जीडीपी से नहीं, जमीन पर नजर आए बदलाव

भारत में सबसे अमीर 10 फीसदी लोगों के पास कुल संपत्ति का लगभग 65 फीसदी हिस्सा है। सबसे ज्यादा कमाई करने वाले 10 फीसदी लोग राष्ट्रीय आय का 58 फीसदी हिस्सा पाते हैं, जबकि सबसे निचले 50 फीसदी लोगों को सिर्फ 15 फीसदी मिलता है। आर्थिक असमानता की यह खाई लगातार बढ़ती जा रही है। निश्चित तौर पर प्रधानमंत्री का यह हक है कि जीडीपी की ग्रोथ पर खुशी मनाने का आह्वान करें, पर जब तक इसका असर देश की मूल समस्याओं के निराकरण में नजर नहीं आएगा, देश के लोगों की उदासी दूर नहीं होगी। सरकार को सार्वजनिक क्षेत्र के साथ-साथ निजी क्षेत्र में भी युवाओं को रोजगार देना होगा। बड़ी संख्या में युवा अभी बेरोजगार हैं। उन्हें उनकी शिक्षा के अनुरूप रोजगार नहीं मिल पा रहा है। इस दिशा में कुछ प्रयास जरूर हुए हैं, फिर भी अभी और काम करने की जरूरत है। रोजगार मिलने से कई समस्याएं हल हो जाएंगी…
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से भारत की तरक्की का जश्न मनाने के लिए कहते हुए 7.8 फीसदी की शानदार जीडीपी ग्रोथ के लिए बधाई दी। सवाल यह है कि क्या आम आदमी देश में जीडीपी ग्रोथ को समझता है। क्या जीडीपी बढऩा देश की मौजूदा समस्याओं के समाधान का कोई पैमाना है। देश में जब प्रधानमंत्री जीडीपी बढ़ोतरी की घोषणा कर रहे थे, उसी दिन कमर्शियल एलपीजी के दाम में बढ़ोतरी हो गई है। दिल्ली में इसके दाम में 9.50 रुपए की बढ़ोतरी की गई है। दिल्ली में अब कमर्शियल सिलेंडर की कीमत 2747.50 रुपए, मुंबई में 2701 रुपए और चेन्नई में 2916.50 रुपए हो गई है। कमर्शियल सिलेंडर के महंगे होने से होटल, ढाबे आदि में खाना-पीना महंगा होना तय है। वहीं घर मिलने वाली चीजों के दाम में भी बढ़ोतरी हो सकती है। इसके अलावा 5 किलो वाले गैस सिलेंडर का भी दाम 2 रुपए बढक़र 764 रुपए हो गया है।
मुंबई और तमिलनाडु में दूध महंगा हो गया है। बॉम्बे मिल्क प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन ने थोक दूध की कीमतों में 9 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी की है। इससे दूध की थोक दर 93 रुपए से बढक़र 102 रुपए प्रति लीटर हो गई है। भारत में जुलाई-अगस्त 2026 के दौरान खाद्य महंगाई दर बढक़र 5.52 प्रतिशत हो गई है, जिसके कारण चीनी, प्याज, टमाटर, दाल और खाना पकाने के तेल जैसी जरूरी रसोई की चीजें महंगी हो गई हैं। चावल और दूध के दाम भी स्थिर से लेकर उच्च स्तर पर बने हुए हैं। महंगाई बढऩे के कारण प्याज (22.54 फीसदी), लहसुन (35.36 फीसदी) और अदरक (83.62 फीसदी) की कीमतों में भारी तेजी आई है। ईंधन और परिवहन महंगाई बढक़र 4.43 फीसदी हो गई है, जिससे माल ढुलाई की लागत बढ़ी है। रेस्त्रां और आवास सेवाओं की महंगाई दर बढक़र लगभग 7.72 फीसदी हो गई है। देश के आम आदमी को हर दिन होने वाली कठिनाइयों से जूझना पड़ रहा है। देश का मध्यम वर्ग और निम्न वर्ग को जीडीपी की ग्रोथ से अंतर तब पड़ता है, जब उनकी बुनियादी सुविधाओं में कोई बेहतरी नजर आए।
देश में पानी, बिजली, स्कूल, अस्पताल, सडक़, रोजगार, महंगाई जैसी बुनियादी समस्याओं की भरमार है। इनसे राहत मिलती भी है तो ऊंट के मुंह में जीरे जितनी। इससे बदलाव नजर नहीं आता। भारत की आधी से अधिक आबादी यानी करीब 60 करोड़ लोग गंभीर जल संकट का सामना कर रहे हैं। देश के भूजल का बड़ा हिस्सा आर्सेनिक, फ्लोराइड और अन्य भारी धातुओं (हैवी मेटल्स) की वजह से दूषित हो चुका है। बारिश का पर्याप्त पानी होने के बावजूद उचित हार्वेस्टिंग (संचयन) न होने के कारण पानी बेकार बह जाता है। नीति आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, साफ पीने का पानी न मिलने के कारण हर साल देश में करीब 2 लाख लोगों की मौत हो जाती है। वर्ष 2026 में भीषण गर्मी, रिकॉर्ड बिजली मांग (मई 2026 में 270 गीगावाट से अधिक) और स्थानीय रखरखाव के कारण उत्तर प्रदेश, दिल्ली, राजस्थान, ओडिशा और तेलंगाना जैसे कुछ राज्यों के इलाकों में आंशिक या अस्थायी कटौती की गई। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार भारत में बेघरता की दर प्रति 10000 लोगों पर 13 है। अर्थात 17 प्रतिशत लोगों के पास अपना घर नहीं है। देश के ग्रामीण क्षेत्रों में लगभग 35 प्रतिशत गांवों में स्थानीय स्तर पर कोई भी बुनियादी चिकित्सा सुविधा या स्वास्थ्य केंद्र उपलब्ध नहीं है। ग्रामीण सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में विशेषज्ञ डॉक्टरों और सर्जनों की भारी कमी है, जो लगभग 80 प्रतिशत तक खाली पड़े हैं। नीति आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले 10 वर्षों (2014-15 से 2024-25) में देश भर में करीब 94000 सरकारी स्कूल बंद या आपस में मर्ज किए गए हैं। इसका मतलब है कि औसतन हर दिन 25 स्कूलों पर ताला लगा है। इसी दशक में सरकारी स्कूलों में कुल छात्रों का नामांकन 2.26 करोड़ कम हुआ है, जो 2014-15 के 26.95 करोड़ से घटकर 2024-25 में 24.69 करोड़ रह गया है। देश के एक लाख से अधिक स्कूलों में आज भी बिजली की उचित सुविधा नहीं है, और कई स्थानों पर पीने का साफ पानी उपलब्ध नहीं है। 71959 स्कूलों में लड़कियों के लिए और 1.12 लाख स्कूलों में लडक़ों के लिए काम करने वाले शौचालय मौजूद नहीं हैं।
1.39 लाख स्कूलों में लाइब्रेरी और 2.65 लाख स्कूलों में खेल का मैदान नहीं है। डिजिटल लाइब्रेरी का अभाव तो लगभग 13.62 लाख स्कूलों में है। भारत में 15 से 29 वर्ष के युवाओं की बेरोजगारी दर जून 2026 में बढक़र 16.2 फीसदी हो गई है। 15-29 आयु वर्ग की महिलाओं में यह दर बढक़र 20.7 फीसदी हो गई। इसी आयु वर्ग के पुरुषों में यह दर 14.6 फीसदी दर्ज की गई। जून 2026 में शहरी युवा बेरोजगारी दर 18.2 फीसदी और ग्रामीण युवा बेरोजगारी दर 15.1 फीसदी रही। नीति आयोग की बहुआयामी गरीबी सूचकांक रिपोर्ट के अनुसार, सबसे अधिक गरीबी वाले राज्य बिहार में 51.91 फीसदी आबादी गरीब है। झारखंड में 42.16 फीसदी लोग गरीबी में जीवन बिता रहे हैं।
उत्तर प्रदेश में 37.79 फीसदी जनसंख्या गरीब है। मध्य प्रदेश में 36.65 फीसदी लोग गरीब हैं। भारत में सबसे अमीर 10 फीसदी लोगों के पास कुल संपत्ति का लगभग 65 फीसदी हिस्सा है। सबसे ज्यादा कमाई करने वाले 10 फीसदी लोग राष्ट्रीय आय का 58 फीसदी हिस्सा पाते हैं, जबकि सबसे निचले 50 फीसदी लोगों को सिर्फ 15 फीसदी मिलता है। आर्थिक असमानता की यह खाई लगातार बढ़ती जा रही है। निश्चित तौर पर प्रधानमंत्री का यह हक है कि जीडीपी की ग्रोथ पर खुशी मनाने का आह्वान करें, पर जब तक इसका असर देश की मूल समस्याओं के निराकरण में नजर नहीं आएगा, देश के लोगों की उदासी दूर नहीं होगी। सरकार को सार्वजनिक क्षेत्र के साथ-साथ निजी क्षेत्र में भी युवाओं को रोजगार देना होगा। बड़ी संख्या में युवा अभी बेरोजगार हैं। उन्हें उनकी शिक्षा के अनुरूप रोजगार नहीं मिल पा रहा है। इस दिशा में कुछ प्रयास जरूर हुए हैं, फिर भी अभी और काम करने की जरूरत है। रोजगार मिलने से कई समस्याएं हल हो जाएंगी।-योगेंद्र योगी




