र बुरी तरह से जख्मी हो गए. एक छात्रा की हालत यहां तक बिगड़ गई कि उसे वेंटिलेटर सपोर्ट देना पड़ा. इसके बाद, पुलिस की कार्रवाई के वीडियो को सोशल मीडिया में कुछ तरह से प्रसारित किया गया, जिससे नौजवानों को उकसाकर हिंसा के रास्ते पर भेजा जा सके. गमीमत रही कि अराजकतत्वों की यह कोशिश नाकाम रही.
सीजेपी ने वापस लिया अपना प्रदर्शन
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बावजूद जंतर-मंतर पर सीजेपी का प्रदर्शन खत्म नहीं हुआ. सीजेपी की मांग थी कि सरकार जब तक उनकी दो बाकी मांगें नहीं मानती है, तब तक प्रदर्शन जारी रहेगा. केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह के बातचीत के बाद सीजेपी के प्रवक्ता सौरभ दास और आशुतोष रंका ने प्रदर्शन खत्म करने का ऐलान कर दिया. दोनों मंत्रियों के साथ की गई कांफ्रेंस में उन्होंने कहा कि प्रदर्शन इस अच्छी नीयत के साथ खत्म किया जा रहा है कि सरकार छात्रों की अन्य मांगों को पूरा करने का अपना वादा निभाएगी. इसके बाद, उन्होंने जंतर मंतर पर मौजूद समर्थकों से अपने घर जाने का आह्वान कर दिया.




